By Malay Ojha | Published: 08 July 2026 at 12:41 PM
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही विशेष जांच टीम को बड़ी सफलता मिली है। जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर कथित फर्जी रसीद बुक बरामद की गई है। पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया है कि वे श्रद्धालुओं से चंदा लेने के लिए इन्हीं रसीदों का इस्तेमाल करते थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस खुलासे से पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं और आने वाले दिनों में कई नए नाम भी सामने आ सकते हैं।
विशेष जांच टीम की कार्रवाई के दौरान सामने आए इस नए खुलासे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, बरामद रसीद बुक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पुरानी रसीद जैसी दिखाई देती है। पहली नजर में इसे असली और नकली में पहचानना आसान नहीं था। यही वजह रही कि कई श्रद्धालु बिना किसी संदेह के इन रसीदों के आधार पर धनराशि सौंपते रहे।
पूछताछ में आरोपियों ने क्या बताया?
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि जब कोई श्रद्धालु मंदिर के लिए दान देने की इच्छा जताता था, तब उसे भरोसा दिलाने के लिए फर्जी रसीद थमा दी जाती थी। इससे लोगों को लगता था कि उनका पैसा सीधे मंदिर के खाते में जा रहा है, जबकि वास्तविकता कुछ और थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस तरीके से कितनी राशि की वसूली की गई।
किन लोगों के नाम आए सामने?
जांच के दौरान जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्रा समेत कई गिरफ्तार आरोपी शामिल हैं। जांच टीम सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं हो सकता।
हूबहू असली जैसी बनाई गई थी रसीद
सूत्रों के अनुसार, बरामद रसीद पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का लोगो भी छपा हुआ था। रसीद का डिजाइन और प्रारूप इतना मिलता-जुलता था कि आम श्रद्धालु आसानी से उसे असली समझ बैठता था। यही वजह रही कि लंबे समय तक किसी को इस पूरे खेल की भनक नहीं लगी।
ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद बदला तरीका
जांच में यह भी सामने आया है कि जब मंदिर में कागजी रसीद व्यवस्था समाप्त कर दी गई और दान की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई, तब इस कथित गिरोह ने पुरानी रसीदों का इस्तेमाल बंद कर दिया। नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालु सीधे मंदिर के अधिकृत बैंक खाते में राशि जमा करते हैं या मंदिर परिसर के अधिकृत दान काउंटर से पावती प्राप्त करते हैं।
अब जांच का दायरा बढ़ा
विशेष जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी रसीदें किसने छपवाईं, उनका खर्च किसने उठाया और इस पूरे नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था। जांच अधिकारी वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
पहले भी सामने आए थे चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप
राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर पहले भी कई तरह के आरोप सामने आ चुके हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की गई थी। अब फर्जी रसीद बुक की बरामदगी के बाद जांच को महत्वपूर्ण सबूत मिल गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।
श्रद्धालुओं से सतर्क रहने की अपील
जांच से जुड़े अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मंदिर में दान केवल अधिकृत माध्यमों से ही करें। किसी भी व्यक्ति को नकद राशि देने से पहले उसकी पहचान और अधिकृत व्यवस्था की पुष्टि जरूर करें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
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