By aryavartalive | Published: 01 July 2026 at 12:26 PM
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़ आ गया है। सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इन दिनों सार्वजनिक कार्यक्रमों से लगभग दूर हैं और एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच उनसे जुड़ा एक भावुक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों का दाग लेकर अयोध्या से विदा नहीं होंगे। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वह पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे।
सूत्रों का कहना है कि चंपत राय फिलहाल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर इस विवाद को लेकर कोई प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। उनका पूरा ध्यान जांच प्रक्रिया पर है। ट्रस्ट से जुड़े लोगों का मानना है कि अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही वह आरोपों पर खुलकर जवाब देंगे। इसी वजह से पिछले कुछ दिनों में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी भी काफी कम रही है।
‘कलंक लेकर अयोध्या से नहीं जाऊंगा’
करीबी लोगों के अनुसार, हाल ही में हुई बातचीत में चंपत राय ने भावुक अंदाज में कहा कि राम मंदिर निर्माण का उनका लक्ष्य पूरा हो चुका है, लेकिन वह अपने ऊपर लगे आरोपों के साथ अयोध्या नहीं छोड़ सकते। उन्होंने कहा कि उनका नाम पूरी तरह साफ होना चाहिए और उसके बाद ही वह यहां से जाएंगे। इस बयान को पूरे विवाद के बीच उनकी सबसे अहम प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
मुख्य आरोपी का भी किया जिक्र
सूत्रों के मुताबिक, बातचीत के दौरान चंपत राय ने इस मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे टिन्नू यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें टिन्नू यादव से ऐसी उम्मीद नहीं थी और उसने उनका भरोसा तोड़ा। हालांकि इस पूरे मामले की सच्चाई अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
भगवान राम की प्रतिमा की ओर इशारा कर कही बड़ी बात
बताया जाता है कि 80 वर्षीय चंपत राय तीर्थ क्षेत्र पुरम स्थित अपने आवास में रह रहे हैं। उनके कमरे में बिस्तर के पास भगवान श्रीराम की एक छोटी प्रतिमा रखी है। हाल में जब कुछ करीबी लोग उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति की चिंता जताने पहुंचे तो उन्होंने प्रतिमा की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्हें किसी बात की चिंता नहीं है। उनका कहना था कि यदि प्रभु की इच्छा से उन पर आरोप लगे हैं तो उन्हीं की कृपा से सच्चाई भी सामने आएगी।
जांच अब ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंची
इस बीच जांच का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, अब जांच एजेंसियां ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी से भी पूछताछ की तैयारी में हैं। अधिकारियों का फोकस इस बात पर रहेगा कि मंदिर में मिलने वाले चढ़ावे की गिनती, बैंक में जमा करने और पूरी वित्तीय व्यवस्था की निगरानी किस तरह की जाती थी तथा कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई।
समझौता पत्र की भी होगी जांच
जांच एजेंसियां ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए समझौता पत्र की भी विस्तार से पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, इसी दस्तावेज के आधार पर दानराशि की गिनती, जमा और प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया तय की गई थी। अब यह देखा जाएगा कि उसमें तय सभी नियमों का पालन हुआ या नहीं। यदि कहीं कोई कमी या लापरवाही मिली तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
छह जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें
चढ़ावा विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक अब पहले तय तारीख से पहले बुलाई गई है। यह बैठक छह जुलाई को होगी। सूत्रों का कहना है कि बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, चढ़ावे के प्रबंधन और वित्तीय प्रणाली को और मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर भी विचार होने की संभावना है।
रिपोर्ट के बाद साफ होगी आगे की तस्वीर
फिलहाल पूरे मामले में सभी की नजर एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी है। रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है, किन लोगों की भूमिका सामने आती है और ट्रस्ट की ओर से आगे क्या फैसला लिया जाता है। माना जा रहा है कि इसी रिपोर्ट के बाद चंपत राय भी पहली बार पूरे विवाद पर विस्तार से अपनी बात रख सकते हैं।
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