By Malay Ojha | Published: 12 August 2026 at 10:45 PM
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि इस बेहद अहम समुद्री रास्ते पर अमेरिका का “पूरा कंट्रोल” है और उनका इरादा इसे बनाए रखने का है। उन्होंने अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी को “स्टील की दीवार” बताते हुए कहा कि ईरान के पास इसे चुनौती देने की ताकत नहीं है। ट्रंप ने यह बात बुधवार को अपने सोशल मीडिया मंच पर लिखी।
ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि हॉर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और उन्हें लगता है कि अमेरिका इसे आगे भी बनाए रखेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी को ऐसी दीवार बताया, जिसे पार करना ईरान के लिए संभव नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब हॉर्मुज को फिर से खोलने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अटक गई है।
ईरान की सैन्य ताकत पर ट्रंप का तीखा हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की सैन्य क्षमता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब प्रभावी नौसेना और वायुसेना नहीं बची है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के बचे हुए सैनिकों को वेतन नहीं मिल रहा है और उसकी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी बुरी तरह कमजोर हो चुकी है। हालांकि, ये ट्रंप के दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से पूरी तरह सत्यापित तथ्य के तौर पर नहीं पेश किया जा सकता।
बोले- ईरान के पास अब सिर्फ बातें बची हैं
ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व और अर्थव्यवस्था पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ईरान के पास पैसे नहीं हैं, देश की हालत खराब है और वहां महंगाई बहुत ज्यादा है। उन्होंने ईरान पर गलत सूचनाएं फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह सिर्फ बातें करता है और काम करने की स्थिति में नहीं है। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि ईरान अब मध्य पूर्व का “दादा” नहीं रहा।
हॉर्मुज में घटा जहाजों का आवागमन
हॉर्मुज को लेकर ट्रंप का दावा ऐसे समय आया है जब इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को केवल आठ जहाज हॉर्मुज से गुजरे, जबकि युद्ध से पहले यहां रोजाना करीब 130 से 140 जहाजों की आवाजाही होती थी। इससे साफ है कि इलाके में समुद्री यातायात अभी भी सामान्य नहीं हुआ है।
हॉर्मुज क्यों बना अमेरिका-ईरान टकराव का केंद्र?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से बाहर निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से के लिए यही रास्ता इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि इस इलाके में जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि तेल की कीमतों, समुद्री बीमा, परिवहन लागत और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
ईरान पर भी जहाजों को निशाना बनाने के आरोप
अमेरिकी समुद्री प्रशासन की मौजूदा चेतावनी में फारस की खाड़ी, हॉर्मुज और आसपास के समुद्री इलाकों में ईरान की ओर से वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ हमलों का खतरा बताया गया है। इसमें मिसाइल, ड्रोन और अन्य तरीकों से जहाजों को निशाना बनाए जाने की आशंका का उल्लेख है। यही कारण है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों के लिए जोखिम अब भी काफी ज्यादा माना जा रहा है।
फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष अब हॉर्मुज की लड़ाई तक पहुंचा
अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई थी। इसके बाद ईरान ने भी अमेरिका, इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सहयोगी देशों के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। संघर्ष के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री दबाव और जवाबी कार्रवाई का सबसे अहम मोर्चा बन गया।
युद्धविराम के बाद भी नहीं थमा तनाव
संघर्ष के बीच जून में युद्धविराम और बातचीत की कोशिश हुई थी। लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। जुलाई में अमेरिका ने फिर ईरानी समुद्री आवाजाही पर दबाव बढ़ाया और इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हॉर्मुज को लेकर टकराव दोबारा तेज हो गया। अब अगस्त में भी बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है।
हॉर्मुज खोलने पर दोनों देशों में फंसा पेंच
हॉर्मुज को सामान्य रूप से खोलना अब दोनों देशों के बीच बातचीत का सबसे मुश्किल मुद्दा बन चुका है। ईरान अमेरिकी दबाव और नाकेबंदी हटाने की मांग कर रहा है, जबकि अमेरिका चाहता है कि इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही बिना ईरानी नियंत्रण या शुल्क के हो। संभावित समझौते को लेकर कई प्रस्ताव सामने आए हैं, लेकिन अभी तक कोई स्थायी सहमति नहीं बनी है।
ट्रंप के बयान से फिर बढ़ा दबाव
ट्रंप का ताजा बयान बताता है कि अमेरिका हॉर्मुज के मुद्दे पर पीछे हटने के बजाय अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत दिखाना चाहता है। दूसरी तरफ ईरान भी इस जलडमरूमध्य को अपने दबाव के सबसे बड़े साधनों में से एक के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही और दोनों देशों के बीच बातचीत की दिशा पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
अब नजर इस बात पर कि हॉर्मुज कब सामान्य होगा
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य जहाज आवाजाही कब शुरू होगी। विशेषज्ञों के लिए सिर्फ नेताओं के बयान नहीं, बल्कि नियमित जहाजों की आवाजाही, समुद्री बीमा दरों में कमी और नाकेबंदी हटना वास्तविक स्थिति के संकेत होंगे। जब तक ये बदलाव नहीं आते, हॉर्मुज का संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार के लिए बड़ा जोखिम बना रहेगा।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

