Friday, July 3, 2026

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चलते ई-रिक्शा को मोबाइल से रोकने वाले 3 ऐप पर सरकार का बड़ा एक्शन, अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ खतरा!

By Malay Ojha | Published: 03 July 2026 at 03:30 PM

देशभर के लाखों ई-रिक्शा चालकों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने उन तीन मोबाइल ऐप्स को हटाने का आदेश दिया है, जिनका गलत इस्तेमाल करके चलते हुए ई-रिक्शा को अचानक बंद किया जा रहा था। इन ऐप्स के जरिए कुछ लोग ब्लूटूथ से बैटरी से जुड़कर वाहन रोक देते थे और फिर उसे ठीक करने के नाम पर चालकों से पैसे वसूलते थे। हालांकि ऐप स्टोर से हटने के बाद भी पहले से डाउनलोड किए गए ऐप्स को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बीएटी-बीएमएस, लॉसिजी और एपोक ली-आयन नाम के तीन मोबाइल ऐप्स को इंटरनेट और प्रमुख ऐप स्टोर से हटाने का निर्देश दिया है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए थे, जिनमें दावा किया गया था कि सड़क पर चल रहे ई-रिक्शा को कुछ लोग दूर से मोबाइल के जरिए बंद कर रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि इन ऐप्स के कुछ फीचर्स का गलत इस्तेमाल किया जा रहा था।

कैसे हो रहा था खेल?
ये ऐप मूल रूप से बैटरी की स्थिति पर नजर रखने के लिए बनाए गए थे। इनके जरिए बैटरी का तापमान, वोल्टेज और दूसरी तकनीकी जानकारी देखी जा सकती थी। लेकिन इनमें बैटरी को चालू और बंद करने का भी विकल्प मौजूद था।

इसी सुविधा का फायदा उठाकर कुछ लोग ई-रिक्शा के पास पहुंचते, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी से कनेक्ट हो जाते और कुछ ही सेकंड में बैटरी की सप्लाई बंद कर देते। इससे वाहन अचानक रुक जाता था। इसके बाद कई मामलों में चालक से वाहन ठीक करने के बहाने 200 से 300 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आईं।

ऐप हटने के बाद भी क्यों जरूरी है सतर्कता?
सरकार ने इन ऐप्स को नए लोगों के लिए डाउनलोड होने से रोक दिया है, लेकिन जिन मोबाइल फोन में ये पहले से मौजूद हैं, वहां ये अपने-आप हटेंगे नहीं। यानी यदि किसी के पास पहले से ये ऐप इंस्टॉल हैं तो उनका गलत इस्तेमाल अभी भी संभव हो सकता है।

सरकार इस दिशा में आगे की तकनीकी कार्रवाई पर भी काम कर रही है, ताकि ऐसे ऐप पूरी तरह निष्क्रिय किए जा सकें। तब तक वाहन मालिकों और चालकों को अपनी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

ई-रिक्शा चालक खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे पहले बैटरी के आधिकारिक ऐप में मजबूत पासवर्ड या पिन जरूर लगाएं। इससे कोई अनजान व्यक्ति आसानी से बैटरी से कनेक्ट नहीं हो पाएगा। अगर बैटरी में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है तो किसी भरोसेमंद मैकेनिक की मदद से फिजिकल बाईपास स्विच लगवाया जा सकता है। इससे बाहरी ऐप के जरिए बैटरी पर नियंत्रण खत्म हो जाएगा। इसके अलावा यदि जरूरत हो तो बैटरी के ब्लूटूथ सिस्टम को बंद या निष्क्रिय भी कराया जा सकता है। लंबे समय के लिए सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड बैटरी सिस्टम अपनाना सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

पासवर्ड या पिन लगाने का आसान तरीका
यदि आपकी बैटरी इस सुविधा के साथ आती है तो इन आसान चरणों का पालन करें।

  • बैटरी का आधिकारिक ऐप खोलें।
  • सेटिंग्स में जाएं।
  • ब्लूटूथ पासवर्ड या पिन का विकल्प चुनें।
  • नया और मजबूत पासवर्ड सेट करें।
  • बदलाव सेव करके ऐप बंद कर दें।

किन ई-रिक्शा में ज्यादा खतरा?
जानकारों के मुताबिक यह समस्या मुख्य रूप से उन ई-रिक्शा में सामने आई है जिनमें कम कीमत वाले या बिना सुरक्षा वाले बैटरी सिस्टम लगाए गए हैं। ऐसे कई सिस्टम में ब्लूटूथ बिना पासवर्ड के खुला रहता है, जिससे कोई भी व्यक्ति सीमित दूरी से कनेक्ट हो सकता है। यही वजह है कि सस्ते और बिना ब्रांड वाले ई-रिक्शा इस तरह की गड़बड़ी का ज्यादा शिकार बन रहे हैं।

इन बड़े ब्रांड के वाहन सुरक्षित
इस मामले में आम इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। बड़े और स्थापित वाहन निर्माता मजबूत सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं। उनकी बैटरी गाड़ी के मुख्य कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी होती है और उसे सामान्य ब्लूटूथ या किसी साधारण मोबाइल ऐप के जरिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि यह समस्या फिलहाल मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए या कम सुरक्षा वाले बैटरी सिस्टम इस्तेमाल करने वाले ई-रिक्शा तक सीमित मानी जा रही है।

आगे क्या होगा?
सरकार की कार्रवाई के बाद नए यूजर इन ऐप्स को डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। हालांकि पहले से मौजूद ऐप्स को पूरी तरह निष्क्रिय करने के लिए तकनीकी समाधान तैयार किया जा रहा है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक ई-रिक्शा चालकों को अपनी बैटरी की सुरक्षा सेटिंग्स मजबूत रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

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चलते ई-रिक्शा को मोबाइल से रोकने वाले 3 ऐप पर सरकार का बड़ा एक्शन, अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ खतरा!

