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PM मोदी का बड़ा फैसला, नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई-पावर टास्क फोर्स संभालेगी परीक्षा सुधार की कमान

By Malay Ojha | Published: 26 July 2026 at 07:38 PM

नीट पेपर लीक विवाद और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि देश की परीक्षा प्रणाली में जरूरी बदलाव और सुधार के लिए दिग्गज तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक हाई-पावर टास्क फोर्स बनाई जाएगी। यह टीम मौजूदा परीक्षा व्यवस्था की कमियों को समझकर उसे ज्यादा भरोसेमंद, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के सुझाव देगी। प्रधानमंत्री ने यह घोषणा सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार लगातार कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सरकार ने ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की दिशा में भी कदम उठाए हैं और संसद में कड़े प्रावधानों वाला कानून लाने की प्रक्रिया पर भी काम किया जा रहा है।

सिर्फ कार्रवाई नहीं, अब परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव
प्रधानमंत्री ने साफ किया कि केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना ही काफी नहीं है। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए परीक्षा कराने के पूरे तरीके पर नए सिरे से विचार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिस पर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को पूरा भरोसा हो। इसके साथ ही व्यवस्था में पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जाना चाहिए।

नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनेगी हाई-पावर टास्क फोर्स
इसी सोच के तहत सरकार ने नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई-पावर टास्क फोर्स बनाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, यह टास्क फोर्स परीक्षा सुधार से जुड़े जरूरी पहलुओं पर विचार करेगी और अपनी रिपोर्ट के आधार पर आगे की व्यवस्था तय की जाएगी। सरकार का लक्ष्य आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता को जल्द से जल्द मजबूत करना है।

टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद क्या होगा?
इस पूरी पहल का सबसे अहम हिस्सा टास्क फोर्स की रिपोर्ट होगी। माना जा रहा है कि परीक्षा कराने की प्रक्रिया, तकनीक के इस्तेमाल, सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर व्यापक सुझाव सामने आ सकते हैं। हालांकि, टास्क फोर्स की अंतिम संरचना और उसकी विस्तृत जिम्मेदारियों को लेकर आगे और जानकारी सामने आना बाकी है। प्रधानमंत्री ने फिलहाल इतना स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और विद्यार्थियों का भरोसा वापस कायम करना है।

नीट विवाद ने खड़े किए परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
नीट पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह बहस शुरू हुई कि देश में होने वाली बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को किस तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाया जाए। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री की ओर से परीक्षा सुधार के लिए नई टास्क फोर्स बनाने की घोषणा को अहम कदम माना जा रहा है।

नंदन नीलेकणि को क्यों मिली यह जिम्मेदारी?
नंदन नीलेकणि देश के उन तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल हैं, जिनका नाम बड़े स्तर पर तकनीक आधारित व्यवस्था तैयार करने से जुड़ा रहा है। वह इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं और फिलहाल कंपनी के चेयरमैन के रूप में भी जुड़े हुए हैं। इसके अलावा वह भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई के संस्थापक अध्यक्ष रह चुके हैं। तकनीक और बड़े स्तर पर डिजिटल व्यवस्था को लागू करने का उनका अनुभव परीक्षा प्रणाली में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

इंफोसिस को खड़ा करने में निभाई थी अहम भूमिका
नंदन नीलेकणि ने वर्ष 1981 में इंफोसिस की स्थापना में नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कंपनी के शुरुआती दौर से लेकर उसके बड़े वैश्विक संस्थान बनने तक उनका योगदान अहम रहा। वह लंबे समय तक कंपनी के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा रहे और बाद में फिर चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली। तकनीकी क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव के कारण ही उन्हें देश में डिजिटल बदलाव से जुड़े कई बड़े कामों से जोड़ा जाता रहा है।

आधार परियोजना से भी जुड़ा रहा नाम
नंदन नीलेकणि का सबसे चर्चित सरकारी कार्यकाल आधार परियोजना से जुड़ा रहा है। वर्ष 2009 में उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में देश के निवासियों को विशिष्ट पहचान संख्या देने वाली आधार व्यवस्था को आगे बढ़ाने का काम शुरू हुआ। यह परियोजना आगे चलकर भारत की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान व्यवस्थाओं में शामिल हुई।

2014 में राजनीति में भी आजमा चुके हैं हाथ
तकनीकी और कारोबारी दुनिया के अलावा नंदन नीलेकणि सक्रिय राजनीति में भी कदम रख चुके हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह चुनाव जीतने में सफल नहीं रहे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बनाए रखी और तकनीक, डिजिटल व्यवस्था तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कामों पर ज्यादा ध्यान दिया।

