By Malay Ojha | Published: 17 June 2026 at 09:56 AM
खान सर और ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रोशन आनंद के बीच चल रहे विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रोशन आनंद की गिरफ्तारी को लेकर पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से जवाब मांगा है। आयोग ने पूरे मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस कदम के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
ज्ञान बिंदु कोचिंग के निदेशक रोशन आनंद की गिरफ्तारी को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने औपचारिक रूप से संज्ञान लिया है। आयोग की सदस्यीय खंडपीठ ने पटना पुलिस की कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच कराने का आदेश दिया है। आयोग ने पटना एसएसपी को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर भेजी जाए।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर की ओर से आयोग को भेजी गई शिकायत के आधार पर शुरू हुई है। शिकायत में दावा किया गया कि रोशन आनंद को गलत तरीके से आपराधिक मामले में फंसाया गया और उनकी गिरफ्तारी निष्पक्ष प्रक्रिया के अनुरूप नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
गिरफ्तारी को लेकर उठे कई सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया कि रोशन आनंद गंभीर किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद उनके खिलाफ पुलिस ने जल्दबाजी और एकतरफा कार्रवाई की। पत्र में आरोप लगाया गया कि पूरे मामले में निष्पक्षता नहीं दिखाई गई, जिससे पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं। इसी आधार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रिपोर्ट तलब की है।
जेल से बाहर आने के बाद रोशन आनंद का दावा
जेल से रिहा होने के बाद रोशन आनंद ने भी अपनी गिरफ्तारी को साजिश का हिस्सा बताया था। उन्होंने दावा किया था कि सिपाही भर्ती की तैयारी कराने वाले संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा को लेकर उन्हें निशाना बनाया गया। रोशन आनंद का कहना था कि उनके संस्थान से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का चयन हुआ था, जिसके कारण उन्हें फंसाने की कोशिश की गई।
भाई की हत्या तक का लगाया आरोप
रोशन आनंद ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा था कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने अपने भाई की हत्या तक को इसी कथित साजिश से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि इन आरोपों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
खान सर की कोचिंग पर हुआ था हमला
पूरे विवाद की शुरुआत उस घटना से हुई थी जब दो जून को पटना में खान सर की कोचिंग पर हमला हुआ था। इस मामले में खान सर की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में रोशन आनंद और उनके भाई प्रिंस यादव पर हमला करवाने का आरोप लगाया गया था।
तीन जून को हुई थी गिरफ्तारी
हमले के मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने तीन जून को रोशन आनंद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। गिरफ्तारी के बाद मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा। जेल से बाहर आने के बाद रोशन आनंद ने पुलिस और खान सर दोनों पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उन्हें जानबूझकर फंसाया गया।
अब रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद इस मामले की अहमियत और बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें पटना पुलिस की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं। फिलहाल आयोग की दखल के बाद यह मामला फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है।

