By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 at 09:52 PM
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा दावा सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने कहा है कि एनकाउंटर से पहले भरत तिवारी ने उनसे मुलाकात में आरोप लगाया था कि कटाव के बाद बसे जवइनिया गांव के लिए आए 1400 करोड़ रुपये के फंड में एसडीएम ने घोटाला किया है और इसमें डीएम तक शामिल हैं। अब यह मामला राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुंच गया है।
संजीव कुमार सिंह ने बताया कि मई 2026 में आरा आने पर उनकी भरत तिवारी से मुलाकात हुई थी। इस दौरान भरत तिवारी ने उन्हें कथित वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी दी थी और दावा किया था कि गांव के विकास के लिए आए बड़े फंड का गलत इस्तेमाल किया गया।
‘1400 करोड़ के फंड में हुआ घोटाला’
अधिवक्ता के मुताबिक, भरत तिवारी ने कहा था कि जवइनिया गांव के पुनर्वास और विकास के लिए सरकार की ओर से करीब 1400 करोड़ रुपये का फंड आया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस फंड में एसडीएम स्तर पर घोटाला हुआ है और इसमें डीएम तक की भूमिका है।
हाई कोर्ट जाने की थी तैयारी
संजीव कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने भरत तिवारी से कहा था कि इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी और पूरे मामले को सार्वजनिक किया जाएगा। लेकिन उससे पहले ही एनकाउंटर की घटना हो गई।
राष्ट्रपति सचिवालय ने लिया संज्ञान
अधिवक्ता ने 24 जून को राष्ट्रपति को ईमेल भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। सोमवार को राष्ट्रपति सचिवालय ने बिहार के मुख्य सचिव को इस मामले में कार्रवाई करने और रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
एफआईआर में नामजद अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग
संजीव कुमार सिंह ने कहा है कि एफआईआर में जिन अधिकारियों और जवानों के नाम दर्ज हैं, उनकी जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे अदालत में गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग करेंगे।
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