National

spot_img

BPSC अभ्यर्थियों के अनिश्चितकालीन धरने को AISA का समर्थन, उत्तर पुस्तिका से लेकर जांच तक उठाए ये सवाल

By Malay Ojha | Published: 12 August 2026 at 10:14 PM

पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर चल रहे अभ्यर्थियों के अनिश्चितकालीन धरने को अब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) का भी समर्थन मिल गया है। बुधवार को आइसा के बिहार और पटना विश्वविद्यालय से जुड़े नेता धरना स्थल पर पहुंचे और अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में अपनी एकजुटता जताई। संगठन ने साफ कहा कि परीक्षा से जुड़े जरूरी आंकड़े और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं तथा पूरी प्रक्रिया को अभ्यर्थियों के सामने पारदर्शी बनाया जाए।

आइसा बिहार के राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपांकर, राज्य उपाध्यक्ष सबा आफ़रीन के अलावा पटना विश्वविद्यालय से जुड़े नेता विवेक आनंद सुंदर और आदर्श धरना स्थल पर पहुंचे। नेताओं ने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से बातचीत की और उनकी मांगों को जायज बताते हुए आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।

आइसा का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा केवल प्रश्नपत्र हल करने और परिणाम जारी होने तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। लाखों अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं और अपने भविष्य को ऐसी परीक्षाओं से जोड़ते हैं। ऐसे में परीक्षा के किसी भी चरण को लेकर सवाल उठते हैं तो संबंधित आयोग की जिम्मेदारी बनती है कि वह अभ्यर्थियों को स्पष्ट जानकारी दे।

वर्षों की मेहनत पर सवाल उठने से बढ़ी नाराजगी
आइसा नेताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अभ्यर्थियों का कई साल का समय, पैसा और मेहनत लगती है। परीक्षा के बाद यदि मूल्यांकन, उत्तर पुस्तिका या परिणाम को लेकर संदेह पैदा होता है तो उसका असर केवल एक परीक्षा पर नहीं पड़ता, बल्कि अभ्यर्थियों के पूरे भविष्य पर पड़ता है।

संगठन के मुताबिक, अभ्यर्थियों को यह जानने का अधिकार है कि उनकी परीक्षा का मूल्यांकन किस प्रक्रिया के तहत हुआ और उससे जुड़े नियमों का कितना पालन किया गया। इसी वजह से आंदोलनकारी अभ्यर्थी परीक्षा व्यवस्था में अधिक स्पष्टता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

डेटा और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
आइसा ने मांग की है कि परीक्षा से जुड़े सभी जरूरी आंकड़े और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। संगठन का कहना है कि इससे अभ्यर्थियों के बीच पैदा हो रहे सवालों और आशंकाओं को दूर करने में मदद मिलेगी।

आइसा ने यह भी कहा कि अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उत्तर पुस्तिका देखने की सुविधा मिलने से अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन और मूल्यांकन को लेकर उठ रहे सवालों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
आंदोलन में सबसे अहम मुद्दों में मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता भी शामिल है। आइसा का कहना है कि परीक्षा के मूल्यांकन से जुड़ी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें अभ्यर्थियों को किसी तरह का संदेह न रहे।

संगठन ने परीक्षा से जुड़े सभी नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का सख्ती से पालन करने की मांग की है। आइसा के मुताबिक, नियम केवल कागज पर मौजूद रहने के लिए नहीं होते, बल्कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उनका जमीन पर भी पालन जरूरी है।

अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग
आइसा ने परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की गलती या लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

आइसा के नेताओं ने कहा कि अभ्यर्थियों को केवल आश्वासन देने के बजाय उनके सवालों का ठोस और सार्वजनिक जवाब मिलना चाहिए। इससे परीक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम करने में मदद मिलेगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा होने की आशंका भी कम होगी।

सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं: आइसा
आइसा बिहार ने इस आंदोलन को केवल किसी एक परीक्षा या कुछ अभ्यर्थियों की समस्या मानने से इनकार किया है। संगठन का कहना है कि यह मामला बिहार की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और भरोसे से जुड़ा हुआ है।

