By Malay Ojha | Published: 16 June 2026 at 03:52 PM
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मंगलवार, 16 जून को उन्होंने इस संबंध में याचिका दायर की। इस कदम के साथ ही विधानसभा चुनाव परिणाम को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इस याचिका को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि चुनाव में मिली हार के बाद यह ममता बनर्जी की पहली बड़ी कानूनी पहल है।
जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी स्वयं कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं और याचिका से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और सांसद भी मौजूद रहे। माना जा रहा है कि याचिका में भवानीपुर सीट के चुनाव परिणाम और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को चुनौती दी गई है।
भवानीपुर सीट पर हुई थी सीधी टक्कर
हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल रही। इस सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली थी। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले किए थे, जिसके कारण यह सीट पूरे देश की नजरों में रही।
करीब 15 हजार वोटों से मिली हार
चुनाव परिणाम आने पर भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा। आंकड़ों के अनुसार शुभेंदु अधिकारी को 73 हजार 917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी के खाते में 58 हजार 812 वोट आए। इस तरह शुभेंदु अधिकारी ने लगभग 15 हजार मतों के अंतर से जीत दर्ज की। परिणाम आने के बाद से ही इस सीट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी थी।
तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी के 20 सांसदों ने हाल ही में अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने एक नए राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा की और इसके संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को भी ज्ञापन सौंपा।
बागी सांसदों ने किया शक्ति प्रदर्शन
बागी नेताओं का दावा है कि उनके साथ बड़ी संख्या में सांसद जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि यह संख्या पार्टी के कुल सांसदों के दो-तिहाई से अधिक है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजरें कलकत्ता हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर क्या फैसला आता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर बढ़ती राजनीतिक हलचल भी तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है।