अब परीक्षा सुधार की दिशा में बड़ी जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद अब निगाहें इस हाई-पावर टास्क फोर्स के गठन और उसकी सिफारिशों पर रहेंगी। नीट पेपर लीक विवाद ने जिस तरह परीक्षा व्यवस्था पर भरोसे को प्रभावित किया है, उसके बाद सरकार के सामने चुनौती केवल एक परीक्षा को बेहतर बनाने की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में विश्वास कायम करने की है। नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में बनने वाली यह टास्क फोर्स इसी दिशा में कितना बड़ा बदलाव ला पाती है, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल प्रधानमंत्री के ऐलान ने यह संकेत जरूर दिया है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार अब तकनीक और व्यापक बदलाव पर जोर देने की तैयारी में है।

तकनीक के जरिए परीक्षा व्यवस्था में भरोसा लौटाने की चुनौती
अब नंदन नीलेकणि के सामने एक अलग तरह की चुनौती होगी। आधार जैसी विशाल डिजिटल व्यवस्था के अनुभव के बाद उन्हें परीक्षा प्रणाली को लेकर सुझाव देने वाली टास्क फोर्स का नेतृत्व करना है। परीक्षा में नकल, पेपर लीक, पहचान की सुरक्षा और परिणामों की विश्वसनीयता जैसे मुद्दे विद्यार्थियों के भविष्य से सीधे जुड़े हैं। ऐसे में नई व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया जाए और साथ ही विद्यार्थियों के हितों का ध्यान कैसे रखा जाए, यह बड़ी चुनौती होगी।

सरकार के सामने विद्यार्थियों का भरोसा लौटाना सबसे बड़ी चुनौती
नीट विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग लगातार तेज हुई है। ऐसे समय में सरकार की नई पहल का असली असर इस बात से तय होगा कि टास्क फोर्स की सिफारिशें कितनी जल्दी लागू होती हैं और उनका असर जमीन पर कितना दिखाई देता है। विद्यार्थियों के लिए सबसे जरूरी बात यही होगी कि परीक्षा प्रक्रिया पहले से ज्यादा सुरक्षित हो, किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो और हर उम्मीदवार को यह भरोसा मिले कि उसके साथ निष्पक्ष तरीके से मूल्यांकन किया जाएगा।

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PM मोदी का बड़ा फैसला, नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई-पावर टास्क फोर्स संभालेगी परीक्षा सुधार की कमान

By Malay Ojha | Published: 26 July 2026 at 07:38 PM

नीट पेपर लीक विवाद और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि देश की परीक्षा प्रणाली में जरूरी बदलाव और सुधार के लिए दिग्गज तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक हाई-पावर टास्क फोर्स बनाई जाएगी। यह टीम मौजूदा परीक्षा व्यवस्था की कमियों को समझकर उसे ज्यादा भरोसेमंद, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के सुझाव देगी। प्रधानमंत्री ने यह घोषणा सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार लगातार कई कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सरकार ने ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की दिशा में भी कदम उठाए हैं और संसद में कड़े प्रावधानों वाला कानून लाने की प्रक्रिया पर भी काम किया जा रहा है।

सिर्फ कार्रवाई नहीं, अब परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव
प्रधानमंत्री ने साफ किया कि केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करना ही काफी नहीं है। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए परीक्षा कराने के पूरे तरीके पर नए सिरे से विचार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिस पर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को पूरा भरोसा हो। इसके साथ ही व्यवस्था में पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जाना चाहिए।

नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनेगी हाई-पावर टास्क फोर्स
इसी सोच के तहत सरकार ने नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई-पावर टास्क फोर्स बनाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, यह टास्क फोर्स परीक्षा सुधार से जुड़े जरूरी पहलुओं पर विचार करेगी और अपनी रिपोर्ट के आधार पर आगे की व्यवस्था तय की जाएगी। सरकार का लक्ष्य आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता को जल्द से जल्द मजबूत करना है।

टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद क्या होगा?
इस पूरी पहल का सबसे अहम हिस्सा टास्क फोर्स की रिपोर्ट होगी। माना जा रहा है कि परीक्षा कराने की प्रक्रिया, तकनीक के इस्तेमाल, सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर व्यापक सुझाव सामने आ सकते हैं। हालांकि, टास्क फोर्स की अंतिम संरचना और उसकी विस्तृत जिम्मेदारियों को लेकर आगे और जानकारी सामने आना बाकी है। प्रधानमंत्री ने फिलहाल इतना स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और विद्यार्थियों का भरोसा वापस कायम करना है।