बिहार में सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर भरोसा कायम रखना आयोग और संबंधित व्यवस्था की बड़ी जिम्मेदारी है। आइसा का कहना है कि जब अभ्यर्थियों को प्रक्रिया पर सवाल उठाने की जरूरत महसूस होती है तो उनकी बात को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी
आइसा ने कहा है कि वह अभ्यर्थियों के अनिश्चितकालीन आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ा है। संगठन ने संकेत दिया है कि यदि अभ्यर्थियों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाने के लिए छात्र और युवा समुदाय को जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

फिलहाल अभ्यर्थियों का धरना जारी है और उनकी मुख्य मांग परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्टता, दस्तावेजों की उपलब्धता, मूल्यांकन में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच है। आइसा के समर्थन के बाद इस मुद्दे को छात्र संगठन के स्तर पर भी आवाज मिल गई है।

बीपीएससी की परीक्षा व्यवस्था पहले भी रही है चर्चा में
बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता का मुद्दा पहले भी सामने आता रहा है। आयोग अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर परीक्षा से जुड़ी सूचनाएं, परिणाम, उत्तर पत्रक और आपत्तियों से संबंधित व्यवस्थाएं जारी करता है। आयोग की जानकारी के मुताबिक अभ्यर्थी कई परीक्षाओं में अपने अंक देख सकते हैं और कुछ परीक्षाओं में उत्तर पत्रक डाउनलोड करने की सुविधा भी दी जाती रही है।

ऐसे में मौजूदा आंदोलन के बीच अभ्यर्थियों की मांग है कि जिस परीक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उससे संबंधित जरूरी जानकारी भी स्पष्ट रूप से सामने रखी जाए। उनका कहना है कि इससे विवाद को लेकर स्थिति साफ होगी और अभ्यर्थियों के बीच भरोसा कायम किया जा सकेगा।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

BPSC अभ्यर्थियों के अनिश्चितकालीन धरने को AISA का समर्थन, उत्तर पुस्तिका से लेकर जांच तक उठाए ये सवाल

By Malay Ojha | Published: 12 August 2026 at 10:14 PM

पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर चल रहे अभ्यर्थियों के अनिश्चितकालीन धरने को अब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) का भी समर्थन मिल गया है। बुधवार को आइसा के बिहार और पटना विश्वविद्यालय से जुड़े नेता धरना स्थल पर पहुंचे और अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में अपनी एकजुटता जताई। संगठन ने साफ कहा कि परीक्षा से जुड़े जरूरी आंकड़े और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं तथा पूरी प्रक्रिया को अभ्यर्थियों के सामने पारदर्शी बनाया जाए।

आइसा बिहार के राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपांकर, राज्य उपाध्यक्ष सबा आफ़रीन के अलावा पटना विश्वविद्यालय से जुड़े नेता विवेक आनंद सुंदर और आदर्श धरना स्थल पर पहुंचे। नेताओं ने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से बातचीत की और उनकी मांगों को जायज बताते हुए आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।

आइसा का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा केवल प्रश्नपत्र हल करने और परिणाम जारी होने तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। लाखों अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं और अपने भविष्य को ऐसी परीक्षाओं से जोड़ते हैं। ऐसे में परीक्षा के किसी भी चरण को लेकर सवाल उठते हैं तो संबंधित आयोग की जिम्मेदारी बनती है कि वह अभ्यर्थियों को स्पष्ट जानकारी दे।

वर्षों की मेहनत पर सवाल उठने से बढ़ी नाराजगी
आइसा नेताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अभ्यर्थियों का कई साल का समय, पैसा और मेहनत लगती है। परीक्षा के बाद यदि मूल्यांकन, उत्तर पुस्तिका या परिणाम को लेकर संदेह पैदा होता है तो उसका असर केवल एक परीक्षा पर नहीं पड़ता, बल्कि अभ्यर्थियों के पूरे भविष्य पर पड़ता है।

