By Malay Ojha | Published: 04 July 2026 at 10:43 AM
केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए 23 लोगों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत आतंकवादी घोषित कर दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद इन सभी नामों को कानून की चौथी अनुसूची में शामिल कर लिया गया है। सरकार का कहना है कि ये सभी लोग अलग-अलग आतंकी संगठनों से जुड़े रहे हैं और देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माने जाते हैं। इस सूची में एक ऐसा नाम भी शामिल है, जिसका स्थायी पता कर्नाटक के बेंगलुरु का बताया गया है, जबकि वह फिलहाल पाकिस्तान में रह रहा है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, जिन 23 लोगों को आतंकवादी घोषित किया गया है, उनमें अधिकतर के संबंध जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों से बताए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन लोगों की गतिविधियां भारत की सुरक्षा और शांति के लिए खतरा हैं। इसी आधार पर यूएपीए की धारा 35 के तहत इनके नाम चौथी अनुसूची में जोड़े गए हैं।
कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़े बताए गए आरोपी
सरकार की सूची में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर जैसे नाम भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक इन पर वर्ष 2016 में नगरोटा स्थित सेना शिविर पर हुए आतंकी हमले और वर्ष 2022 में जम्मू के सुंजवां इलाके में सुरक्षा बलों पर हुए हमले से जुड़े होने के आरोप हैं। इन मामलों में पहले भी कई बार इनके नाम सामने आ चुके हैं।
लश्कर के बड़े नेटवर्क से जुड़े होने का दावा
अधिसूचना में अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद का भी उल्लेख किया गया है। सरकार का कहना है कि दोनों लश्कर-ए-तैयबा के सक्रिय सदस्य हैं और संगठन के सरगना हाफिज मोहम्मद सईद के करीबी सहयोगियों में गिने जाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे लोग सीमा पार बैठकर आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने और नेटवर्क चलाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
बेंगलुरु से जुड़ा नाम सबसे ज्यादा चर्चा में
इस पूरी सूची में सबसे ज्यादा चर्चा मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर के नाम की हो रही है। गृह मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार उसका स्थायी पता कर्नाटक के बेंगलुरु का है, लेकिन वर्तमान में वह पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है। यही वजह है कि इस नाम ने सुरक्षा एजेंसियों का भी खास ध्यान खींचा है।
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने का आरोप
सरकार का आरोप है कि मोहम्मद शहीद फैसल का संबंध लश्कर-ए-तैयबा, अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े मॉड्यूल से रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार वह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने, आतंकी संगठनों में भर्ती कराने, हथियारों की ट्रेनिंग दिलाने और आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने का काम करता था।
यूएपीए की धारा 35 के तहत हुई कार्रवाई
गृह मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि उपलब्ध जानकारी और जांच के आधार पर केंद्र सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि सूची में शामिल सभी लोग आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इसी वजह से यूएपीए की धारा 35 के तहत इनके नाम चौथी अनुसूची में शामिल किए गए हैं। इस कानूनी प्रक्रिया के बाद जांच एजेंसियों के लिए इनके खिलाफ आगे की कार्रवाई करना और आसान हो जाता है।
संयुक्त सचिव ने जारी किया आदेश
यह अधिसूचना गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव राकेश राठी की ओर से जारी की गई है। सरकार का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत लगातार ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके। सुरक्षा एजेंसियां भी इन लोगों की गतिविधियों और नेटवर्क पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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