By Malay Ojha | Published: 16 June 2026 at 04:42 PM
संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा 2026 का परिणाम जारी होने के कुछ ही घंटों बाद परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया ने परीक्षा में कथित अनियमितता और संभावित पेपर लीक को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि प्रश्नपत्र में पूछे गए बड़ी संख्या में सवाल एक निजी कोचिंग संस्थान की अध्ययन सामग्री से मेल खाते हैं। इसी आधार पर आयोग से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की गई है।
देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल इस परीक्षा को लेकर लगाए गए आरोपों ने अभ्यर्थियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। संगठन का कहना है कि मामला केवल सवालों की समानता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गहराई से जांच की जानी चाहिए ताकि परीक्षा प्रक्रिया पर उठ रहे संदेह दूर हो सकें।
छात्र संगठन ने वीडियो जारी कर उठाए सवाल
नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने इस मामले को सार्वजनिक करते हुए एक वीडियो जारी किया। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि परीक्षा में शामिल कुछ अभ्यर्थी संगठन के कार्यालय पहुंचे थे। इन अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र को लेकर गंभीर शंकाएं व्यक्त कीं और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
100 में से 82 सवाल मिलने का दावा
जाखड़ ने आरोप लगाया कि प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए 100 सवालों में से 82 सवाल एक निजी कोचिंग संस्थान “अनंतम आईएएस” की अध्ययन सामग्री से मिलते-जुलते पाए गए हैं। उनका कहना है कि केवल विषयवस्तु ही नहीं, बल्कि कई प्रश्नों की भाषा और प्रस्तुति भी काफी हद तक समान दिखाई देती है। यही वजह है कि संगठन इस मामले को गंभीर मान रहा है।
सवालों की भाषा को लेकर भी आपत्ति
छात्र संगठन का दावा है कि परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्न ऐसे थे जिनकी संरचना और शब्द चयन कथित अध्ययन सामग्री से काफी मिलता है। संगठन का कहना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह केवल संयोग का मामला नहीं माना जा सकता। हालांकि इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कोचिंग संस्थान पर भी लगाए गए आरोप
विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संबंधित निजी कोचिंग संस्थान पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद अध्ययन सामग्री में बदलाव किया गया और उससे जुड़ी तारीखों में भी कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
पारदर्शी जांच की मांग
छात्र संगठन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया पर कोई संदेह पैदा हुआ है तो उसे पूरी पारदर्शिता के साथ दूर किया जाना चाहिए। संगठन ने इस संबंध में आयोग को पत्र भी भेजा है और मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है।
आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब तक संघ लोक सेवा आयोग की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। आयोग की चुप्पी के कारण अभ्यर्थियों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों की नजरें उसके अगले कदम पर टिकी हुई हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में आयोग इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट कर सकता है।
परीक्षा प्रणाली पर फिर शुरू हुई बहस
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों के बीच यह मामला भी चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश की शीर्ष परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए हर आरोप की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वहीं दूसरी ओर कई लोग यह भी मानते हैं कि केवल सवालों की समानता को पेपर लीक का प्रमाण नहीं माना जा सकता, जब तक कि ठोस साक्ष्य सामने न आ जाएं।
आगे क्या?
फिलहाल पूरा मामला आरोप और जवाब के बीच अटका हुआ है। छात्र संगठन जांच की मांग पर अड़ा हुआ है जबकि आयोग की प्रतिक्रिया अभी सामने आनी बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

