Saturday, June 13, 2026

National

spot_img

रूसी तेल पर सवाल उठाने वालों को जयशंकर का करारा जवाब, बोले- यूरोप के हथियारों से भारत पर हुए हमले

By Malay Ojha | Published: 12 June 2026 at 10:48 AM

रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत की आलोचना करने वाले यूरोपीय देशों को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो टूक जवाब दिया है। फिनलैंड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश वर्षों से ऐसे देशों को हथियार बेचते रहे हैं जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हमलों में किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है, किसी बाहरी दबाव में नहीं।

फिनलैंड में एक संवाद कार्यक्रम के दौरान जब एक पत्रकार ने भारत की रूस के प्रति कथित नरमी और रूसी तेल खरीदने पर सवाल उठाया तो विदेश मंत्री ने कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत तेल की खरीद कीमत और उपलब्धता के आधार पर करता है। जब वैश्विक बाजार में रूस का तेल अधिक मात्रा में उपलब्ध था और पश्चिम एशिया से आपूर्ति प्रभावित हो रही थी, तब भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी।

हथियारों की बिक्री का मुद्दा उठाया
विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है, लेकिन भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले हथियारों की आपूर्ति वर्षों से यूरोप करता रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे में भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले यूरोपीय देशों को अपने रिकॉर्ड पर भी नजर डालनी चाहिए।

ऊर्जा सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
जयशंकर ने कहा कि वर्ष 2022 में वैश्विक परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई थीं। रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो गई थी। उस समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने नागरिकों और उद्योगों के लिए सस्ती तथा पर्याप्त ऊर्जा सुनिश्चित करना था। इसी कारण भारत ने उपलब्ध विकल्पों में से सबसे व्यवहारिक रास्ता चुना।

अमेरिका का भी किया जिक्र
विदेश मंत्री ने कहा कि उस दौर में अमेरिका ने भी भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया था। उनका कहना था कि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए यह जरूरी माना गया था। उन्होंने संकेत दिया कि उस समय जो देश भारत की इस नीति को समझ रहे थे, वही बाद में अलग रुख अपनाते दिखाई दिए।

‘सिद्धांत नहीं, हितों का खेल’
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बार नीतियां परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि एक दिन किसी नीति को सही बताया जाता है और अगले दिन उसी पर सवाल उठने लगते हैं। इसलिए इस पूरे मुद्दे को केवल नैतिकता या सिद्धांतों के चश्मे से नहीं देखा जा सकता।

भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर
विदेश मंत्री ने दोहराया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों के आधार पर निर्णय लेता है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी वैश्विक शक्ति खेमे का हिस्सा बनकर नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपने हितों की रक्षा करता है। यही वजह है कि नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संतुलित और व्यावहारिक नीति अपनाती है।

क्या है पूरा विवाद?
रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखी। इसी मुद्दे को लेकर कई बार यूरोप और अमेरिका के कुछ राजनीतिक वर्गों ने भारत की आलोचना की। हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।

Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

रूसी तेल पर सवाल उठाने वालों को जयशंकर का करारा जवाब, बोले- यूरोप के हथियारों से भारत पर हुए हमले

By Malay Ojha | Published: 12 June 2026 at 10:48 AM

रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत की आलोचना करने वाले यूरोपीय देशों को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दो टूक जवाब दिया है। फिनलैंड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यूरोपीय देश वर्षों से ऐसे देशों को हथियार बेचते रहे हैं जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हमलों में किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेता है, किसी बाहरी दबाव में नहीं।

फिनलैंड में एक संवाद कार्यक्रम के दौरान जब एक पत्रकार ने भारत की रूस के प्रति कथित नरमी और रूसी तेल खरीदने पर सवाल उठाया तो विदेश मंत्री ने कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत तेल की खरीद कीमत और उपलब्धता के आधार पर करता है। जब वैश्विक बाजार में रूस का तेल अधिक मात्रा में उपलब्ध था और पश्चिम एशिया से आपूर्ति प्रभावित हो रही थी, तब भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी।

हथियारों की बिक्री का मुद्दा उठाया
विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है, लेकिन भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले हथियारों की आपूर्ति वर्षों से यूरोप करता रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे में भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले यूरोपीय देशों को अपने रिकॉर्ड पर भी नजर डालनी चाहिए।

ऊर्जा सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
जयशंकर ने कहा कि वर्ष 2022 में वैश्विक परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई थीं। रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो गई थी। उस समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने नागरिकों और उद्योगों के लिए सस्ती तथा पर्याप्त ऊर्जा सुनिश्चित करना था। इसी कारण भारत ने उपलब्ध विकल्पों में से सबसे व्यवहारिक रास्ता चुना।

अमेरिका का भी किया जिक्र
विदेश मंत्री ने कहा कि उस दौर में अमेरिका ने भी भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया था। उनका कहना था कि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए यह जरूरी माना गया था। उन्होंने संकेत दिया कि उस समय जो देश भारत की इस नीति को समझ रहे थे, वही बाद में अलग रुख अपनाते दिखाई दिए।

‘सिद्धांत नहीं, हितों का खेल’
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बार नीतियां परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि एक दिन किसी नीति को सही बताया जाता है और अगले दिन उसी पर सवाल उठने लगते हैं। इसलिए इस पूरे मुद्दे को केवल नैतिकता या सिद्धांतों के चश्मे से नहीं देखा जा सकता।

भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर
विदेश मंत्री ने दोहराया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों के आधार पर निर्णय लेता है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी वैश्विक शक्ति खेमे का हिस्सा बनकर नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपने हितों की रक्षा करता है। यही वजह है कि नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संतुलित और व्यावहारिक नीति अपनाती है।

क्या है पूरा विवाद?
रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखी। इसी मुद्दे को लेकर कई बार यूरोप और अमेरिका के कुछ राजनीतिक वर्गों ने भारत की आलोचना की। हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।

Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES