By Malay Ojha | Published: 02 August 2026 at 04:07 PM
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार, 3 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरने के लिए सबसे बड़ा मुद्दा सरकारी स्कूलों की स्थिति को बनाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में 26 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद हुए हैं और करीब 1.40 लाख शिक्षक पद खाली पड़े हैं। अखिलेश ने कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा में शिक्षा, किसानों, नौजवानों, आरक्षण और रोजगार समेत कई मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगी।
राजधानी लखनऊ में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि सोमवार से विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है और समाजवादी पार्टी के विधायक जनता से जुड़े तमाम सवाल सदन में उठाएंगे। उनका आरोप था कि सरकार विधानसभा में विपक्ष के सवालों का सामना करने से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसानों की परेशानी, खाद की कमी, रोजगार, शिक्षा और सरकारी संस्थानों से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना होगा।
26 हजार स्कूल बंद होने का दावा
अखिलेश यादव ने सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी को लेकर योगी सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब प्रदेश में करीब 1 लाख 13 हजार 938 सरकारी स्कूल थे। उनके मुताबिक, अब यह संख्या करीब 26 हजार कम हो गई है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने बंद हुए स्कूलों से जुड़े आंकड़े जुटाने शुरू किए तो सरकारी वेबसाइट को ही बंद कर दिया गया।
लखीमपुर से गोरखपुर तक स्कूलों का मुद्दा
सपा प्रमुख ने कहा कि सरकारी स्कूलों के बंद होने का असर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि लखीमपुर खीरी में बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं, जबकि गोरखपुर में करीब 500 प्राथमिक स्कूलों के बंद होने की बात सामने आई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी सरकारी स्कूलों के बंद होने का मुद्दा उठाया।
‘सरकारी स्कूलों से लाखों बच्चे कम हुए’
अखिलेश यादव ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में आई कमी को भी बड़ा सवाल बताया। उनका दावा है कि वर्ष 2017 के आसपास सरकारी प्राथमिक स्कूलों में करीब 1 करोड़ 17 लाख बच्चे पढ़ रहे थे, जबकि अब यह संख्या घटकर लगभग 89 लाख रह गई है। उन्होंने कहा कि करीब 28 लाख बच्चों की संख्या कम होना सामान्य बदलाव नहीं है। अखिलेश ने दावा किया कि इनमें बड़ी संख्या पिछड़े, दलित और आदिवासी वर्ग के बच्चों की है।
शिक्षकों की संख्या घटी, खाली पदों पर भी सवाल
शिक्षकों की कमी को लेकर भी अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में सरकारी स्कूलों में करीब 4 लाख शिक्षक थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 3 लाख 40 हजार रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई भर्ती करने के बजाय बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। उनके मुताबिक, करीब 1 लाख 40 हजार शिक्षक पद रिक्त हैं, जिसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई पर पड़ रहा है।
बेटियों की संख्या घटने का भी दावा
अखिलेश यादव ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले सरकारी स्कूलों में करीब 61 लाख बेटियां पढ़ रही थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर करीब 45 लाख रह गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकारी स्कूलों से बच्चों और खासकर बेटियों की संख्या लगातार क्यों कम हो रही है।
हजारों स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी
सपा अध्यक्ष ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के करीब 7 हजार स्कूलों में बिजली की सुविधा नहीं है। लगभग 2,300 स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं, जबकि 576 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 23 हजार स्कूल ऐसे हैं, जहां कंप्यूटर की सुविधा नहीं है।
स्कूल बंद होने पर सपा ने जारी की पुस्तिका
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के बंद होने से जुड़े आंकड़ों को लेकर एक पुस्तिका भी जारी की है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी विधायक इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे। उनका आरोप है कि सरकारी स्कूलों की कमजोर होती स्थिति का सबसे ज्यादा असर गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है।
जौहर विश्वविद्यालय को लेकर भी सरकार पर हमला
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत से ही इस विश्वविद्यालय को लेकर प्रदेश सरकार की मंशा ठीक नहीं रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग नई यूनिवर्सिटी बनाने में सक्षम नहीं हैं, वे बनी हुई यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई करने की कोशिश कर रहे हैं। सपा प्रमुख ने दावा किया कि सरकार जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठाना चाहती है।
किसानों और खाद की किल्लत पर भी सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने किसानों की हालत और खाद की कमी को लेकर भी योगी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने खाद की उपलब्धता को लेकर तंज कसते हुए कहा कि पहले खाद की बोरी की चोरी की शिकायतें आती थीं, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि पूरी बोरी ही गायब हो गई। उनका कहना था कि किसान पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहे हैं और खाद की कमी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
एमएसपी से लेकर पेपर लीक तक कई मुद्दे उठाने की तैयारी
समाजवादी पार्टी ने विधानसभा सत्र के दौरान सरकार को कई मोर्चों पर घेरने की तैयारी की है। अखिलेश यादव के मुताबिक, न्यूनतम समर्थन मूल्य, किसानों की परेशानी, शिक्षा, सरकारी स्कूलों की बंदी, शिक्षकों के खाली पद, रोजगार, आरक्षण, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, ई20 ईंधन, एक्सप्रेसवे निर्माण में कथित भ्रष्टाचार और राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े सवाल भी सदन में उठाए जाएंगे।
‘भाजपा सरकार ही उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा संकट’
अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस समय सबसे बड़ा संकट भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। उन्होंने दावा किया कि यदि भाजपा को सत्ता से हटाया जाता है तो प्रदेश की कई समस्याओं का समाधान अपने आप होने लगेगा। हालांकि, विधानसभा के मॉनसून सत्र में अब यह देखना अहम होगा कि समाजवादी पार्टी जिन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है, उन पर सरकार की ओर से क्या जवाब दिया जाता है।
अब विधानसभा में आमने-सामने होगा सत्ता और विपक्ष
सोमवार से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार हैं। समाजवादी पार्टी ने जिस तरह से सत्र शुरू होने से पहले ही सरकारी स्कूलों की संख्या, शिक्षकों के खाली पद और बच्चों की घटती संख्या के आंकड़े सामने रखे हैं, उससे साफ है कि शिक्षा का मुद्दा सदन में विपक्ष के प्रमुख हथियारों में से एक रहने वाला है। इसके साथ ही किसान, रोजगार, आरक्षण और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े सवाल भी सरकार के लिए चुनौती बन सकते हैं।
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