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पटना में चार मरीजों की अनियमित धड़कन का RF एब्लेशन से इलाज, दवाओं से नहीं मिल रही थी राहत

By Malay Ojha | Published: 22 September 2026 at 07:46 PM

पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में अचानक तेज धड़कन और बार-बार धड़कन अनियमित होने की शिकायत से परेशान चार मरीजों का Radiofrequency Ablation (RF Ablation) के जरिए इलाज किया गया। अस्पताल के मुताबिक, इन मरीजों में दवाओं से धड़कन को नियंत्रित करने में परेशानी हो रही थी। प्रक्रिया के बाद चारों मरीजों को धड़कन से जुड़ी समस्या में राहत मिली।

इलाज कराने वालों में जमुई के खैरा की 35 वर्षीय नीलम कुमारी, बेगूसराय के बरौनी की 40 वर्षीय रंजू कुमारी, भोजपुर के 43 वर्षीय चंदन कुमार और औरंगाबाद के 60 वर्षीय संजय सिंह शामिल हैं। मरीजों के नाम बदले हुए हैं।

डॉ. बीबी भारती की टीम ने की प्रक्रिया
यह प्रक्रिया वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट एवं अस्पताल के निदेशक डॉ. बीबी भारती के नेतृत्व में की गई। टीम में डॉ. सुशांत, डॉ. सरोज मिश्रा, डॉ. शशांक, मनमोहन और तकनीशियन कमल शामिल रहे। फोर्ड हॉस्पिटल की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी सेवाओं के तहत 3D कार्डियक मैपिंग और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन जैसी प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं।

दिल में गड़बड़ी वाली जगह की होती है पहचान
डॉ. बीबी भारती के अनुसार, कुछ मरीजों में दिल के अंदर मौजूद एक खास हिस्से से असामान्य इलेक्ट्रिकल सिग्नल निकलने लगते हैं। इसकी वजह से अचानक दिल की धड़कन बहुत तेज हो सकती है या बार-बार अनियमित हो सकती है। ऐसे मामलों में सबसे पहले Electrophysiological Study (EPS) की मदद से यह पता लगाया जाता है कि धड़कन की गड़बड़ी किस हिस्से से शुरू हो रही है।

कैथेटर के जरिए दिया जाता है इलाज
गड़बड़ी वाली जगह की पहचान के बाद कैथेटर के जरिए उस हिस्से तक पहुंचा जाता है। इसके बाद वहां नियंत्रित रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा दी जाती है, जिससे असामान्य इलेक्ट्रिकल सिग्नल पैदा करने वाले ऊतक को निष्क्रिय किया जाता है। फोर्ड हॉस्पिटल अपनी इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी सेवा में रेडियोफ्रीक्वेंसी और क्रायो-एब्लेशन जैसी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख करता है।

बार-बार तेज धड़कन को नजरअंदाज न करें
डॉ. भारती ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को बार-बार अचानक तेज धड़कन, धड़कन के अनियमित होने या इसी तरह की परेशानी होती है तो सिर्फ दवा लेते रहने के बजाय इसकी वजह की जांच कराना जरूरी है। मरीज की स्थिति और जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर यह तय करते हैं कि दवा से इलाज पर्याप्त है या किसी प्रक्रिया की जरूरत है।

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पटना में चार मरीजों की अनियमित धड़कन का RF एब्लेशन से इलाज, दवाओं से नहीं मिल रही थी राहत

By Malay Ojha | Published: 22 September 2026 at 07:46 PM

पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में अचानक तेज धड़कन और बार-बार धड़कन अनियमित होने की शिकायत से परेशान चार मरीजों का Radiofrequency Ablation (RF Ablation) के जरिए इलाज किया गया। अस्पताल के मुताबिक, इन मरीजों में दवाओं से धड़कन को नियंत्रित करने में परेशानी हो रही थी। प्रक्रिया के बाद चारों मरीजों को धड़कन से जुड़ी समस्या में राहत मिली।

इलाज कराने वालों में जमुई के खैरा की 35 वर्षीय नीलम कुमारी, बेगूसराय के बरौनी की 40 वर्षीय रंजू कुमारी, भोजपुर के 43 वर्षीय चंदन कुमार और औरंगाबाद के 60 वर्षीय संजय सिंह शामिल हैं। मरीजों के नाम बदले हुए हैं।

डॉ. बीबी भारती की टीम ने की प्रक्रिया
यह प्रक्रिया वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट एवं अस्पताल के निदेशक डॉ. बीबी भारती के नेतृत्व में की गई। टीम में डॉ. सुशांत, डॉ. सरोज मिश्रा, डॉ. शशांक, मनमोहन और तकनीशियन कमल शामिल रहे। फोर्ड हॉस्पिटल की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी सेवाओं के तहत 3D कार्डियक मैपिंग और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन जैसी प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं।

दिल में गड़बड़ी वाली जगह की होती है पहचान
डॉ. बीबी भारती के अनुसार, कुछ मरीजों में दिल के अंदर मौजूद एक खास हिस्से से असामान्य इलेक्ट्रिकल सिग्नल निकलने लगते हैं। इसकी वजह से अचानक दिल की धड़कन बहुत तेज हो सकती है या बार-बार अनियमित हो सकती है। ऐसे मामलों में सबसे पहले Electrophysiological Study (EPS) की मदद से यह पता लगाया जाता है कि धड़कन की गड़बड़ी किस हिस्से से शुरू हो रही है।

कैथेटर के जरिए दिया जाता है इलाज
गड़बड़ी वाली जगह की पहचान के बाद कैथेटर के जरिए उस हिस्से तक पहुंचा जाता है। इसके बाद वहां नियंत्रित रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा दी जाती है, जिससे असामान्य इलेक्ट्रिकल सिग्नल पैदा करने वाले ऊतक को निष्क्रिय किया जाता है। फोर्ड हॉस्पिटल अपनी इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी सेवा में रेडियोफ्रीक्वेंसी और क्रायो-एब्लेशन जैसी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख करता है।

बार-बार तेज धड़कन को नजरअंदाज न करें
डॉ. भारती ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को बार-बार अचानक तेज धड़कन, धड़कन के अनियमित होने या इसी तरह की परेशानी होती है तो सिर्फ दवा लेते रहने के बजाय इसकी वजह की जांच कराना जरूरी है। मरीज की स्थिति और जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर यह तय करते हैं कि दवा से इलाज पर्याप्त है या किसी प्रक्रिया की जरूरत है।

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