Monday, June 29, 2026

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भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक, बोले- जरूरत पड़ी तो जान भी दे दूंगा, पीछे नहीं हटूंगा

By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 at 05:24 PM

लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा, राज्य का दर्जा और ज्यादा राजनीतिक अधिकार देने की मांग को लेकर क्लाइमेट एक्टिविस्ट और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने एक बार फिर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। उन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करते हुए साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

सोनम वांगचुक ने कहा कि वह दोबारा आंदोलन की राह पर नहीं आना चाहते थे, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से किए गए वादे पूरे नहीं होने और बातचीत की प्रक्रिया ठप पड़ जाने के कारण उन्हें मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि हालात बातचीत से सुलझ जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

‘खुशी से नहीं, मजबूरी में कर रहा हूं अनशन’
जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू करने के बाद वांगचुक ने कहा कि यह फैसला उनके लिए आसान नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं खुशी से अनशन पर नहीं बैठा हूं। मुझे दुख है कि फिर से यह रास्ता अपनाना पड़ रहा है। लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो अपनी जान की भी परवाह नहीं करूंगा।”

लद्दाख के लिए क्या हैं उनकी मुख्य मांगें?
वांगचुक का आंदोलन मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगों पर केंद्रित है। इनमें लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष सुरक्षा, पूर्ण राज्य का दर्जा और केंद्र शासित प्रदेश के लिए ज्यादा राजनीतिक प्रतिनिधित्व शामिल है। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है।

एनएसए में गिरफ्तारी का भी किया जिक्र
वांगचुक ने बताया कि सितंबर 2025 में लद्दाख आंदोलन के दौरान उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में उनकी रिहाई हुई। उन्होंने कहा कि इस साल फरवरी और मई में केंद्र सरकार के साथ बैठकें हुईं और मई की बैठक से उन्हें काफी उम्मीद जगी थी।

‘सरकार एक कदम आगे, दो कदम पीछे’
सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत में आगे बढ़ने का संकेत देती है, लेकिन बाद में अपने कदम पीछे खींच लेती है। उनका कहना है कि इससे लोगों का भरोसा टूट रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2013-14 में भी छठी अनुसूची को लेकर वादे किए गए थे, लेकिन बाद में उन पर अमल नहीं हुआ।

संसद में चर्चा की मांग
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख का मुद्दा सिर्फ एक क्षेत्र की मांग नहीं, बल्कि लोकतंत्र और लोगों के भरोसे से जुड़ा मामला है। उन्होंने मांग की कि संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हो और सरकार जवाबदेही तय करे। उनके मुताबिक केवल इस्तीफा देने या बयानबाजी करने से समाधान नहीं निकलेगा।

सभी दलों से समर्थन की अपील
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोचें और लद्दाख की मांगों का समर्थन करें। साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।

युवाओं को दिया संघर्ष का संदेश
सोनम वांगचुक ने युवाओं से कहा कि न्याय की लड़ाई में जेल जाने से डरना नहीं चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां इंसान को और मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि उनका पूरा आंदोलन शिक्षा और पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित है।

सीमा क्षेत्र होने से बढ़ी चिंता
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख देश की सीमाओं से जुड़ा बेहद संवेदनशील इलाका है और वहां की समस्याओं को लंबे समय तक टालना देशहित में नहीं है। उनका कहना है कि जल्द समाधान निकलना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में विश्वास और स्थिरता बनी रहे।

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भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक, बोले- जरूरत पड़ी तो जान भी दे दूंगा, पीछे नहीं हटूंगा

By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 at 05:24 PM

लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा, राज्य का दर्जा और ज्यादा राजनीतिक अधिकार देने की मांग को लेकर क्लाइमेट एक्टिविस्ट और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने एक बार फिर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। उन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करते हुए साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

सोनम वांगचुक ने कहा कि वह दोबारा आंदोलन की राह पर नहीं आना चाहते थे, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से किए गए वादे पूरे नहीं होने और बातचीत की प्रक्रिया ठप पड़ जाने के कारण उन्हें मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि हालात बातचीत से सुलझ जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

‘खुशी से नहीं, मजबूरी में कर रहा हूं अनशन’
जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू करने के बाद वांगचुक ने कहा कि यह फैसला उनके लिए आसान नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं खुशी से अनशन पर नहीं बैठा हूं। मुझे दुख है कि फिर से यह रास्ता अपनाना पड़ रहा है। लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो अपनी जान की भी परवाह नहीं करूंगा।”

लद्दाख के लिए क्या हैं उनकी मुख्य मांगें?
वांगचुक का आंदोलन मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगों पर केंद्रित है। इनमें लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष सुरक्षा, पूर्ण राज्य का दर्जा और केंद्र शासित प्रदेश के लिए ज्यादा राजनीतिक प्रतिनिधित्व शामिल है। उनका कहना है कि इन मुद्दों पर कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है।

एनएसए में गिरफ्तारी का भी किया जिक्र
वांगचुक ने बताया कि सितंबर 2025 में लद्दाख आंदोलन के दौरान उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में उनकी रिहाई हुई। उन्होंने कहा कि इस साल फरवरी और मई में केंद्र सरकार के साथ बैठकें हुईं और मई की बैठक से उन्हें काफी उम्मीद जगी थी।

‘सरकार एक कदम आगे, दो कदम पीछे’
सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत में आगे बढ़ने का संकेत देती है, लेकिन बाद में अपने कदम पीछे खींच लेती है। उनका कहना है कि इससे लोगों का भरोसा टूट रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2013-14 में भी छठी अनुसूची को लेकर वादे किए गए थे, लेकिन बाद में उन पर अमल नहीं हुआ।

संसद में चर्चा की मांग
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख का मुद्दा सिर्फ एक क्षेत्र की मांग नहीं, बल्कि लोकतंत्र और लोगों के भरोसे से जुड़ा मामला है। उन्होंने मांग की कि संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हो और सरकार जवाबदेही तय करे। उनके मुताबिक केवल इस्तीफा देने या बयानबाजी करने से समाधान नहीं निकलेगा।

सभी दलों से समर्थन की अपील
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोचें और लद्दाख की मांगों का समर्थन करें। साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।

युवाओं को दिया संघर्ष का संदेश
सोनम वांगचुक ने युवाओं से कहा कि न्याय की लड़ाई में जेल जाने से डरना नहीं चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां इंसान को और मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि उनका पूरा आंदोलन शिक्षा और पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित है।

सीमा क्षेत्र होने से बढ़ी चिंता
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख देश की सीमाओं से जुड़ा बेहद संवेदनशील इलाका है और वहां की समस्याओं को लंबे समय तक टालना देशहित में नहीं है। उनका कहना है कि जल्द समाधान निकलना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में विश्वास और स्थिरता बनी रहे।

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