By Malay Ojha | Published: 28 July 2026 at 08:18 PM
केंद्र में नए शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभालते ही प्रह्लाद जोशी विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई को लेकर दिए गए उनके पुराने बयान को कांग्रेस ने मुद्दा बना लिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने जोशी की नियुक्ति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी देना देश की महिलाओं और लड़कियों के लिए गलत संदेश है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में बड़ी संख्या में युवा शिक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध कर रहे हैं और प्रदर्शन कर रही लड़कियों के साथ भी कार्रवाई की गई, ऐसे समय में सरकार ने एक विवादित बयान देने वाले नेता को शिक्षा मंत्री बनाया है।
राहुल गांधी ने जोशी के पुराने बयान का हवाला देते हुए उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास मंत्रिमंडल में कई लोगों में से किसी को भी शिक्षा मंत्रालय देने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने ऐसे व्यक्ति को चुना, जिसे कांग्रेस नेता के मुताबिक बिलकिस बानो मामले के दोषियों की रिहाई पर आपत्ति नहीं थी।
प्रियंका गांधी ने भी प्रधानमंत्री को घेरा
इस मामले में प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सदन में सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ऐसे व्यक्ति को यह जिम्मेदारी दी है, जिसने बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई को लेकर सहमति जताई थी।
प्रियंका गांधी ने कहा कि बिलकिस बानो एक गर्भवती महिला थीं और उनके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था। ऐसे मामले में दोषियों की रिहाई को लेकर दिए गए पुराने बयान के संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि देश की करोड़ों लड़कियों को इस नियुक्ति के जरिए क्या संदेश दिया जा रहा है।
प्रह्लाद जोशी ने आरोपों को बताया गलत
कांग्रेस नेताओं के आरोपों पर प्रह्लाद जोशी ने भी पलटवार किया। उन्होंने प्रियंका गांधी से अपने आरोपों को सही साबित करने को कहा और दावा किया कि उनके बारे में गलत जानकारी फैलाई जा रही है। जोशी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के बयानों पर कार्रवाई होनी चाहिए और प्रियंका गांधी को माफी मांगनी चाहिए।
इस तरह नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति के साथ ही केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। एक तरफ कांग्रेस पुराने बयान को आधार बनाकर सरकार पर सवाल उठा रही है, तो दूसरी तरफ प्रह्लाद जोशी आरोपों को गलत बताते हुए कांग्रेस नेताओं से अपने दावों को साबित करने की मांग कर रहे हैं।
2022 के बयान से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, यह विवाद प्रह्लाद जोशी के उस बयान से जुड़ा है जो उन्होंने अक्टूबर 2022 में बिलकिस बानो मामले के 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई के बाद दिया था। उस समय जोशी केंद्र सरकार में संसदीय कार्य मंत्री थे। उन्होंने दोषियों की रिहाई को कानूनी प्रावधान के तहत बताया था और कहा था कि इसमें उन्हें कुछ गलत नहीं लगता।
जोशी का यह बयान उस समय भी राजनीतिक विवाद का कारण बना था। अब जब उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है, कांग्रेस ने उनके उसी पुराने बयान को फिर से सामने लाकर सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे नेता को देने का फैसला सवालों के घेरे में है।
सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई रद्द कर दी थी
बिलकिस बानो मामले में गुजरात सरकार ने अगस्त 2022 में 11 दोषियों को समय से पहले जेल से रिहा कर दिया था। इस फैसले को लेकर देशभर में विवाद हुआ और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। जनवरी 2024 में शीर्ष अदालत ने दोषियों की रिहाई का फैसला रद्द करते हुए उन्हें वापस जेल भेजने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया था। अब प्रह्लाद जोशी के शिक्षा मंत्री बनने के बाद उनके 2022 के बयान को लेकर कांग्रेस ने नया राजनीतिक हमला शुरू कर दिया है।
शिक्षा मंत्रालय में बदलाव का पूरा मामला
प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब परीक्षा व्यवस्था और कथित प्रश्नपत्र लीक को लेकर सरकार पहले से विपक्ष के निशाने पर रही है। 25 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया और प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
इसके अगले दिन 26 जुलाई को प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न योजनाओं और कामकाज की समीक्षा की। वह पहले से उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
अब आमने-सामने सरकार और कांग्रेस
प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति के बाद बिलकिस बानो मामले का पुराना विवाद फिर से राजनीतिक बहस में लौट आया है। कांग्रेस इस मुद्दे को महिलाओं की सुरक्षा और न्याय से जोड़कर सरकार पर हमला कर रही है, जबकि जोशी ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों को गलत बताते हुए उनसे अपने दावों को साबित करने की मांग की है।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह और गरमाने के आसार हैं। खासतौर पर शिक्षा मंत्रालय की नई जिम्मेदारी संभालने के तुरंत बाद प्रह्लाद जोशी पर विपक्ष के इस हमले ने केंद्र सरकार के सामने एक नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है।
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