By Malay Ojha | Published: 27 July 2026 at 11:38 PM
भारत की स्टार भारोत्तोलक बिंद्यारानी देवी ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में एक बार फिर देश का मान बढ़ाया है। मणिपुर की इस खिलाड़ी ने सोमवार को महिलाओं के 58 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही राष्ट्रमंडल खेलों में बिंद्यारानी के पदकों की संख्या दो हो गई है। उन्होंने बर्मिंघम 2022 में रजत पदक जीता था। यानी इस बार पदक का रंग जरूर बदला, लेकिन वह स्वर्ण तक नहीं पहुंच सकीं।
बिंद्यारानी का कांस्य पदक ग्लासगो में भारत के लिए छठा पदक है। खास बात यह है कि भारत के इन छह पदकों में पांच पदक भारोत्तोलन से आए हैं। इस तरह भारतीय भारोत्तोलकों ने प्रतियोगिता के शुरुआती दौर में ही देश के पदक अभियान को मजबूती दी है। बिंद्यारानी ने अपने प्रदर्शन से यह भी साबित किया कि बर्मिंघम के बाद वह एक बार फिर राष्ट्रमंडल स्तर पर अपनी जगह बनाए रखने में कामयाब रही हैं।
कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पक्का किया
27 साल की बिंद्यारानी ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क को मिलाकर कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया। स्नैच में उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में 87 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ भार उठाया। इससे पहले उनके दो सफल प्रयास 84 और 85 किलोग्राम के रहे थे। स्नैच के बाद उनकी नजर क्लीन एंड जर्क में पदक की स्थिति मजबूत करने पर थी।
पहले प्रयास में झटका, दूसरे में मिली बड़ी कामयाबी
क्लीन एंड जर्क में बिंद्यारानी ने शुरुआत में 113 किलोग्राम वजन उठाने का फैसला किया था, लेकिन अंतिम समय में उन्होंने अपना लक्ष्य बदलते हुए 110 किलोग्राम का प्रयास चुना। पहला प्रयास उनके पक्ष में नहीं गया और वह वजन नहीं उठा सकीं। इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में 112 किलोग्राम का भार सफलतापूर्वक उठाया और कांस्य पदक की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
आखिरी प्रयास में स्वर्ण की उम्मीद नहीं हो सकी पूरी
बिंद्यारानी के सामने अब अंतिम प्रयास में 116 किलोग्राम वजन उठाने की चुनौती थी। अगर वह यह भार सफलतापूर्वक उठा लेतीं तो उनकी कुल स्थिति और बेहतर हो सकती थी, लेकिन उनका तीसरा प्रयास सफल नहीं रहा। इसके साथ ही उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। हालांकि, लगातार दूसरी राष्ट्रमंडल प्रतियोगिता में पदक जीतना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।
बर्मिंघम में रजत, ग्लासगो में कांस्य
बिंद्यारानी ने 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 55 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता था। इस बार भार वर्ग बदलने के बाद उन्होंने 58 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लिया और फिर से पदक जीतने में सफलता हासिल की। इस तरह उनके राष्ट्रमंडल खेल करियर में लगातार दो पदक हो गए हैं। स्वर्ण से चूकने के बावजूद उनका यह प्रदर्शन भारतीय भारोत्तोलन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के छह पदकों में पांच भारोत्तोलन से
ग्लासगो में भारत का पदक अभियान भारोत्तोलन के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर काफी हद तक टिका हुआ है। बिंद्यारानी से पहले मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर खेलों का रिकॉर्ड भी बनाया और लगातार तीसरा राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण पदक हासिल किया। यह राष्ट्रमंडल खेलों में उनका चौथा पदक भी है।
मीराबाई के बाद दूसरे भारतीय भारोत्तोलकों ने भी दिखाया दम
भारत के लिए पुरुषों के 60 किलोग्राम भार वर्ग में ऋषिकांत सिंह चानंबम ने रजत पदक जीता। उन्होंने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाया और स्नैच में 121 किलोग्राम के साथ खेलों के रिकॉर्ड की बराबरी की। पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में राजा मुथुपांडी ने भी रजत पदक जीतकर भारत की पदक संख्या बढ़ाई।
ज्ञानेश्वरी यादव ने भी जीता रजत
महिलाओं के 53 किलोग्राम भार वर्ग में ज्ञानेश्वरी यादव ने भारत के लिए रजत पदक जीता। उन्होंने कुल 199 किलोग्राम वजन उठाया। अपने राष्ट्रमंडल खेल पदार्पण में ज्ञानेश्वरी ने क्लीन एंड जर्क में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक की दावेदार खिलाड़ी को आखिरी लिफ्ट तक कड़ी चुनौती दी। उनका प्रदर्शन भी भारत के भारोत्तोलन अभियान की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा।
पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने दिलाया कांस्य
भारत के छह पदकों में भारोत्तोलन के अलावा एक पदक पैरा पावरलिफ्टिंग से आया है। पुरुषों के हेवीवेट वर्ग में झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। इसके बाद भारोत्तोलकों ने लगातार पदक जीतते हुए भारत की पदक संख्या को आगे बढ़ाया। उपलब्ध ताजा रिपोर्टिंग के मुताबिक, भारत की पदक उम्मीदों में भारोत्तोलन इस खेलों में सबसे अहम भूमिका निभा रहा है।
अब भारत की नजर दूसरे खेलों पर
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का अभियान अभी जारी है और आने वाले दिनों में दूसरे खेलों से भी पदक की उम्मीदें हैं। हालांकि, शुरुआती चरण में भारोत्तोलन ने भारतीय दल को मजबूत शुरुआत दी है। बिंद्यारानी देवी का कांस्य इस सूची में एक और पदक जोड़ने के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत सफर का भी महत्वपूर्ण अध्याय है। बर्मिंघम में रजत जीतने के बाद ग्लासगो में कांस्य हासिल कर उन्होंने लगातार दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों के मंच पर तिरंगा ऊंचा किया है।
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