By Malay Ojha | Published: 15 August 2026 at 12:10 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से करीब 77 मिनट के संबोधन में युवाओं को केंद्र में रखते हुए कई बड़े ऐलान किए। सबसे अहम घोषणा यह रही कि अगले एक साल में कम से कम एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था शुरू करने की बात कही गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के डिजिटल ढांचे, अच्छे शिक्षकों और तकनीक को जोड़कर ऐसा नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे बच्चों को महंगी कोचिंग के लिए घर से दूर नहीं जाना पड़े।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आने वाली पीढ़ी की जरूरतों पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार, उद्योग और कारोबार के तरीके को प्रभावित करेगी। ऐसे में भारत के युवाओं को इस तकनीक से पीछे नहीं रहना चाहिए। सरकार का लक्ष्य एक साल में एक करोड़ युवाओं को इससे जुड़ी ट्रेनिंग देने का है। यह घोषणा खास तौर पर नई पीढ़ी के युवाओं को भविष्य की नौकरियों और बदलते कामकाज के लिए तैयार करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी अब घर बैठे
प्रधानमंत्री ने महंगी कोचिंग को लेकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की चिंता भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को कई बार दूसरे शहरों में जाना पड़ता है और परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। इस परेशानी को कम करने के लिए सरकार मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था करेगी। इसके लिए देश में पहले से मौजूद डिजिटल ढांचे और शिक्षकों की क्षमता का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को भी अच्छी तैयारी का अवसर मिलने की उम्मीद है।
खेलों में छिपी प्रतिभा खोजेगा देश
प्रधानमंत्री ने खेलों में भारत की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई बड़े खेलों में अभी भारत की मौजूदगी अपेक्षा के मुताबिक नहीं है। इसे बदलने के लिए गांवों और शहरों में पांच से 15 साल तक के बच्चों के बीच प्रतिभा खोज अभियान चलाया जाएगा। चुने गए बच्चों को उनकी क्षमता के अनुसार खेल प्रशिक्षण देने की योजना है। इसका बड़ा लक्ष्य 2036 के ओलंपिक के लिए अभी से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करना है।
2036 के ओलंपिक पर नजर
प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि भारत को केवल कुछ चुनिंदा खेलों तक सीमित नहीं रहना है। देश को अधिक से अधिक खेलों में मजबूत उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके लिए प्रतिभा को छोटी उम्र में पहचानना और उसे सही प्रशिक्षण देना जरूरी है। गांवों और शहरों से खिलाड़ियों की खोज का प्रस्ताव इसी सोच का हिस्सा है। इससे उन बच्चों को भी आगे आने का मौका मिल सकता है, जिन्हें संसाधनों की कमी के कारण अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं मिल पाता।
विकास की राह में सात बड़ी शक्तियां
प्रधानमंत्री ने देश के विकास के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का भी उल्लेख किया। इसमें उत्पादन, कृषि और खाद्य उत्पादन, तकनीक और नवाचार, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, हरित और नीली अर्थव्यवस्था तथा सॉफ्ट पावर को विकास की प्रमुख ताकत बताया गया। इसके जरिए उन्होंने यह संकेत दिया कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, तकनीक, रक्षा, ऊर्जा, परिवहन और भारत की वैश्विक पहचान को भी साथ लेकर चलना है।
सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता पर जोर
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में तीन संयंत्रों में उत्पादन शुरू हो चुका है और आने वाले वर्षों में पांच से आठ और संयंत्र स्थापित होने की उम्मीद है। लंबे समय तक भारत में चिप निर्माण को लेकर चर्चा होती रही, लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन की सुविधाएं सीमित थीं। अब सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है।
गरीबी से बाहर निकले 25 करोड़ लोगों का दावा
प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में हुए आर्थिक और सामाजिक बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के करोड़ों लोगों के प्रयास से भारत ने बड़ी प्रगति की है। उन्होंने दावा किया कि करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाने वाला भारत आज तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय देशवासियों के परिश्रम और सामूहिक संकल्प को दिया।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वर्ष 2047 में देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे, तब भारत विकसित राष्ट्र के रूप में खड़ा होगा। उनके भाषण में तकनीक, युवाओं, रोजगार, खेल, उत्पादन और आत्मनिर्भरता को इसी बड़े लक्ष्य से जोड़कर पेश किया गया। खास बात यह रही कि स्वतंत्रता दिवस के भाषण में युवाओं के लिए घोषित योजनाओं का सीधा संबंध शिक्षा, कौशल और भविष्य के रोजगार से दिखाई दिया।
महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील
प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को लेकर भी सभी राजनीतिक दलों से संसद में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी को देश की विकास यात्रा का जरूरी हिस्सा बताया। उनके संबोधन में युवाओं के साथ महिलाओं की भूमिका और देश की सामाजिक ताकत को भी विकास के बड़े लक्ष्य से जोड़ने की कोशिश दिखाई दी।
युवाओं के लिए संदेश, आने वाले भारत की तैयारी
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का इस बार का स्वतंत्रता दिवस संबोधन युवाओं और भविष्य की अर्थव्यवस्था पर केंद्रित रहा। एक तरफ एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया, तो दूसरी तरफ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और कम उम्र में खेल प्रतिभाओं की खोज का खाका सामने रखा गया। इसके साथ सेमीकंडक्टर जैसे तकनीकी क्षेत्र और उत्पादन को बढ़ावा देने की योजनाओं को भी विकसित भारत की बड़ी तस्वीर में रखा गया। प्रधानमंत्री का संदेश यही रहा कि 2047 का भारत आज की युवा पीढ़ी की क्षमता, तकनीक और मेहनत के दम पर तैयार होगा।
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