By Malay Ojha | Published: 03 July 2026 at 03:06 PM
बच्चों की सेहत को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य में स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में स्टिंग एनर्जी ड्रिंक की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। सरकार का कहना है कि कम उम्र के बच्चों और किशोरों में एनर्जी ड्रिंक पीने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। जल्द ही इस फैसले को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
महाराष्ट्र सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री नरहरी झिरवाल ने विधानसभा में इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्कूलों के आसपास बच्चों को एनर्जी ड्रिंक आसानी से उपलब्ध हो जाती है, जिससे उनका सेवन लगातार बढ़ रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में स्टिंग की बिक्री रोकने का निर्णय लिया है। इसके पालन के लिए संबंधित विभागों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए जाएंगे।
सरकार क्यों हुई सख्त?
सरकार का मानना है कि कम उम्र में अधिक मात्रा में एनर्जी ड्रिंक पीना बच्चों की सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसी वजह से यह फैसला एहतियात के तौर पर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों को ऐसे पेय पदार्थों से दूर रखना जरूरी है, जिनमें कैफीन और चीनी की मात्रा अधिक होती है।
एफएसएसएआई भी कंपनियों पर कर चुका है कार्रवाई
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी शीर्ष संस्था भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण भी एनर्जी ड्रिंक कंपनियों पर सख्ती दिखा रही है। हाल ही में प्राधिकरण ने कई बड़ी कंपनियों को नोटिस जारी कर उनके उत्पादों की ब्रांडिंग और विज्ञापनों पर सवाल उठाए हैं।
इन कंपनियों पर आरोप है कि वे अपने उत्पादों को ऐसे दावों के साथ बेच रही हैं, जिनसे उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिलाया जाता है कि पेय पदार्थ शरीर और दिमाग को अतिरिक्त ऊर्जा देता है या काम करने की क्षमता बढ़ाता है। नियामक का कहना है कि ऐसे दावों के लिए स्पष्ट वैज्ञानिक और कानूनी आधार होना जरूरी है।
‘एनर्जी ड्रिंक’ नाम पर भी उठे सवाल
खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण का कहना है कि भारत में अभी तक “एनर्जी ड्रिंक” नाम से कोई अलग आधिकारिक खाद्य श्रेणी तय नहीं की गई है। इसके बावजूद कई कंपनियां अपने उत्पादों को इसी नाम से बाजार में बेच रही हैं।
इसके अलावा “ऊर्जा बढ़ाने”, “फोकस बढ़ाने”, “कमजोरी दूर करने” और “तुरंत ताकत देने” जैसे प्रचार वाले दावों पर भी नियामक ने आपत्ति जताई है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं।
डॉक्टरों ने भी जताई चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से बच्चों और किशोरों में एनर्जी ड्रिंक के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि इन पेय पदार्थों में मौजूद अधिक कैफीन और चीनी कुछ समय के लिए शरीर को सक्रिय महसूस करा सकती है, लेकिन इससे वास्तविक ऊर्जा नहीं मिलती।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार या जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर दिल की धड़कन तेज होना, नींद में परेशानी, घबराहट, बेचैनी और रक्तचाप बढ़ने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। बच्चों में इसका असर वयस्कों की तुलना में अधिक गंभीर हो सकता है।
अभिभावकों की भूमिका भी अहम
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी रोक से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। अभिभावकों को भी बच्चों की खान-पान की आदतों पर ध्यान देना होगा। स्कूलों और परिवारों को मिलकर बच्चों को यह समझाना होगा कि चमकदार विज्ञापनों के बजाय स्वस्थ पेय पदार्थों को प्राथमिकता देना उनके भविष्य के लिए बेहतर है।
आगे क्या होगा?
सरकार जल्द ही इस फैसले से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी। इसके बाद संबंधित विभाग स्कूलों के आसपास दुकानों की निगरानी करेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, इसकी जानकारी भी सरकार जल्द सार्वजनिक करेगी।
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