By Malay Ojha | Published: 18 June 2026 at 05:59 PM
अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की रकम को लेकर उठे विवाद के बीच निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी है। उन्होंने दावा किया कि कुछ धनराशि मंदिर परिसर के एक टॉयलेट के पास मिलने की सूचना मिली थी। यही वह घटना थी, जिसके बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप लिया और जांच की मांग उठी। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी सामने आने के बाद ट्रस्ट स्तर पर चर्चा हुई और राज्य सरकार से विशेष जांच दल गठित करने का अनुरोध किया गया।
एक विशेष बातचीत में नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि मंदिर परिसर के एक हिस्से में, जहां शौचालय स्थित है, वहां कुछ धनराशि पाई गई है। यह जानकारी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तक पहुंची और वह कुछ ही समय में मौके पर पहुंच गए। इसके बाद पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया शुरू की गई।
एसआईटी जांच की सिफारिश क्यों की गई?
नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार मामले को केवल आंतरिक जांच तक सीमित रखना उचित नहीं समझा गया। ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों के बीच चर्चा के बाद यह राय बनी कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए राज्य सरकार विशेष जांच दल का गठन करे। उनका कहना था कि जब मंदिर से जुड़े किसी भी मामले पर सवाल उठते हैं तो पारदर्शिता बनाए रखना सबसे जरूरी हो जाता है।
दान व्यवस्था में पहले से तय हैं सख्त नियम
निर्माण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि मंदिर में आने वाले दान के प्रबंधन के लिए विस्तृत व्यवस्था बनाई गई है। बैंक, ट्रस्ट और गिनती करने वाली टीम की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय हैं। उन्होंने कहा कि दान की गिनती में शामिल कर्मचारियों के लिए भी कई नियम बनाए गए हैं, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।
चंपत राय पर उठ रहे सवालों पर क्या बोले?
दान विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि चंपत राय लंबे समय से मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। उनके मुताबिक उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि वह इस तरह की किसी गतिविधि में शामिल हो सकते हैं।
“मुखिया होने के कारण सवाल उठ रहे हैं”
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि किसी भी संस्थान में शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति पर सवाल उठना स्वाभाविक होता है। चंपत राय ट्रस्ट के प्रशासनिक प्रमुख हैं, इसलिए लोगों की निगाहें उन पर हैं। हालांकि केवल पद की वजह से किसी व्यक्ति को दोषी मान लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
इस पूरे मामले में नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर परिसर की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि चोरी या गड़बड़ी जैसी कोई घटना हुई है तो इसका मतलब है कि निगरानी तंत्र कहीं न कहीं कमजोर साबित हुआ है। उनका मानना है कि इतनी बड़ी व्यवस्था में सुरक्षा और निगरानी का स्तर और मजबूत होना चाहिए।
800 कैमरे लगे, फिर भी कैसे हुई चूक?
उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में करीब 800 निगरानी कैमरे लगे हुए हैं और उनका संचालन नियंत्रण कक्ष के माध्यम से किया जाता है। इसके बावजूद यदि किसी घटना की जानकारी बाद में सामने आती है तो यह सवाल खड़ा होता है कि कैमरों की निगरानी कितनी प्रभावी रही। उन्होंने कहा कि यदि कैमरों की फुटेज से ही घटना का पता चला है तो इसका अर्थ है कि निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं कमी रही है।
जमीन खरीद विवाद पर भी बोले नृपेंद्र मिश्रा
बातचीत के दौरान मंदिर ट्रस्ट की ओर से जमीन खरीद को लेकर पहले उठे विवाद का भी जिक्र हुआ। इस पर नृपेंद्र मिश्रा ने माना कि उस समय अधिक सावधानी और ज्यादा पारदर्शिता बरती जाती तो बेहतर होता। उन्होंने कहा कि अयोध्या में जमीन से जुड़े कई कानूनी और प्रशासनिक पेच हैं, जिनके कारण प्रक्रिया जटिल हो जाती है।
‘यह दूसरी चेतावनी है, अब और सतर्कता जरूरी’
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि जमीन खरीद विवाद को पहली चेतावनी माना जा सकता है, जबकि मौजूदा दान विवाद दूसरी बड़ी चेतावनी है। उनका मानना है कि भविष्य में ट्रस्ट को हर प्रक्रिया में अतिरिक्त सावधानी और पूरी पारदर्शिता बरतनी होगी, ताकि किसी भी तरह के विवाद की गुंजाइश न बचे।
जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
राम मंदिर से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद देशभर में इसकी चर्चा हो रही है। अब सबकी निगाहें जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि दान की रकम को लेकर उठे सवालों के पीछे असल सच्चाई क्या है।
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