संगठन के मुताबिक, अभ्यर्थियों को यह जानने का अधिकार है कि उनकी परीक्षा का मूल्यांकन किस प्रक्रिया के तहत हुआ और उससे जुड़े नियमों का कितना पालन किया गया। इसी वजह से आंदोलनकारी अभ्यर्थी परीक्षा व्यवस्था में अधिक स्पष्टता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

डेटा और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
आइसा ने मांग की है कि परीक्षा से जुड़े सभी जरूरी आंकड़े और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। संगठन का कहना है कि इससे अभ्यर्थियों के बीच पैदा हो रहे सवालों और आशंकाओं को दूर करने में मदद मिलेगी।

आइसा ने यह भी कहा कि अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उत्तर पुस्तिका देखने की सुविधा मिलने से अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन और मूल्यांकन को लेकर उठ रहे सवालों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
आंदोलन में सबसे अहम मुद्दों में मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता भी शामिल है। आइसा का कहना है कि परीक्षा के मूल्यांकन से जुड़ी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें अभ्यर्थियों को किसी तरह का संदेह न रहे।

संगठन ने परीक्षा से जुड़े सभी नियमों और मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का सख्ती से पालन करने की मांग की है। आइसा के मुताबिक, नियम केवल कागज पर मौजूद रहने के लिए नहीं होते, बल्कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उनका जमीन पर भी पालन जरूरी है।

अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग
आइसा ने परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की गलती या लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

आइसा के नेताओं ने कहा कि अभ्यर्थियों को केवल आश्वासन देने के बजाय उनके सवालों का ठोस और सार्वजनिक जवाब मिलना चाहिए। इससे परीक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम करने में मदद मिलेगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा होने की आशंका भी कम होगी।

सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं: आइसा
आइसा बिहार ने इस आंदोलन को केवल किसी एक परीक्षा या कुछ अभ्यर्थियों की समस्या मानने से इनकार किया है। संगठन का कहना है कि यह मामला बिहार की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और भरोसे से जुड़ा हुआ है।

बिहार में सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर भरोसा कायम रखना आयोग और संबंधित व्यवस्था की बड़ी जिम्मेदारी है। आइसा का कहना है कि जब अभ्यर्थियों को प्रक्रिया पर सवाल उठाने की जरूरत महसूस होती है तो उनकी बात को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी
आइसा ने कहा है कि वह अभ्यर्थियों के अनिश्चितकालीन आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ा है। संगठन ने संकेत दिया है कि यदि अभ्यर्थियों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाने के लिए छात्र और युवा समुदाय को जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

फिलहाल अभ्यर्थियों का धरना जारी है और उनकी मुख्य मांग परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्टता, दस्तावेजों की उपलब्धता, मूल्यांकन में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच है। आइसा के समर्थन के बाद इस मुद्दे को छात्र संगठन के स्तर पर भी आवाज मिल गई है।

बीपीएससी की परीक्षा व्यवस्था पहले भी रही है चर्चा में
बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता का मुद्दा पहले भी सामने आता रहा है। आयोग अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर परीक्षा से जुड़ी सूचनाएं, परिणाम, उत्तर पत्रक और आपत्तियों से संबंधित व्यवस्थाएं जारी करता है। आयोग की जानकारी के मुताबिक अभ्यर्थी कई परीक्षाओं में अपने अंक देख सकते हैं और कुछ परीक्षाओं में उत्तर पत्रक डाउनलोड करने की सुविधा भी दी जाती रही है।

ऐसे में मौजूदा आंदोलन के बीच अभ्यर्थियों की मांग है कि जिस परीक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उससे संबंधित जरूरी जानकारी भी स्पष्ट रूप से सामने रखी जाए। उनका कहना है कि इससे विवाद को लेकर स्थिति साफ होगी और अभ्यर्थियों के बीच भरोसा कायम किया जा सकेगा।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES