By Malay Ojha | Published: 15 August 2026 at 08:11 PM
जन शक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘दिमागी नक्सली’ वाले बयान पर तीखा पलटवार किया है। पटना में पार्टी कार्यालय पर तिरंगा फहराने के बाद तेज प्रताप ने कहा कि कौन दिमागी तौर पर नक्सली है और किसे पहचानने की जरूरत है, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही बता सकते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए यहां तक कहा कि हो सकता है ऐसे लोग भारतीय जनता पार्टी में ही मौजूद हों। तेज प्रताप की इस टिप्पणी के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी का नया दौर शुरू हो गया है।
तेज प्रताप यादव ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पटना के हार्डिंग रोड स्थित जन शक्ति जनता दल के कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। कार्यक्रम में पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। तिरंगा फहराने के बाद उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों तथा वीर शहीदों को नमन किया।
पीएम के बयान पर तेज प्रताप का सीधा तंज
मीडिया से बातचीत में जब उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए भाषण में ‘दिमागी नक्सली’ के जिक्र को लेकर सवाल पूछा गया तो तेज प्रताप ने कहा कि कौन दिमागी रूप से नक्सली है और कौन नहीं, इसकी पहचान प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संभव है कि जिन लोगों को इस श्रेणी में रखा जा रहा है, उनमें से कुछ भारतीय जनता पार्टी में ही हों। उनके इस बयान को प्रधानमंत्री के भाषण पर सीधे राजनीतिक पलटवार के तौर पर देखा जा रहा है।
लाल किले से पीएम मोदी ने क्या कहा था?
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए नक्सलवाद और माओवादी विचारधारा का मुद्दा उठाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ देश ने बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन वैचारिक स्तर पर ऐसी सोच रखने वालों से अभी सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने ऐसे लोगों को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए उनकी पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की बात कही।
हथियार वाले नक्सलियों के बाद विचारधारा पर जोर
प्रधानमंत्री के भाषण में नक्सलवाद का मुद्दा खास तौर पर चर्चा में रहा। उन्होंने दावा किया कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को बड़ी सफलता मिली है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि माओवादी सोच रखने वाले कुछ लोग अब भी समाज में अपनी विचारधारा के जरिए हिंसा और अशांति का माहौल बनाने की कोशिश कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने ऐसी सोच की पहचान करने और उसे अलग-थलग करने की जरूरत बताई।
तेज प्रताप ने पार्टी के संकल्प भी दोहराए
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान तेज प्रताप यादव ने जन शक्ति जनता दल की राजनीतिक प्राथमिकताओं को भी सामने रखा। उन्होंने देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और जनता के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उनके मुताबिक देश को मजबूत बनाने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
आजादी के लिए बलिदान देने वालों को किया याद
तेज प्रताप ने कहा कि भारत की आजादी किसी एक व्यक्ति या एक समूह के प्रयास का परिणाम नहीं थी। इसके पीछे लाखों स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष, त्याग और बलिदान रहा है। उन्होंने लोगों से संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की। उनका कहना था कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि देश के प्रति अपने कर्तव्यों को याद करने का भी अवसर है।
जन शक्ति जनता दल की सक्रियता बढ़ाने की कोशिश
जन शक्ति जनता दल के गठन के बाद तेज प्रताप यादव लगातार अपनी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के जरिए उन्होंने एक तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय और जनता के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। पटना में आयोजित इस कार्यक्रम को पार्टी के विस्तार और राजनीतिक संदेश के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बिहार की राजनीति में बढ़ सकती है बयानबाजी
तेज प्रताप का प्रधानमंत्री मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर पलटवार ऐसे समय आया है, जब बिहार की राजनीति पहले से ही कई मुद्दों को लेकर गर्म है। प्रधानमंत्री के बयान पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में तेज प्रताप का यह कहना कि ‘हो सकता है ऐसे लोग भाजपा में ही हों’, राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। इससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी टकराव बढ़ने की संभावना है।
तिरंगे के साथ सामाजिक न्याय का संदेश
पटना स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में तेज प्रताप यादव ने देश की एकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की बात कही। उन्होंने सामाजिक समानता, जनता के अधिकार और सामाजिक न्याय को अपनी राजनीति का अहम हिस्सा बताते हुए इन मुद्दों पर आगे भी आवाज उठाने का संदेश दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया।
बयान से ज्यादा चर्चा अब उसके राजनीतिक असर की
तेज प्रताप यादव का यह बयान महज प्रधानमंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं है। उन्होंने जिस तरह ‘दिमागी नक्सली’ की पहचान को लेकर प्रधानमंत्री पर सवाल उठाया और संभावित रूप से भाजपा के भीतर ऐसे लोगों के होने की बात कही, उससे बयान ने राजनीतिक रंग ले लिया है। आने वाले दिनों में दूसरे दलों के नेताओं की प्रतिक्रिया भी इस विवाद को और हवा दे सकती है। फिलहाल स्वतंत्रता दिवस के दिन पटना से तेज प्रताप का यह बयान बिहार की राजनीति में चर्चा का नया विषय बन गया है।
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