By Malay Ojha | Published: 03 July 2026 at 06:31 PM
देश में आतंकी नेटवर्क फैलाने की कोशिश कर रहे जैश-ए-मोहम्मद के कथित मॉड्यूल पर गुजरात एटीएस ने बड़ी कार्रवाई की है। गुजरात और मध्य प्रदेश में एक साथ छापेमारी कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी देश के भीतर संगठन का नेटवर्क मजबूत करने और नए लोगों को जोड़ने की कोशिश में लगे थे। सभी के खिलाफ यूएपीए और भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
गुजरात एटीएस ने शुक्रवार को एक समन्वित अभियान चलाते हुए गुजरात और मध्य प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी की। इस दौरान कुल आठ संदिग्धों को हिरासत में लेकर बाद में गिरफ्तार किया गया। शुरुआती जांच में एजेंसी को ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनके आधार पर आरोप है कि ये लोग प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम कर रहे थे और उसका नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।
किन लोगों को किया गया गिरफ्तार?
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अहमद अब्दुल्ला गाजीवाला, इब्राहिम मोहम्मद हुसैन घाघा, मुदस्सिर अब्दुल्ला गाजीवाला, जकारिया दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा, मुफ्ती फौजान इस्माइल दौवा, मोहम्मद अमीन शेरा, मोहम्मद अब्दुल रहमान सावदी और बिलाल दुरानी मोहम्मद अम्मार घाघा के रूप में हुई है। फिलहाल सभी से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका नेटवर्क कितना बड़ा था और किन-किन लोगों से उनका संपर्क था।
आतंकी नेटवर्क खड़ा करने का आरोप
एटीएस के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी गुजरात में जैश-ए-मोहम्मद का सक्रिय नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रहे थे। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इनका संपर्क देश के अन्य राज्यों या विदेश में बैठे संगठन के संचालकों से था। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 13, 17, 18, 38 और 39 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 148 और 61 भी लगाई गई हैं। इन धाराओं के तहत आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने, सहयोग करने और साजिश रचने जैसे गंभीर आरोपों की जांच की जाएगी।
पूरे नेटवर्क की तलाश में जांच एजेंसियां
जांच एजेंसियों का ध्यान अब इस बात पर है कि गिरफ्तार आरोपी अकेले काम कर रहे थे या फिर इनके साथ और लोग भी जुड़े हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। इसी आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी संभव मानी जा रही हैं।
क्या है जैश-ए-मोहम्मद का इतिहास?
जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना वर्ष 2000 में मसूद अजहर ने की थी। भारत में कई बड़े आतंकी हमलों में इस संगठन का नाम सामने आता रहा है। वर्ष 2000 में सेना मुख्यालय पर आत्मघाती हमला, वर्ष 2001 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर हमला, वर्ष 2016 में पठानकोट वायुसेना स्टेशन और उरी स्थित सेना मुख्यालय पर हमले, तथा वर्ष 2019 में पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में भी इस संगठन की भूमिका बताई गई थी।
सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच जारी
हालिया कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियां बड़ी सफलता मान रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि देश के भीतर किसी भी आतंकी संगठन की गतिविधियों को शुरुआती स्तर पर ही रोकना प्राथमिकता है। फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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