नीट विवाद ने खड़े किए परीक्षा व्यवस्था पर सवाल
नीट पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह बहस शुरू हुई कि देश में होने वाली बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को किस तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाया जाए। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री की ओर से परीक्षा सुधार के लिए नई टास्क फोर्स बनाने की घोषणा को अहम कदम माना जा रहा है।

नंदन नीलेकणि को क्यों मिली यह जिम्मेदारी?
नंदन नीलेकणि देश के उन तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल हैं, जिनका नाम बड़े स्तर पर तकनीक आधारित व्यवस्था तैयार करने से जुड़ा रहा है। वह इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं और फिलहाल कंपनी के चेयरमैन के रूप में भी जुड़े हुए हैं। इसके अलावा वह भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई के संस्थापक अध्यक्ष रह चुके हैं। तकनीक और बड़े स्तर पर डिजिटल व्यवस्था को लागू करने का उनका अनुभव परीक्षा प्रणाली में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

इंफोसिस को खड़ा करने में निभाई थी अहम भूमिका
नंदन नीलेकणि ने वर्ष 1981 में इंफोसिस की स्थापना में नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कंपनी के शुरुआती दौर से लेकर उसके बड़े वैश्विक संस्थान बनने तक उनका योगदान अहम रहा। वह लंबे समय तक कंपनी के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा रहे और बाद में फिर चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली। तकनीकी क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव के कारण ही उन्हें देश में डिजिटल बदलाव से जुड़े कई बड़े कामों से जोड़ा जाता रहा है।

आधार परियोजना से भी जुड़ा रहा नाम
नंदन नीलेकणि का सबसे चर्चित सरकारी कार्यकाल आधार परियोजना से जुड़ा रहा है। वर्ष 2009 में उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में देश के निवासियों को विशिष्ट पहचान संख्या देने वाली आधार व्यवस्था को आगे बढ़ाने का काम शुरू हुआ। यह परियोजना आगे चलकर भारत की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान व्यवस्थाओं में शामिल हुई।

2014 में राजनीति में भी आजमा चुके हैं हाथ
तकनीकी और कारोबारी दुनिया के अलावा नंदन नीलेकणि सक्रिय राजनीति में भी कदम रख चुके हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह चुनाव जीतने में सफल नहीं रहे। इसके बाद उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बनाए रखी और तकनीक, डिजिटल व्यवस्था तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कामों पर ज्यादा ध्यान दिया।

अब परीक्षा सुधार की दिशा में बड़ी जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद अब निगाहें इस हाई-पावर टास्क फोर्स के गठन और उसकी सिफारिशों पर रहेंगी। नीट पेपर लीक विवाद ने जिस तरह परीक्षा व्यवस्था पर भरोसे को प्रभावित किया है, उसके बाद सरकार के सामने चुनौती केवल एक परीक्षा को बेहतर बनाने की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में विश्वास कायम करने की है। नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में बनने वाली यह टास्क फोर्स इसी दिशा में कितना बड़ा बदलाव ला पाती है, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल प्रधानमंत्री के ऐलान ने यह संकेत जरूर दिया है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार अब तकनीक और व्यापक बदलाव पर जोर देने की तैयारी में है।

तकनीक के जरिए परीक्षा व्यवस्था में भरोसा लौटाने की चुनौती
अब नंदन नीलेकणि के सामने एक अलग तरह की चुनौती होगी। आधार जैसी विशाल डिजिटल व्यवस्था के अनुभव के बाद उन्हें परीक्षा प्रणाली को लेकर सुझाव देने वाली टास्क फोर्स का नेतृत्व करना है। परीक्षा में नकल, पेपर लीक, पहचान की सुरक्षा और परिणामों की विश्वसनीयता जैसे मुद्दे विद्यार्थियों के भविष्य से सीधे जुड़े हैं। ऐसे में नई व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया जाए और साथ ही विद्यार्थियों के हितों का ध्यान कैसे रखा जाए, यह बड़ी चुनौती होगी।

सरकार के सामने विद्यार्थियों का भरोसा लौटाना सबसे बड़ी चुनौती
नीट विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग लगातार तेज हुई है। ऐसे समय में सरकार की नई पहल का असली असर इस बात से तय होगा कि टास्क फोर्स की सिफारिशें कितनी जल्दी लागू होती हैं और उनका असर जमीन पर कितना दिखाई देता है। विद्यार्थियों के लिए सबसे जरूरी बात यही होगी कि परीक्षा प्रक्रिया पहले से ज्यादा सुरक्षित हो, किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो और हर उम्मीदवार को यह भरोसा मिले कि उसके साथ निष्पक्ष तरीके से मूल्यांकन किया जाएगा।

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