By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 at 09:41 PM
बिहार में बिजली के तार, वितरण ट्रांसफॉर्मर, मीटर और दूसरे विद्युत उपकरणों की चोरी या नुकसान की घटनाओं को अब गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसी घटनाओं को रोकने में लापरवाही मिलने पर संबंधित बिजली अधिकारियों और कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई समीक्षा के बाद ऊर्जा सचिव अजय यादव ने बिजली कंपनियों के अधिकारियों को परिसंपत्तियों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने साफ कहा है कि बिजली की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर किसी क्षेत्र में बिजली के उपकरण चोरी होते हैं या उन्हें नुकसान पहुंचाया जाता है और इसे रोकने में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
कार्यपालक अभियंता से लेकर कनीय अभियंता तक निगरानी के दायरे में
निर्देश के मुताबिक, किसी प्रमंडल, अवर प्रमंडल, ग्रिड उपकेंद्र या विद्युत शक्ति उपकेंद्र के क्षेत्र में चोरी अथवा नुकसान की घटना को रोकने में लापरवाही पाई गई तो संबंधित कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता और दूसरे जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। यानी अब सिर्फ चोरी की घटना दर्ज कर मामला खत्म नहीं होगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि उसे रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर कितनी सतर्कता बरती गई थी।
समीक्षा में सामने आई बिजली उपकरणों की बढ़ती चोरी
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा के दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बिजली के तार, वितरण ट्रांसफॉर्मर, मीटर और अन्य उपकरणों की चोरी तथा उन्हें नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर चर्चा हुई। अधिकारियों के सामने यह बात भी रखी गई कि ऐसी घटनाओं का सीधा असर बिजली कंपनियों पर आर्थिक बोझ के रूप में पड़ता है। इसके साथ ही कई बार उपकरण खराब होने या चोरी होने के कारण बिजली आपूर्ति भी बाधित होती है।
बिजली आपूर्ति पर पड़ता है सीधा असर
बिजली का कोई महत्वपूर्ण उपकरण चोरी होने या क्षतिग्रस्त होने के बाद उसे दोबारा लगाने में समय और संसाधन दोनों लगते हैं। इस दौरान संबंधित इलाके के उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। खासकर ट्रांसफॉर्मर या बिजली के तारों को नुकसान पहुंचने पर आपूर्ति बहाल करने में विभाग को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में सरकार अब सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
ग्रिड और उपकेंद्रों की नियमित निगरानी का आदेश
ऊर्जा विभाग ने सभी महत्वपूर्ण विद्युत संरचनाओं की नियमित निगरानी करने को कहा है। इसमें ग्रिड सब-स्टेशन, विद्युत उपकेंद्र, फीडर और दूसरी जरूरी परिसंपत्तियां शामिल हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था लगातार सक्रिय रहे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी समय रहते मिल सके।
संवेदनशील इलाकों पर रहेगी खास नजर
जिन इलाकों में पहले बिजली उपकरणों की चोरी या नुकसान की घटनाएं हो चुकी हैं, वहां विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा संदिग्ध और संवेदनशील क्षेत्रों को भी चिन्हित कर वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया है। विभाग का मानना है कि नियमित निगरानी और समय पर कार्रवाई से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
पुलिस और जिला प्रशासन के साथ चलेगा अभियान
बिजली उपकरणों की चोरी रोकने के लिए बिजली कंपनियों को जिला प्रशासन और पुलिस के साथ बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत के मुताबिक संयुक्त अभियान चलाकर संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जाएगी। चोरी की घटनाओं में दर्ज प्राथमिकी की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि मामलों की जांच और आगे की कार्रवाई में किसी तरह की ढिलाई न हो।
चार बिजली कंपनियों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त
इस पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए राज्य की प्रमुख बिजली कंपनियों के स्तर पर नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है। बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी, बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी, दक्षिण बिहार बिजली वितरण कंपनी और उत्तर बिहार बिजली वितरण कंपनी के लिए संबंधित मुख्य सुरक्षा पदाधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
नोडल अधिकारी करेंगे नियमित निरीक्षण
नामित नोडल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में बिजली के प्रमंडलों, अवर प्रमंडलों, ग्रिड उपकेंद्रों और विद्युत शक्ति उपकेंद्रों का नियमित निरीक्षण करेंगे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति के साथ-साथ चोरी और नुकसान से जुड़ी घटनाओं की भी समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा जिन मामलों में प्राथमिकी दर्ज हुई है, उनकी प्रगति पर भी नजर रखी जाएगी।
हर सप्ताह वरिष्ठ अधिकारियों को देनी होगी रिपोर्ट
नोडल अधिकारियों को निरीक्षण और कार्रवाई की जानकारी नियमित रूप से संबंधित बिजली कंपनी के प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को देनी होगी। इसके लिए साप्ताहिक रिपोर्ट की व्यवस्था की गई है। इससे बिजली उपकरणों की चोरी और नुकसान से जुड़ी घटनाओं पर उच्च स्तर से भी नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
हर महीने ऊर्जा विभाग को भी मिलेगा ब्योरा
बिजली कंपनियों को इस मामले में की गई कार्रवाई की मासिक रिपोर्ट ऊर्जा विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में चोरी और नुकसान की घटनाओं, दर्ज मामलों, की गई कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी शामिल होगी। इससे विभाग को पूरे राज्य में विद्युत परिसंपत्तियों की सुरक्षा की स्थिति का नियमित आकलन करने में मदद मिलेगी।
उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देना सरकार की प्राथमिकता
ऊर्जा सचिव ने कहा कि बिजली की परिसंपत्तियों की सुरक्षा सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली से जुड़ी है। अगर बिजली के तार, ट्रांसफॉर्मर या दूसरे जरूरी उपकरण सुरक्षित रहेंगे, तभी आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना आसान होगा। इसलिए विद्युत अवसंरचना की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।
लापरवाही मिली तो सख्त कदम उठाने की चेतावनी
ऊर्जा विभाग ने साफ कर दिया है कि बिजली उपकरणों की चोरी या नुकसान की घटनाओं को रोकने में किसी भी स्तर की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। सरकार की इस सख्ती का उद्देश्य बिजली परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखना और उपभोक्ताओं को लगातार बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है।
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