By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 06:24 PM
दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को खत्म करने का ऐलान किए जाने का दावा किया गया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास के मुताबिक, सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की बातचीत में उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। आंदोलनकारियों का दावा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी मान ली गई है और छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने पर भी सरकार ने हामी भर दी है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का तीसरा दौर केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में हुआ। बातचीत के बाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आंदोलनकारी नेताओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। इसी दौरान उन्होंने आंदोलन को वापस लेने का ऐलान किया। नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ उनकी प्रमुख मांगों को लेकर सहमति बन गई है, जिसके बाद प्रदर्शन खत्म करने का फैसला लिया गया है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बताया पहली बड़ी मांग
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने कहा कि प्रदर्शन शुरू करने से पहले उनके सामने तीन बड़ी मांगें थीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। आशुतोष रांका और सौरव दास ने दावा किया कि सरकार ने उनकी यह मांग स्वीकार कर ली है। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ देर पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया और इस तरह आंदोलनकारियों की पहली बड़ी मांग पूरी हो गई।
FIR वापस लेने पर भी सरकार की सहमति का दावा
आंदोलनकारियों की दूसरी प्रमुख मांग प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की थी। सौरव दास ने कहा कि सरकार ने इस मांग पर भी सहमति जताई है। उनके मुताबिक, जिन राज्यों में भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकार है, वहां छात्र आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाएगा। आंदोलनकारी नेताओं ने यह भी दावा किया कि भविष्य में प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सरकार से लिखित गारंटी लेने की तैयारी
आशुतोष रांका ने कहा कि बातचीत के दौरान बनी सहमति को सरकार जल्द ही लिखित रूप में देगी। उनके मुताबिक, सरकार की ओर से मंगलवार तक इस संबंध में लिखित गारंटी दिए जाने की बात कही गई है। आंदोलनकारी नेताओं ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया। उनका कहना था कि केवल मौखिक आश्वासन के बजाय अब लिखित तौर पर सरकार की सहमति सामने आएगी।
घायल प्रदर्शनकारियों के मुआवजे पर भी बनी बात
छात्र आंदोलन के दौरान घायल हुए लोगों के लिए मुआवजे की मांग भी बातचीत का अहम हिस्सा रही। आंदोलनकारी नेताओं के मुताबिक, घायल प्रदर्शनकारियों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग पर भी सरकार के साथ सहमति बनी है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक शर्तें और मुआवजे का वास्तविक स्वरूप क्या होगा, इसे लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
चार सूत्रीय मसौदा सरकार को सौंपने का दावा
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के हवाले से बताया गया कि आंदोलनकारियों ने बातचीत के दौरान सरकार को चार सूत्रीय लिखित मसौदा सौंपा था। इस मसौदे में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, नियमों के तहत अधिकतम मुआवजा देने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े सुझावों पर आगे चर्चा करने की मांग शामिल थी।
शिक्षा सुधार पर आगे भी बातचीत जारी रखने की बात
बताया गया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर आंदोलनकारियों की ओर से दिए गए चार्टर का अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति बनने की बात कही गई है। इसका मतलब यह है कि आंदोलन खत्म होने के बाद भी शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच संवाद का रास्ता खुला रहेगा।
आंदोलन वापस लेने का किया औपचारिक ऐलान
बैठक खत्म होने के बाद सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने प्रदर्शन समाप्त करने का औपचारिक ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ बातचीत में उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया गया है, इसलिए अब आंदोलन वापस लिया जा रहा है। इस ऐलान के साथ ही जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को समाप्त करने की घोषणा की गई।
छात्रों की मांगों को लेकर कई दिनों से जारी था प्रदर्शन
छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। आंदोलनकारियों ने सरकार पर छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया था। इसी दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने और प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों को मुआवजा देने जैसी मांगें प्रमुखता से उठाई गईं।
बातचीत के बाद बदला आंदोलन का रुख
लगातार प्रदर्शन और सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद आंदोलन का रुख बदलता हुआ दिखाई दिया। तीसरे दौर की वार्ता के बाद आंदोलनकारी नेताओं ने सरकार के साथ सहमति बनने का दावा किया और प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा कर दी। हालांकि, आंदोलनकारियों की मांगों पर सरकार की ओर से किए गए वादों को लेकर अंतिम स्थिति लिखित आदेश और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
लिखित आश्वासन पर टिकी रहेगी आगे की तस्वीर
आंदोलन समाप्त करने की घोषणा के बावजूद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार की ओर से सहमति के बिंदुओं को किस रूप में लिखित तौर पर जारी किया जाता है। खासकर छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, मुआवजे और शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों पर सरकार की औपचारिक घोषणा का इंतजार रहेगा। आंदोलनकारी नेताओं ने भी संकेत दिया है कि लिखित गारंटी मिलने के बाद ही इस समझौते को अंतिम रूप से देखा जाएगा।
आंदोलन खत्म, लेकिन मुद्दों पर नजर बनी रहेगी
फिलहाल जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को वापस लेने का ऐलान कर दिया गया है। आंदोलनकारी नेताओं ने इसे अपनी प्रमुख मांगों की जीत बताया है। दूसरी ओर, सरकार के साथ हुई सहमति के सभी बिंदुओं को आधिकारिक रूप से सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की लिखित गारंटी और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी। यदि सहमति के मुताबिक फैसले लागू होते हैं तो यह आंदोलन के बाद सरकार और छात्रों के बीच बने नए संवाद की शुरुआत भी हो सकती है।
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