By Malay Ojha | Published: 30 June 2026 at 08:45 AM
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आज सबसे बड़ा कानूनी मोड़ आने वाला है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होगी, जहां जनहित याचिका के जरिए पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने, एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करने और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। इस सुनवाई पर बिहार ही नहीं, पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी। जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि इस मामले की निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच तभी संभव है, जब इसे राज्य पुलिस से अलग किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाए।
सीबीआई जांच और एफआईआर की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि कथित एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाए। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए और उसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति करे। याचिका में दावा किया गया है कि भरत तिवारी की मौत को केवल पुलिस कार्रवाई मानकर नहीं छोड़ा जा सकता और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाए सवाल
इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया। रिपोर्ट के अनुसार भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं। इनमें दो गोलियां बाईं जांघ में, दो दाहिनी जांघ में और एक गोली बाएं पैर के पिछले हिस्से में लगी थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह सवाल और तेज हो गया कि मुठभेड़ की पूरी घटना आखिर किन परिस्थितियों में हुई।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
भरत तिवारी की मौत के बाद यह मामला लगातार राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। विपक्ष लगातार इसे कथित फर्जी मुठभेड़ बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
सरकार ने पहले ही कराई है न्यायिक जांच
राज्य सरकार ने इस मामले में पहले ही न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं याचिकाकर्ता का तर्क है कि चूंकि मामला पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है, इसलिए केवल न्यायिक जांच पर्याप्त नहीं है और किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी निगाहें
आज होने वाली सुनवाई को इस पूरे मामले का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है। यदि सुप्रीम कोर्ट सीबीआई जांच या किसी स्वतंत्र जांच समिति के गठन पर कोई आदेश देता है तो यह जांच की दिशा बदल सकता है। दूसरी ओर यदि अदालत राज्य सरकार की मौजूदा जांच प्रक्रिया पर भरोसा जताती है तो आगे की कार्रवाई उसी आधार पर आगे बढ़ेगी। ऐसे में आज की सुनवाई से यह साफ हो सकता है कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच किस रास्ते पर आगे बढ़ेगी।
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