By Malay Ojha | Published: 03 July 2026 at 03:30 PM

देशभर के लाखों ई-रिक्शा चालकों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने उन तीन मोबाइल ऐप्स को हटाने का आदेश दिया है, जिनका गलत इस्तेमाल करके चलते हुए ई-रिक्शा को अचानक बंद किया जा रहा था। इन ऐप्स के जरिए कुछ लोग ब्लूटूथ से बैटरी से जुड़कर वाहन रोक देते थे और फिर उसे ठीक करने के नाम पर चालकों से पैसे वसूलते थे। हालांकि ऐप स्टोर से हटने के बाद भी पहले से डाउनलोड किए गए ऐप्स को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बीएटी-बीएमएस, लॉसिजी और एपोक ली-आयन नाम के तीन मोबाइल ऐप्स को इंटरनेट और प्रमुख ऐप स्टोर से हटाने का निर्देश दिया है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए थे, जिनमें दावा किया गया था कि सड़क पर चल रहे ई-रिक्शा को कुछ लोग दूर से मोबाइल के जरिए बंद कर रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि इन ऐप्स के कुछ फीचर्स का गलत इस्तेमाल किया जा रहा था।

कैसे हो रहा था खेल?
ये ऐप मूल रूप से बैटरी की स्थिति पर नजर रखने के लिए बनाए गए थे। इनके जरिए बैटरी का तापमान, वोल्टेज और दूसरी तकनीकी जानकारी देखी जा सकती थी। लेकिन इनमें बैटरी को चालू और बंद करने का भी विकल्प मौजूद था।

इसी सुविधा का फायदा उठाकर कुछ लोग ई-रिक्शा के पास पहुंचते, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी से कनेक्ट हो जाते और कुछ ही सेकंड में बैटरी की सप्लाई बंद कर देते। इससे वाहन अचानक रुक जाता था। इसके बाद कई मामलों में चालक से वाहन ठीक करने के बहाने 200 से 300 रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आईं।

ऐप हटने के बाद भी क्यों जरूरी है सतर्कता?
सरकार ने इन ऐप्स को नए लोगों के लिए डाउनलोड होने से रोक दिया है, लेकिन जिन मोबाइल फोन में ये पहले से मौजूद हैं, वहां ये अपने-आप हटेंगे नहीं। यानी यदि किसी के पास पहले से ये ऐप इंस्टॉल हैं तो उनका गलत इस्तेमाल अभी भी संभव हो सकता है।

सरकार इस दिशा में आगे की तकनीकी कार्रवाई पर भी काम कर रही है, ताकि ऐसे ऐप पूरी तरह निष्क्रिय किए जा सकें। तब तक वाहन मालिकों और चालकों को अपनी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

ई-रिक्शा चालक खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे पहले बैटरी के आधिकारिक ऐप में मजबूत पासवर्ड या पिन जरूर लगाएं। इससे कोई अनजान व्यक्ति आसानी से बैटरी से कनेक्ट नहीं हो पाएगा। अगर बैटरी में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है तो किसी भरोसेमंद मैकेनिक की मदद से फिजिकल बाईपास स्विच लगवाया जा सकता है। इससे बाहरी ऐप के जरिए बैटरी पर नियंत्रण खत्म हो जाएगा। इसके अलावा यदि जरूरत हो तो बैटरी के ब्लूटूथ सिस्टम को बंद या निष्क्रिय भी कराया जा सकता है। लंबे समय के लिए सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड बैटरी सिस्टम अपनाना सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

पासवर्ड या पिन लगाने का आसान तरीका
यदि आपकी बैटरी इस सुविधा के साथ आती है तो इन आसान चरणों का पालन करें।

  • बैटरी का आधिकारिक ऐप खोलें।
  • सेटिंग्स में जाएं।
  • ब्लूटूथ पासवर्ड या पिन का विकल्प चुनें।
  • नया और मजबूत पासवर्ड सेट करें।
  • बदलाव सेव करके ऐप बंद कर दें।

किन ई-रिक्शा में ज्यादा खतरा?
जानकारों के मुताबिक यह समस्या मुख्य रूप से उन ई-रिक्शा में सामने आई है जिनमें कम कीमत वाले या बिना सुरक्षा वाले बैटरी सिस्टम लगाए गए हैं। ऐसे कई सिस्टम में ब्लूटूथ बिना पासवर्ड के खुला रहता है, जिससे कोई भी व्यक्ति सीमित दूरी से कनेक्ट हो सकता है। यही वजह है कि सस्ते और बिना ब्रांड वाले ई-रिक्शा इस तरह की गड़बड़ी का ज्यादा शिकार बन रहे हैं।

इन बड़े ब्रांड के वाहन सुरक्षित
इस मामले में आम इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। बड़े और स्थापित वाहन निर्माता मजबूत सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं। उनकी बैटरी गाड़ी के मुख्य कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी होती है और उसे सामान्य ब्लूटूथ या किसी साधारण मोबाइल ऐप के जरिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि यह समस्या फिलहाल मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए या कम सुरक्षा वाले बैटरी सिस्टम इस्तेमाल करने वाले ई-रिक्शा तक सीमित मानी जा रही है।

आगे क्या होगा?
सरकार की कार्रवाई के बाद नए यूजर इन ऐप्स को डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। हालांकि पहले से मौजूद ऐप्स को पूरी तरह निष्क्रिय करने के लिए तकनीकी समाधान तैयार किया जा रहा है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक ई-रिक्शा चालकों को अपनी बैटरी की सुरक्षा सेटिंग्स मजबूत रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

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