By aryavartalive | Published: 15 June 2026 at 12:57 PM
पुरुषों में तेजी से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं के बीच प्रोस्टेट कैंसर एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। सत्यदेव सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. कुमार राजेश रंजन ने बताया कि यह कैंसर पुरुषों की प्रोस्टेट ग्रंथि में विकसित होता है, जो मूत्राशय के नीचे स्थित होती है और प्रजनन प्रणाली का अहम हिस्सा मानी जाती है।
उन्होंने कहा कि यह बीमारी अक्सर 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलती है और शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिससे कई बार मरीज देर से जांच कराते हैं।
शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉ. रंजन के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेतों में बार-बार पेशाब लगना, पेशाब करने में परेशानी, धार कमजोर होना, पेशाब या वीर्य में खून आना और कमर या हड्डियों में लगातार दर्द शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि कई मामलों में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई ही नहीं देते, इसलिए इसे “छुपा हुआ खतरा” भी कहा जाता है।
समय पर जांच से बढ़ती है इलाज की संभावना
विशेषज्ञों के मुताबिक इस बीमारी की पहचान मुख्य रूप से पीएसए जांच, एमआरआई और बायोप्सी के जरिए की जाती है। डॉ. रंजन ने कहा कि अगर बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इलाज की सफलता दर काफी बढ़ जाती है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
आधुनिक इलाज से संभव है नियंत्रण
उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में अब कई आधुनिक विकल्प मौजूद हैं। इसमें लेप्रोस्कोपिक रेडिकल प्रोस्टेट सर्जरी, रेडियोथेरेपी और हार्मोन थेरेपी जैसी तकनीकें शामिल हैं।
इन उपचार पद्धतियों की मदद से मरीज की स्थिति के अनुसार बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और कई मामलों में पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है।
जीवनशैली में बदलाव से घटता है खतरा
डॉ. कुमार राजेश रंजन ने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना, वजन नियंत्रित रखना और धूम्रपान व शराब से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी सलाह दी कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को समय-समय पर जांच जरूर करानी चाहिए, ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।
समय पर जांच ही सबसे बड़ी सुरक्षा
डॉक्टरों का कहना है कि प्रोस्टेट कैंसर में सबसे बड़ा खतरा देरी से जांच है। अगर नियमित स्वास्थ्य जांच की आदत बना ली जाए तो इस बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही पकड़ा जा सकता है और गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

