By Malay Ojha | Published: 16 August 2026 at 11:08 AM
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।
लंबे समय तक रामपुरहाट की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे
आशिस बनर्जी रामपुरहाट की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय थे। वह इस विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक चुने गए थे। 2001 से लगातार कई चुनावों में उन्होंने रामपुरहाट का प्रतिनिधित्व किया। तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद उन्हें राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी मिलीं। वे स्कूल शिक्षा, कृषि और आयुष विभाग के मंत्री रहे। बाद में उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया गया।
2026 के चुनाव में पहली बार लगा बड़ा झटका
हालांकि, 2026 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक सफर के लिए बड़ा बदलाव लेकर आया। रामपुरहाट सीट से तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर आशिस बनर्जी को मैदान में उतारा था, लेकिन इस बार उन्हें भाजपा के ध्रुव साहा से हार का सामना करना पड़ा। ध्रुव साहा ने 1,11,920 वोट हासिल किए, जबकि आशिस बनर्जी को 87,687 वोट मिले। जीत का अंतर 24,233 वोट रहा।
चुनावी हार के बाद कम सक्रिय थे
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार विधानसभा चुनाव में हार के बाद आशिस बनर्जी की सक्रिय राजनीतिक गतिविधियां कुछ कम हो गई थीं। करीब ढाई दशक तक रामपुरहाट की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता के लिए यह चुनाव परिणाम बड़ा झटका माना गया था। उनकी हार के बाद रामपुरहाट में तृणमूल कांग्रेस के पुराने राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा शुरू हुई थी।
अनुव्रत मंडल के करीबी नेताओं में गिने जाते थे
बीरभूम की राजनीति में आशिस बनर्जी का नाम लंबे समय तक अनुव्रत मंडल के साथ जोड़ा जाता रहा। जिले की तृणमूल कांग्रेस की राजनीति में दोनों नेताओं की सक्रियता काफी महत्वपूर्ण रही। हालांकि, हाल के राजनीतिक बदलावों के बीच संगठन में भी कई फेरबदल हुए और आशिस बनर्जी की भूमिका पहले की तुलना में बदली हुई नजर आई।
पार्टी संगठन में भी हुआ था बदलाव
राज्य की सत्ता में बदलाव और 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद बीरभूम में तृणमूल कांग्रेस के संगठन को लेकर भी कई बदलाव हुए। आशिस बनर्जी ने जून में रामपुरहाट के जिला तृणमूल अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। इसके साथ ही उन्होंने बीरभूम तृणमूल कांग्रेस की कोर कमेटी की सदस्यता भी छोड़ दी थी। ऐसे में उनकी मौत ऐसे समय हुई है, जब जिले की राजनीति पहले ही बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है।
पत्र और मौत के बीच क्या संबंध?
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि घटनास्थल से मिला हाथ से लिखा पत्र उनकी मौत से ठीक पहले लिखा गया था या नहीं। पत्र में भ्रष्टाचार के आरोपों पर सफाई दिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन पुलिस अभी इसकी लिखावट और समय की जांच कर रही है। इसलिए पत्र में कही गई बातों को फिलहाल अंतिम तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
आशिस बनर्जी की मौत के बाद अब पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सबकी नजर है। शव कहां और किस स्थिति में मिला, घटनास्थल से क्या-क्या बरामद हुआ और आखिरी समय में उनके संपर्क में कौन था—इन सभी सवालों के जवाब जांच में तलाशे जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और मौत की सही वजह सामने आने का इंतजार है।
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