By Malay Ojha | Published: 16 June 2026 at 03:23 PM
राम मंदिर से जुड़ी दान राशि और बहुमूल्य शिलाओं के कथित गबन के आरोपों को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले को “महापाप और महाघोटाला” बताते हुए गहरी जांच की मांग की है। आरोप है कि मंदिर निर्माण से जुड़ी कई कीमती श्रीराम शिलाएं गायब हैं, जिससे विवाद और तेज हो गया है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि अयोध्या में चल रहे इस पूरे मामले की गंभीर जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावे से शुरू हुई बात धीरे-धीरे दान, जमीन और अब बहुमूल्य शिलाओं तक पहुंच गई है। उनका कहना है कि यह मामला साधारण नहीं बल्कि बड़े स्तर की गड़बड़ी का संकेत देता है।
1250 शिलाओं के गायब होने का दावा
मामले में सामने आए एक वीडियो में दावा किया गया है कि करीब 1250 बहुमूल्य श्रीराम शिलाएं गायब हैं। कहा जा रहा है कि ये शिलाएं सोने, चांदी और रत्नों से जड़ी हुई थीं और राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश से दान में आई थीं। आरोप है कि इनमें से कई शिलाओं का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है।
शिकायत के बाद पुलिस जांच शुरू
इस मामले में संतोष दूबे नाम के व्यक्ति ने पुलिस को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे, नकद राशि और आभूषणों के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही हुई है। इसके बाद थाना रामजन्मभूमि में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
विशेष जांच टीम कर रही पूछताछ
मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की गई है। टीम में वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो लगातार मंदिर परिसर और संबंधित लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अब तक कई लोगों से सवाल-जवाब हो चुके हैं और दस्तावेजों की जांच भी जारी है।
लगातार बढ़ रहा राजनीतिक विवाद
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि यह सिर्फ जांच का मामला नहीं बल्कि एक संगठित गड़बड़ी हो सकती है। वहीं एक अन्य नेता ने कहा कि आस्था के नाम पर जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया है।
आस्था और व्यवस्था पर उठे सवाल
पूरा विवाद अब केवल दान या शिलाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में कीमती वस्तुएं आखिर कहां गईं और इनके प्रबंधन में किस स्तर पर चूक हुई।
निष्कर्ष की ओर बढ़ती जांच
जांच एजेंसियां अब हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल पूरा मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

