By aryavartalive | Published: 18 June 2026 at 04:46 PM
नीट यूजी पुनर्परीक्षा 2026 को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाने और उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की खबरों के बीच सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने केंद्र सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस परीक्षा की तैयारी सरकार युद्ध स्तर पर कर रही है, वह इस बात का संकेत है कि शिक्षा प्रणाली भरोसे के संकट से गुजर रही है।
धनंजय सिन्हा ने कहा कि किसी भी छात्र के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी किसी चुनौतीपूर्ण अभियान से कम नहीं होती। लाखों विद्यार्थी महीनों तक दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन जब परीक्षा प्रक्रिया को लेकर बार-बार विवाद सामने आते हैं तो सबसे अधिक नुकसान छात्रों का ही होता है। उनका कहना है कि अगर शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत और पारदर्शी होती तो प्रश्नपत्रों को पहुंचाने के लिए असाधारण इंतजाम करने की जरूरत नहीं पड़ती।
छात्रों के मानसिक दबाव पर जताई चिंता
धनंजय सिन्हा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। परीक्षा परिणाम आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र तनाव और निराशा का सामना करते हैं। कई मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी हैं। उन्होंने कहा कि केवल परीक्षा आयोजित कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों के मानसिक और सामाजिक पक्ष को भी समझना जरूरी है।
सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
सोशलिस्ट पार्टी इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से शिक्षा के मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा नीति को राजनीतिक बहस से ऊपर उठाकर देखने की जरूरत है। इसके लिए सभी दलों की बैठक बुलाकर ऐसी नीति तैयार की जानी चाहिए जो आने वाले वर्षों में छात्रों के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बना सके।
‘पढ़ाई का मकसद सिर्फ नौकरी नहीं’
धनंजय सिन्हा ने कहा कि आज समाज में शिक्षा को केवल रोजगार और कमाई से जोड़कर देखा जा रहा है। जबकि शिक्षा का असली उद्देश्य बेहतर नागरिक तैयार करना है। उनके मुताबिक एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था व्यक्ति को जिम्मेदार, संवेदनशील और समाज के प्रति जवाबदेह बनाती है। यदि शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम बनकर रह जाए तो उसके व्यापक सामाजिक उद्देश्य कमजोर पड़ जाते हैं।
तकनीक का सही इस्तेमाल जरूरी
उन्होंने कहा कि नई तकनीकों ने शिक्षा और जीवन दोनों को आसान बनाया है, लेकिन उनका उपयोग समाज के हित में होना चाहिए। तकनीक तभी सार्थक है जब उससे लोगों का जीवन बेहतर बने और युवाओं को सही दिशा मिले। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में विकास के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों के प्रशिक्षण की भी उठाई मांग
धनंजय सिन्हा ने कहा कि जिस तरह सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है, उसी तरह जनप्रतिनिधियों के लिए भी प्रशिक्षण व्यवस्था होनी चाहिए। उनके अनुसार सांसदों, विधायकों और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशासन, कानून और सुशासन से जुड़े विषयों की नियमित जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकें।
राम मंदिर दान पात्र मामले पर भाजपा पर निशाना
अयोध्या में राम मंदिर के दान पात्र से कथित चोरी की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि धर्म से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और वोट हासिल करने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को संविधान की भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए और धार्मिक आस्था को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए।
भोजपुर एनकाउंटर मामले में भी उठाए सवाल
भोजपुर में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले का उल्लेख करते हुए धनंजय सिन्हा ने राज्य की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी जैसी समस्याएं अब भी गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। उनका आरोप है कि कई बार ईमानदार लोगों को परेशान किया जाता है, जबकि प्रभावशाली लोगों को संरक्षण मिल जाता है।
सुधारों की मांग के साथ खत्म किया बयान
अपने बयान के अंत में धनंजय सिन्हा ने केंद्र और राज्य सरकारों से शिक्षा, प्रशासन और शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की। पार्टी का कहना है कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने और जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाने की जरूरत है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

