By Malay Ojha | Published: 02 July 2026 at 01:26 PM
महाकुंभ से चर्चा में आई मोनालिसा से जुड़े नाबालिग शादी मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। जिला न्यायालय मण्डलेश्वर की विशेष पॉक्सो अदालत ने फरमान खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने माना कि आरोपी फरार है और उसके बाहर रहने से साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका बनी हुई है। इसी के साथ इस मामले में फरमान की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
महाकुंभ से वायरल हुई मोनालिसा के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने फरमान खान को कोई राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी फिलहाल फरार है और यदि उसे अग्रिम जमानत दी गई तो जांच प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी गई।
मामला महेश्वर थाने में दर्ज है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं, बाल विवाह रोकथाम कानून और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है।
माता-पिता की शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
मोनालिसा के माता-पिता ने आरोप लगाया था कि फरमान खान उनकी नाबालिग बेटी को केरल ले गया और वहां शादी कर ली। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। इसके बाद कई एजेंसियों ने अलग-अलग स्तर पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की।
शुरुआत में फरमान ने दावा किया था कि मोनालिसा बालिग हैं और दोनों ने अपनी मर्जी से शादी की है, लेकिन जांच में सामने आए दस्तावेजों ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए।
केरल से शुरू हुई जांच, मध्य प्रदेश तक जुड़े सबूत
पूरे मामले की जांच केरल के उस मंदिर से शुरू हुई, जहां दोनों की शादी कराई गई थी। मंदिर प्रशासन ने जांच टीम को बताया कि विवाह आधार कार्ड में दर्ज उम्र के आधार पर कराया गया था। इसके बाद ग्राम पंचायत कार्यालय से विवाह पंजीकरण के दस्तावेज भी जुटाए गए।
जांच के दौरान पता चला कि विवाह पंजीकरण के लिए जिस जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया, उसमें दर्ज जन्म तिथि सही नहीं थी। इसके बाद जांच टीम ने मध्य प्रदेश के महेश्वर स्थित सरकारी अस्पताल और अन्य सरकारी रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
सरकारी रिकॉर्ड ने खोला पूरा राज
सरकारी अस्पताल के जन्म रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। इस आधार पर जब 11 मार्च 2026 को केरल में शादी हुई, तब उनकी उम्र केवल 16 वर्ष, 2 माह और 12 दिन थी।
यही दस्तावेज इस पूरे मामले का सबसे अहम सबूत बने। जांच अधिकारियों ने इसे नाबालिग विवाह का स्पष्ट प्रमाण माना।
गलत जन्म प्रमाण पत्र भी जांच के घेरे में
जांच टीम को यह भी पता चला कि पहले स्थानीय निकाय से जारी जन्म प्रमाण पत्र में मोनालिसा की जन्म तिथि बदलकर एक जनवरी 2008 दर्ज कराई गई थी। इसी दस्तावेज के आधार पर विवाह की प्रक्रिया पूरी की गई।
बाद में सरकारी रिकॉर्ड और अस्पताल के दस्तावेजों का मिलान करने पर जन्म तिथि गलत पाई गई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को उस प्रमाण पत्र को निरस्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए।
जाति प्रमाण पत्र भी बने जांच का हिस्सा
जांच के दौरान मोनालिसा के माता-पिता ने परिवार के जाति संबंधी दस्तावेज भी जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए। इन दस्तावेजों से यह पुष्टि हुई कि परिवार अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित है। इसी आधार पर मामले में अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून की धाराएं भी जोड़ी गईं।
72 घंटे की जांच में सामने आए कई अहम तथ्य
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अन्तर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित जांच दल ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश तक लगातार जांच की। करीब 72 घंटे तक चली इस कार्रवाई में विवाह से जुड़े दस्तावेज, जन्म रिकॉर्ड, अस्पताल के अभिलेख और स्थानीय निकाय के कागजात की जांच की गई।
जांच टीम का दावा है कि अलग-अलग राज्यों से जुटाए गए दस्तावेजों को जोड़ने के बाद पूरे मामले की तस्वीर साफ हो गई और कई अहम तथ्य सामने आए।
अब आगे क्या होगा?
अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद फरमान खान की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पुलिस अब आगे की कार्रवाई तेज कर सकती है। वहीं जांच एजेंसियां दस्तावेजों की सत्यता और कथित फर्जीवाड़े की भी अलग से जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और कानूनी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
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