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सुप्रीम कोर्ट की शर्तें CJP को मंजूर नहीं, कहा- पहले हमारी मांगें मानें, सभी पर दर्ज केस वापस लें

By Malay Ojha | Published: 28 July 2026 at 06:41 PM

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों और गिरफ्तारियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देशों पर असहमति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने साफ कहा कि प्रदर्शनकारियों को राहत देने के लिए अदालत की ओर से लगाई गई शर्तें उन्हें मंजूर नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की सभी मांगें बिना किसी शर्त के माननी चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जाने वाली अतिरिक्त राहत भी लागू की जा सकती है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए या हिरासत में लिए गए लोगों को राहत देने को लेकर अंतरिम निर्देश जारी किए। अदालत ने ऐसे प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कथित बर्बरता के आरोपों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह निर्देश दिया।

‘शर्तों के साथ राहत हमें मंजूर नहीं’
अदालत के निर्देशों पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ दास ने कहा कि अगर सर्वोच्च अदालत कुछ युवाओं के हित में राहत दे रही है तो उसका स्वागत है, लेकिन उनकी पार्टी की मांग इससे अलग है। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की ओर से जो मांगें सरकार के सामने रखी गई थीं, उन्हें पहले पूरा किया जाना चाहिए।

दास ने कहा कि उनका आंदोलन जमीन पर लंबे समय तक चला है और इस दौरान उनकी कुछ स्पष्ट मांगें थीं। उनका कहना है कि इन मांगों को पूरा करना सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने और आगे किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने की है।

सभी के खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग
सीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया, उन्हें भी रिहा किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि उनकी मांग में नाबालिग और बालिग के बीच या पहले से प्राथमिकी दर्ज होने के आधार पर कोई अलग-अलग शर्त नहीं रखी गई थी।

सौरभ दास ने कहा कि सरकार के दो मंत्रियों की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया था और अब सरकार को अपने उस भरोसे को पूरा करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले से प्राथमिकी दर्ज है, तो केवल इसी आधार पर उसे राहत से बाहर रखना उनकी पार्टी को स्वीकार नहीं है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन की शर्त पर भी आपत्ति
सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों को राहत देने के लिए ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन’ जैसी शर्त लगाए जाने पर भी सवाल उठाया है। सौरभ दास ने कहा कि उन्हें पहले से ही आशंका थी कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल आगे चलकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि सोमवार रात सरकार के वार्ताकारों के साथ उनकी लंबी बातचीत हुई थी। इस दौरान आदेश की भाषा को लेकर भी चर्चा हुई। दास के मुताबिक, उनकी चिंता यह थी कि अगर आदेश में यह शर्त रखी गई कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए या किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले से प्राथमिकी नहीं होनी चाहिए, तो पुलिस के पास किसी प्रदर्शन को अशांतिपूर्ण बताने की गुंजाइश रह सकती है।

‘पुलिस के पास किसी को अशांत बताने की ताकत आ जाएगी’
सौरभ दास ने कहा कि उनकी मांग बिल्कुल स्पष्ट थी कि प्रदर्शन से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि राहत के लिए अलग-अलग शर्तें जोड़ दी जाती हैं, तो इसका असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो प्रदर्शन का हिस्सा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले में सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के पूरा होने का इंतजार कर रही है। उनके मुताबिक, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों और की गई कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाया जाएगा।

सीजेपी बोली- हमारी मांगें पहले पूरी हों
सौरभ दास ने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जा रही राहत को उनकी पार्टी पूरी तरह खारिज नहीं कर रही है। उनका कहना है कि अदालत यदि प्रदर्शनकारियों को अतिरिक्त राहत देती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन उससे पहले सरकार को उनकी मूल मांगों को पूरा करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनकी मांगों के मुताबिक सभी संबंधित लोगों को राहत मिलनी चाहिए और इसके बाद यदि सर्वोच्च अदालत की ओर से कोई अतिरिक्त राहत या निर्देश दिया जाता है, तो सरकार को उसे भी लागू करना चाहिए।

सरकार के आश्वासन पर टिकी नजर
इस पूरे मामले में अब सरकार के अगले कदम पर नजर है। सीजेपी का कहना है कि उसे सरकार की ओर से भरोसा दिया गया था कि मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया जाएगा। ऐसे में पार्टी अब यह देख रही है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक क्या कदम उठाती है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देशों से उन प्रदर्शनकारियों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है, जो अदालत की तय शर्तों के दायरे में आते हैं। हालांकि, सीजेपी का रुख साफ है कि वह राहत को किसी शर्त से जोड़ने के बजाय सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई खत्म करने की मांग कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सियासी हलचल
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। एक तरफ अदालत ने कुछ प्रदर्शनकारियों को तत्काल राहत देने के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर सीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सीमित राहत के बजाय अपनी पूरी मांग लागू कराने पर जोर देगी।

सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास के बयान से यह भी साफ है कि पार्टी सरकार के साथ हुई बातचीत और मिले आश्वासन को इस पूरे विवाद में अहम मान रही है। अब आने वाले दिनों में सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम और अदालत की आगे की सुनवाई से यह तय होगा कि प्रदर्शनकारियों को कितनी और किस तरह की राहत मिलती है।

