By Malay Ojha | Published: 18 June 2026 at 04:37 PM
टेलीग्राम पर लगाए गए एक सप्ताह के प्रतिबंध को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने अदालत में दावा किया है कि यह मैसेजिंग प्लेटफॉर्म आतंकवादी गतिविधियों और संदिग्ध नेटवर्क के लिए सबसे आसान माध्यम बनता जा रहा है। सरकार के इस रुख के बाद अब सबकी नजर अदालत की अगली सुनवाई पर टिक गई है, जो भारत में टेलीग्राम के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
मामले की सुनवाई से पहले केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि इस पूरे मामले में विस्तृत जवाब अदालत की रजिस्ट्री में जमा करा दिया गया है। जैसे ही यह दस्तावेज आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनेगा, मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि उसके पास ऐसे तथ्य और निष्कर्ष मौजूद हैं, जिनके आधार पर कार्रवाई की गई।
टेलीग्राम को सुनवाई का मौका दिया गया
सुनवाई के दौरान सरकार ने यह भी कहा कि टेलीग्राम के प्रतिनिधियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था। उनके तर्कों और जांच एजेंसियों द्वारा जुटाई गई जानकारियों को रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार पूरे मामले की समीक्षा एक उच्चस्तरीय समिति ने की, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव ने की थी।
हाईकोर्ट ने उठाया अहम सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि यदि आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया गया है, तो क्या संबंधित पक्ष को निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनवाई का अवसर दिया गया था। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और टेलीग्राम को अपनी बात रखने का मौका मिला था।
अब अदालत के फैसले पर टिकी नजर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है। अदालत का फैसला यह तय कर सकता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाएगा। यही वजह है कि इस सुनवाई को तकनीकी और कानूनी जगत दोनों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार की चिंता की वजह क्या है?
सरकार का दावा है कि टेलीग्राम के कुछ फीचर ऐसे हैं, जिनके कारण संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान करना और उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी वजह से साइबर ठगी करने वाले गिरोह और अन्य अवैध नेटवर्क इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
परीक्षा से जुड़े विवादों में भी आया नाम
हाल के दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों के दौरान भी टेलीग्राम का नाम चर्चा में रहा। सरकार का मानना है कि गोपनीय सूचनाओं और कथित तौर पर लीक सामग्री के प्रसार में ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी संदर्भ में सुरक्षा एजेंसियों ने अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत बताई है।
कंपनी ने फैसले का किया विरोध
दूसरी ओर टेलीग्राम प्रबंधन इस कार्रवाई का विरोध कर रहा है। कंपनी का कहना है कि किसी एक प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने से जानकारी के अवैध प्रसार की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। कंपनी का तर्क है कि यदि कोई व्यक्ति गलत काम करना चाहता है तो वह दूसरे डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग कर सकता है।
करोड़ों यूजर्स पर असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक है और टेलीग्राम के यहां करोड़ों उपयोगकर्ता बताए जाते हैं। ऐसे में इस मामले का असर केवल कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन लोगों पर भी पड़ेगा जो रोजमर्रा के काम, पढ़ाई, कारोबार और संवाद के लिए इस मंच का उपयोग करते हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और सभी पक्ष अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में अदालत का रुख यह तय करेगा कि टेलीग्राम पर लगी रोक जारी रहेगी या उसे राहत मिलेगी। यही फैसला भारत में इस प्लेटफॉर्म की आगे की स्थिति भी स्पष्ट करेगा।
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