By Malay Ojha | Published: 12 August 2026 at 01:44 PM
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कई दिनों से जारी गतिरोध के बीच बुधवार को बड़ा प्रस्ताव रखा है। शाह ने कहा कि सरकार सदन में हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष से कहा कि अगर वह तैयार है तो आज दोपहर 3 बजे से चर्चा शुरू की जा सकती है और जरूरत पड़े तो गुरुवार दोपहर 3 बजे तक लगातार चर्चा कराई जाए। शाह ने साफ कहा कि पहले विपक्ष चर्चा के लिए तैयार हो।
अमित शाह ने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है। उन्होंने कहा कि वह सदन में उठाए जाने वाले सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। गृह मंत्री ने विपक्ष से दोपहर 2 बजे तक चर्चा से जुड़े पत्र देने को कहा और यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर प्रश्नकाल को स्थगित कर चर्चा का रास्ता बनाया जा सकता है।
शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद की कार्यवाही लगातार हंगामे की वजह से प्रभावित हो रही है। विपक्ष की ओर से छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, परीक्षा से जुड़े विवाद, चढ़ावे की चोरी और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जा रहा है। इन मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया है।
‘लापता, भाग गए’ जैसी भाषा ठीक नहीं- शाह
गृह मंत्री ने विपक्ष के उस आरोप पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उनके संसद में मौजूद नहीं रहने को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। शाह ने कहा कि गंभीर मुद्दों पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल ठीक नहीं है। उनका कहना था कि अगर संसद में चर्चा ही नहीं होगी तो सदन में आने का क्या फायदा।
उन्होंने कहा कि वह अपनी ओर से सारी बातें लिखकर देंगे और एक-एक सवाल का जवाब देंगे। शाह ने विपक्ष से चर्चा के लिए समय तय करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को भी इसके लिए आगे आना होगा।
राहुल गांधी ने शाह पर पलटवार किया
अमित शाह के बयान के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने कहा कि गृह मंत्री सदन चलने की बात करने के बजाय भाषण दे रहे हैं। उन्होंने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सीधे सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने पूछा कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश किसने दिया? उन्होंने छात्रों पर गोली और पैलेट गन चलाए जाने को लेकर भी जवाबदेही तय करने की मांग की। राहुल का आरोप है कि गृह मंत्री को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
राहुल बोले- पिछले 20 दिन से अमित शाह कहां थे?
राहुल गांधी ने अमित शाह की संसद में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर गृह मंत्री पिछले दिनों संसद में आते और विपक्ष के सवालों का जवाब देते तो आज ऐसी स्थिति नहीं बनती।
राहुल गांधी का कहना था कि विपक्ष लगातार इन मुद्दों को सदन में उठाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अब सरकार की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही जा रही है, जबकि विपक्ष गृह मंत्री से सीधे जवाब की मांग करता रहा है।
झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर भी सफाई
झारखंड में छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों पर राहुल गांधी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर चुप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह पहले ही संवाददाता सम्मेलन में अपना रुख साफ कर चुके हैं और छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते।
राहुल गांधी ने कहा कि झारखंड के मामले में उनकी स्थिति स्पष्ट है। उनका कहना था कि यह कहना गलत है कि वह इस मुद्दे पर चुप हैं। उन्होंने दावा किया कि वह इस विषय पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं।
कई मुद्दों पर आमने-सामने सरकार और विपक्ष
संसद में मौजूदा गतिरोध की जड़ में कई मुद्दे हैं। विपक्ष छात्रों से जुड़े विवाद, परीक्षा में कथित गड़बड़ी, धार्मिक स्थलों से जुड़े चढ़ावे की चोरी और परिसीमन जैसे सवालों पर सरकार से जवाब मांग रहा है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सदन की कार्यवाही चलनी चाहिए।
पिछले दिनों संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा था कि अमित शाह सदन में विस्तार से जवाब देने के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि विपक्ष को पूरा जवाब सुनना होगा। इसके बाद भी सदन में गतिरोध खत्म नहीं हो सका।
अब गेंद विपक्ष के पाले में डालने की कोशिश
अमित शाह के बुधवार के बयान को संसद के गतिरोध को खत्म करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने चर्चा के लिए सिर्फ कुछ घंटे नहीं बल्कि पूरे 24 घंटे का समय देने की पेशकश की है। उनका कहना है कि अगर विपक्ष गंभीर मुद्दों पर चर्चा चाहता है तो सरकार इसके लिए तैयार है।
दूसरी तरफ विपक्ष का कहना है कि सिर्फ चर्चा की पेशकश काफी नहीं है। विपक्ष चाहता है कि सरकार और खास तौर पर गृह मंत्री उन सवालों का जवाब दें, जिन्हें लेकर कई दिनों से संसद में हंगामा हो रहा है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष आज दोपहर 3 बजे से चर्चा के लिए एक साथ बैठते हैं या संसद का गतिरोध आखिरी दिन तक जारी रहता है।
आखिरी दिन से पहले बढ़ा सियासी दबाव
मानसून सत्र का आखिरी दिन गुरुवार को है। ऐसे में बुधवार को अमित शाह की ओर से 3 बजे से चर्चा शुरू करने की पेशकश को काफी अहम माना जा रहा है। यदि विपक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत होता है तो कई दिनों से ठप पड़ी कार्यवाही को अंतिम चरण में चर्चा के रास्ते पर लाया जा सकता है।
लेकिन राहुल गांधी के पलटवार से साफ है कि सरकार और विपक्ष के बीच केवल समय को लेकर ही मतभेद नहीं है। विपक्ष सीधे उन घटनाओं पर जवाब चाहता है, जिनमें छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यही वजह है कि बुधवार का दिन संसद के लिए बेहद अहम हो गया है।
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