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सुप्रीम कोर्ट की शर्तें CJP को मंजूर नहीं, कहा- पहले हमारी मांगें मानें, सभी पर दर्ज केस वापस लें

By Malay Ojha | Published: 28 July 2026 at 06:41 PM

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों और गिरफ्तारियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देशों पर असहमति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने साफ कहा कि प्रदर्शनकारियों को राहत देने के लिए अदालत की ओर से लगाई गई शर्तें उन्हें मंजूर नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की सभी मांगें बिना किसी शर्त के माननी चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जाने वाली अतिरिक्त राहत भी लागू की जा सकती है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए या हिरासत में लिए गए लोगों को राहत देने को लेकर अंतरिम निर्देश जारी किए। अदालत ने ऐसे प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कथित बर्बरता के आरोपों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने यह निर्देश दिया।

‘शर्तों के साथ राहत हमें मंजूर नहीं’
अदालत के निर्देशों पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरभ दास ने कहा कि अगर सर्वोच्च अदालत कुछ युवाओं के हित में राहत दे रही है तो उसका स्वागत है, लेकिन उनकी पार्टी की मांग इससे अलग है। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की ओर से जो मांगें सरकार के सामने रखी गई थीं, उन्हें पहले पूरा किया जाना चाहिए।

दास ने कहा कि उनका आंदोलन जमीन पर लंबे समय तक चला है और इस दौरान उनकी कुछ स्पष्ट मांगें थीं। उनका कहना है कि इन मांगों को पूरा करना सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने और आगे किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने की है।

सभी के खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग
सीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया, उन्हें भी रिहा किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि उनकी मांग में नाबालिग और बालिग के बीच या पहले से प्राथमिकी दर्ज होने के आधार पर कोई अलग-अलग शर्त नहीं रखी गई थी।

सौरभ दास ने कहा कि सरकार के दो मंत्रियों की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया था और अब सरकार को अपने उस भरोसे को पूरा करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले से प्राथमिकी दर्ज है, तो केवल इसी आधार पर उसे राहत से बाहर रखना उनकी पार्टी को स्वीकार नहीं है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन की शर्त पर भी आपत्ति
सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों को राहत देने के लिए ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन’ जैसी शर्त लगाए जाने पर भी सवाल उठाया है। सौरभ दास ने कहा कि उन्हें पहले से ही आशंका थी कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल आगे चलकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि सोमवार रात सरकार के वार्ताकारों के साथ उनकी लंबी बातचीत हुई थी। इस दौरान आदेश की भाषा को लेकर भी चर्चा हुई। दास के मुताबिक, उनकी चिंता यह थी कि अगर आदेश में यह शर्त रखी गई कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए या किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले से प्राथमिकी नहीं होनी चाहिए, तो पुलिस के पास किसी प्रदर्शन को अशांतिपूर्ण बताने की गुंजाइश रह सकती है।

‘पुलिस के पास किसी को अशांत बताने की ताकत आ जाएगी’
सौरभ दास ने कहा कि उनकी मांग बिल्कुल स्पष्ट थी कि प्रदर्शन से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि राहत के लिए अलग-अलग शर्तें जोड़ दी जाती हैं, तो इसका असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो प्रदर्शन का हिस्सा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले में सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के पूरा होने का इंतजार कर रही है। उनके मुताबिक, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों और की गई कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाया जाएगा।

सीजेपी बोली- हमारी मांगें पहले पूरी हों
सौरभ दास ने दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी जा रही राहत को उनकी पार्टी पूरी तरह खारिज नहीं कर रही है। उनका कहना है कि अदालत यदि प्रदर्शनकारियों को अतिरिक्त राहत देती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन उससे पहले सरकार को उनकी मूल मांगों को पूरा करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनकी मांगों के मुताबिक सभी संबंधित लोगों को राहत मिलनी चाहिए और इसके बाद यदि सर्वोच्च अदालत की ओर से कोई अतिरिक्त राहत या निर्देश दिया जाता है, तो सरकार को उसे भी लागू करना चाहिए।

सरकार के आश्वासन पर टिकी नजर
इस पूरे मामले में अब सरकार के अगले कदम पर नजर है। सीजेपी का कहना है कि उसे सरकार की ओर से भरोसा दिया गया था कि मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया जाएगा। ऐसे में पार्टी अब यह देख रही है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक क्या कदम उठाती है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देशों से उन प्रदर्शनकारियों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है, जो अदालत की तय शर्तों के दायरे में आते हैं। हालांकि, सीजेपी का रुख साफ है कि वह राहत को किसी शर्त से जोड़ने के बजाय सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई खत्म करने की मांग कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी सियासी हलचल
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। एक तरफ अदालत ने कुछ प्रदर्शनकारियों को तत्काल राहत देने के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर सीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सीमित राहत के बजाय अपनी पूरी मांग लागू कराने पर जोर देगी।

सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास के बयान से यह भी साफ है कि पार्टी सरकार के साथ हुई बातचीत और मिले आश्वासन को इस पूरे विवाद में अहम मान रही है। अब आने वाले दिनों में सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम और अदालत की आगे की सुनवाई से यह तय होगा कि प्रदर्शनकारियों को कितनी और किस तरह की राहत मिलती है।

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