By Malay Ojha | Published: 29 July 2026 at 09:56 AM
मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंचता दिख रहा है। कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के साथ देर रात हुई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद किसान भोपाल में धरने पर डटे हुए हैं। किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर सरकार ठोस फैसला नहीं करती, तब तक वे प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे। आंदोलन को देखते हुए भोपाल में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कई स्कूलों में आज अवकाश घोषित किया गया है।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे किसानों ने बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के सामने नर्मदापुरम रोड पर डेरा डाल दिया है। किसानों और सरकार के बीच देर रात तक बातचीत चली, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने धरना जारी रखने का फैसला किया। किसानों का कहना है कि उनकी मांगों को केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि सरकार के स्पष्ट फैसले से समाधान मिलना चाहिए।
तीन बैरिकेड पार कर पहुंचे किसान
किसानों के भोपाल पहुंचने के दौरान पुलिस की ओर से रास्ते में तीन जगह बैरिकेड लगाए गए थे। प्रदर्शनकारी इन बैरिकेड को पार कर आगे बढ़े और तय स्थान पर पहुंचकर धरने पर बैठ गए। हालांकि पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी तरह की हिंसा या पुलिस के साथ टकराव की स्थिति सामने नहीं आई। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
भोपाल में सुरक्षा बढ़ी, कई स्कूलों में छुट्टी
किसानों के राजधानी पहुंचने और धरना जारी रखने के बाद भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने भीड़ और यातायात को देखते हुए कई जगहों पर पुलिस बल तैनात किया है। आंदोलन के असर को देखते हुए राजधानी के कई स्कूलों में आज अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ मार्गों पर वाहनों का रास्ता भी बदला गया है।
मूंग की पूरी सरकारी खरीदी सबसे बड़ी मांग
किसानों के इस आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा ग्रीष्मकालीन मूंग की पूरी सरकारी खरीदी है। किसान चाहते हैं कि उनकी मूंग की शत-प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए। उनका आरोप है कि सरकारी खरीदी का लक्ष्य सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर नहीं बेच पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें मजबूरी में खुले बाजार में कम कीमत पर मूंग बेचनी पड़ रही है।
केंद्र से खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग
इसी बीच मध्य प्रदेश सरकार ने भी ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया है। राज्य सरकार की ओर से 14 मई और 3 जुलाई को केंद्र को 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी का प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि प्रदेश के लिए 4.54 लाख मीट्रिक टन का ही लक्ष्य मंजूर किया गया। राज्य सरकार ने लक्ष्य बढ़ाने के लिए एक बार फिर केंद्र से अनुरोध किया है।
सरकार के आंकड़ों में कितना है मूंग का उत्पादन
सरकार की ओर से केंद्र को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि इस साल प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग का रकबा करीब 14.30 लाख हेक्टेयर रहा है। औसत उत्पादकता 1410 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है। इसके आधार पर कुल उत्पादन करीब 20.16 लाख मीट्रिक टन रहने की संभावना जताई गई है। सरकारी अनुमान के मुताबिक खरीदी के लिए करीब 8 लाख मीट्रिक टन मूंग उपलब्ध हो सकती है।
लाखों किसानों ने कराया पंजीकरण, खरीदी अब भी सीमित
आंकड़ों के मुताबिक अब तक 3.47 लाख किसानों ने मूंग बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। हालांकि इनमें से केवल करीब 82 हजार किसानों से ही मूंग की खरीदी हो सकी है। किसान संगठनों का कहना है कि यही अंतर उनकी सबसे बड़ी चिंता है। उनका दावा है कि जब उत्पादन और उपलब्धता सरकारी खरीदी के लक्ष्य से कहीं अधिक है, तो सभी किसानों की उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।
धरनास्थल पर किसानों ने खुद संभाली व्यवस्था
किसानों ने इस आंदोलन की पहले से पूरी तैयारी की थी। इसका अंदाजा धरनास्थल के माहौल से लगाया जा सकता है, जहां प्रदर्शनकारी किसान खुद दाल-बाटी बनाते हुए नजर आए। किसानों का कहना है कि वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार होकर राजधानी पहुंचे हैं। उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मांगें पूरी होने तक वे धरनास्थल से हटने वाले नहीं हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में प्रदर्शन
संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में चल रहे इस आंदोलन में मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी के साथ खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने की मांग प्रमुख है। किसानों की मांग है कि समर्थन मूल्य पर उनकी पूरी उपज खरीदने की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा खरीदी और भुगतान में हो रही देरी को खत्म करने की भी मांग उठाई जा रही है।
खाद के ई-टोकन से लेकर मुआवजे तक कई मांगें
किसानों की मांग केवल मूंग खरीदी तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था में सुधार चाहते हैं। उनका कहना है कि खाद हासिल करने में किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसलों का उचित मुआवजा देने और खेती से जुड़ी दूसरी समस्याओं का स्थायी समाधान करने की मांग भी आंदोलन में शामिल है।
किसानों का दावा, कम खरीदी से हो रहा नुकसान
किसान नेताओं का कहना है कि सरकारी खरीदी सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों की मूंग समर्थन मूल्य पर नहीं बिक पा रही है। उन्हें अपनी फसल खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है। किसानों का आरोप है कि इससे सीधे तौर पर उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है। इसी मुद्दे को लेकर किसानों ने नर्मदापुरम से भोपाल तक पैदल मार्च किया और राजधानी पहुंचकर धरना शुरू किया।
पुलिस ने कहा, प्रदर्शन शांतिपूर्ण
किसानों के प्रदर्शन को लेकर मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अनिल शर्मा ने कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर किसी तरह का लाठीचार्ज नहीं किया गया है। किसानों और सरकार के बीच बातचीत जारी है और उनकी मांगों पर चर्चा की जा रही है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक फिलहाल मौके पर तनाव की कोई स्थिति नहीं है।
यातायात प्रभावित न हो, इसलिए रास्ते बदले
पुलिस के मुताबिक किसानों के धरने को देखते हुए यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कुछ मार्गों पर वाहनों का रास्ता बदला गया है। प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शन के कारण आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। हालांकि किसानों के धरने और राजधानी में बढ़ी सुरक्षा के बीच आने वाले घंटों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
मांगें पूरी होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं किसान
फिलहाल किसानों और सरकार के बीच बातचीत का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। यही वजह है कि किसान धरनास्थल पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक मूंग की पूरी सरकारी खरीदी समेत उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार किसानों की मांगों पर कोई बड़ा फैसला लेकर आंदोलन खत्म करा पाएगी या राजधानी में किसानों का प्रदर्शन और लंबा चलेगा।
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