By Malay Ojha | Published: 01 July 2026 at 12:49 PM
भारतीय सेना के नए प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पदभार संभालते ही सेना के भविष्य की दिशा साफ कर दी है। अपने पहले संबोधन में उन्होंने “जय से विजय” का नया मंत्र देते हुए कहा कि आने वाले समय में भारतीय सेना सिर्फ सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भरता और तीनों सेनाओं के बेहतर तालमेल के साथ हर चुनौती का मुकाबला करने के लिए खुद को और मजबूत बनाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सेना हर परिस्थिति में पूरी तरह तैयार रहेगी।
पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले संबोधन की शुरुआत “जय हिंद” से करते हुए जनरल धीरज सेठ ने इसे अपने जीवन का गर्व और जिम्मेदारी से भरा पल बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि देश ने उन पर जो भरोसा जताया है, उस पर पूरी निष्ठा के साथ खरा उतरने का प्रयास करेंगे।
शहीद सैनिकों को दी श्रद्धांजलि
अपने संबोधन में उन्होंने सबसे पहले देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि वीर जवानों का साहस, समर्पण और त्याग हमेशा भारतीय सेना की सबसे बड़ी ताकत रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।
सेना को और आधुनिक बनाने पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर
नए सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना पहले से ही युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार और अनुभवी बल है। हालांकि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और नई तरह की चुनौतियों को देखते हुए अब सेना में अत्याधुनिक तकनीक, आधुनिक हथियारों और नई युद्ध प्रणालियों को तेजी से शामिल किया जाएगा। उनका लक्ष्य ऐसी सेना तैयार करना है जो भविष्य की हर चुनौती का जवाब देने में सक्षम हो।
‘विजय’ के पांच सूत्रों से तय होगा आगे का रास्ता
जनरल धीरज सेठ ने अपने विजन को “विजय” नाम के पांच प्रमुख स्तंभों में बांटा। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में सेना इन्हीं प्राथमिकताओं के आधार पर आगे बढ़ेगी।
V– सतर्कता: सीमाओं और उभरते सुरक्षा खतरों पर लगातार नजर रखते हुए हर समय पूरी तैयारी बनाए रखना।
I– नवाचार और बदलाव: नई तकनीक, आधुनिक युद्ध प्रणाली और बदलती परिस्थितियों के अनुसार सेना में लगातार सुधार करना।
J– संयुक्तता और बेहतर तालमेल: थल, वायु और नौसेना के बीच समन्वय बढ़ाना, साथ ही सरकारी संस्थानों और नागरिक क्षेत्र के साथ मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना।
A– आत्मनिर्भरता: स्वदेशी तकनीक और भारतीय रक्षा प्रणालियों को बढ़ावा देकर सेना को अधिक आत्मनिर्भर बनाना, ताकि युद्ध के समय विदेशी संसाधनों पर निर्भरता कम हो।
Y– योद्धा प्रथम: अग्निवीरों, नियमित सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के प्रशिक्षण, कल्याण, तकनीकी दक्षता और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना।
पूर्व सेना प्रमुखों के योगदान को भी किया याद
जनरल धीरज सेठ ने अपने संबोधन में पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित सभी पूर्व सेना प्रमुखों के योगदान को सम्मानपूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि आज भारतीय सेना जिस मजबूत स्थिति में खड़ी है, उसमें उनके नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
देशवासियों को दिया भरोसा
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारतीय सेना देश की संप्रभुता, सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर समय पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए “जय” के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए अब सेना “जय से विजय” के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी। यही आने वाले समय में भारतीय सेना की कार्यशैली और प्राथमिकताओं की पहचान बनेगा।
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