By Malay Ojha | Published: 30 June 2026 at 01:00 PM
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि अभी अंतरिम जमानत पर फैसला नहीं लिया जा सकता। पहले राजस्थान सरकार का पक्ष सुना जाएगा। अदालत ने यह भी माना कि मामला गंभीर है और जमानत पर फैसला करते समय सभी पहलुओं पर विचार करना जरूरी होगा।
सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने आसाराम की अंतरिम जमानत की मांग पर तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि बिना राजस्थान सरकार का जवाब सुने कोई फैसला लेना उचित नहीं होगा। इसी के साथ राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए उसका पक्ष मांगा गया है।
सरकार का जवाब आने के बाद होगी अगली सुनवाई
पीठ ने साफ किया कि जमानत पर अंतिम फैसला सरकार का जवाब मिलने के बाद ही किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि मामले की गंभीरता और सभी कानूनी पहलुओं को देखते हुए जल्दबाजी में कोई आदेश नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने प्रभावशाली हैसियत का भी किया जिक्र
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की सामाजिक और सार्वजनिक हैसियत को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जमानत पर विचार करते समय यह देखना जरूरी होगा कि कहीं इसका मुकदमे या अन्य पहलुओं पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा। इसलिए सभी तथ्यों की जांच के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।
स्वास्थ्य को लेकर भी अदालत ने रखी साफ शर्त
आसाराम की ओर से बढ़ती उम्र और कई बीमारियों का हवाला देकर अंतरिम जमानत मांगी गई। इस पर अदालत ने कहा कि केवल उम्र या सामान्य बीमारी जमानत का आधार नहीं बन सकती। यदि कभी ऐसी गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति सामने आती है, जिसमें जान का खतरा हो, तभी अदालत इस पहलू पर अलग से विचार कर सकती है।
जेल में इलाज जारी रखने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि आसाराम को जो भी चिकित्सीय सुविधाएं अभी मिल रही हैं, उन्हें बिना किसी रुकावट के जारी रखा जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इलाज को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
राज्य सरकार ने क्या बताया?
राजस्थान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हाल ही में आसाराम को स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया था। सरकारी पक्ष का कहना था कि फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है और उन्हें जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसलिए तत्काल जमानत की जरूरत नहीं बनती।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
आसाराम के वकील ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल की उम्र अस्सी वर्ष से अधिक है और वे कई बीमारियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस मामले में उन्हें सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं का नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि पीड़ित पक्ष के वकील ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला एक नाबालिग पीड़िता से जुड़ा है और इसे हल्के में नहीं देखा जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
आसाराम को वर्ष 2013 में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में राजस्थान हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी गई। इस वर्ष मई में हाई कोर्ट ने कुछ आरोपों से राहत देते हुए सह-आरोपियों को बरी कर दिया, लेकिन दुष्कर्म के आरोप में आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा बरकरार रखी।
अब आगे क्या होगा?
अब सुप्रीम कोर्ट राजस्थान सरकार का विस्तृत जवाब मिलने के बाद अगली सुनवाई करेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि आसाराम की अंतरिम जमानत की मांग स्वीकार की जाएगी या नहीं। फिलहाल अदालत ने साफ संकेत दिया है कि बिना ठोस और गंभीर कारण के राहत मिलने की संभावना नहीं है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

