By Malay Ojha | Published: 19 June 2026 at 11:52 AM
विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने अपने उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन किए। मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने देश और प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उनके इस दौरे को राजनीतिक और सामाजिक दोनों नजरियों से अहम माना जा रहा है।
राम जन्मभूमि परिसर से बाहर निकलने के बाद मुकेश सहनी ने कहा कि अयोध्या की धरती पर आकर उन्हें अलग तरह की आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति महसूस हुई। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि न्याय, मर्यादा, त्याग और लोककल्याण के सबसे बड़े प्रतीक हैं।
गुहराज निषाद और श्रीराम की मित्रता का जिक्र
मुकेश सहनी ने अपने बयान में भगवान गुहराज निषाद और प्रभु श्रीराम की मित्रता को विशेष तौर पर याद किया। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता समाज को बराबरी, सम्मान और भाईचारे का संदेश देता है। यह सिर्फ धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता की मिसाल भी है।
निषाद समाज के गौरव की बात
वीआईपी प्रमुख ने कहा कि निषाद समाज हमेशा से भगवान गुहराज निषाद की गौरवशाली परंपरा पर गर्व करता आया है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के साथ गुहराज निषाद का रिश्ता समाज में यह संदेश देता है कि हर वर्ग का सम्मान होना चाहिए और समाज में बराबरी जरूरी है।
देश और प्रदेश के लिए मांगी खुशहाली
मुकेश सहनी ने कहा कि उन्होंने रामलला से यही प्रार्थना की है कि देश और प्रदेश में शांति बनी रहे, समाज में सौहार्द कायम रहे और विकास की रफ्तार तेज हो। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि आए, यही उनकी कामना है।
कमजोर वर्गों के लिए भी की प्रार्थना
उन्होंने यह भी कहा कि समाज के गरीब, कमजोर, वंचित और जरूरतमंद लोगों के जीवन में बदलाव आए, इसके लिए भी उन्होंने विशेष प्रार्थना की। उनका कहना था कि समाज तभी मजबूत बन सकता है जब आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचे।
कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे अयोध्या
अयोध्या दौरे के दौरान पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उनके साथ मौजूद रहे। मंदिर दर्शन के बाद उन्होंने अपने समर्थकों और श्रद्धालुओं से मुलाकात की और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
राजनीतिक हलकों में भी चर्चा
मुकेश सहनी का यह दौरा राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ निषाद समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिहाज से भी यह दौरा अहम माना जा रहा है। खासकर आने वाले राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस यात्रा के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
आस्था और राजनीति दोनों का संगम
अयोध्या में रामलला के दर्शन को लेकर मुकेश सहनी ने साफ कहा कि यह उनका व्यक्तिगत आस्था का विषय है। लेकिन साथ ही उन्होंने जिस तरह सामाजिक समरसता और निषाद समाज की परंपरा को जोड़ा, उससे यह दौरा सिर्फ धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं रह गया।
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