By Malay Ojha | Published: 03 August 2026 at 02:10 PM
पटना: बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव की मतगणना में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने 15 राउंड की गिनती पूरी होने तक अपनी बढ़त बनाए रखी है। सुबह 8 बजे शुरू हुई मतगणना के अब तक के हर राउंड में प्रशांत किशोर आगे बताए जा रहे हैं। अंतिम नतीजे के लिए अभी पूरी गिनती खत्म होने का इंतजार है। इस बीच राजद नेता तेज प्रताप यादव ने भाजपा पर हमला बोलते हुए बांकीपुर के रुझानों को बिहार की राजनीति के लिए बड़ा संदेश बताया है।
15 राउंड के बाद भी प्रशांत किशोर आगे
बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को हुए उपचुनाव के बाद सोमवार को मतगणना शुरू हुई। शुरुआती रुझानों से ही प्रशांत किशोर बढ़त बनाए हुए हैं और 15 राउंड की गिनती पूरी होने तक उनका दबदबा कायम रहा। अब सबकी नजर बाकी बचे राउंड और अंतिम परिणाम पर है। फिलहाल जो तस्वीर सामने आई है, उसमें प्रशांत किशोर अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे चल रहे हैं।
तेज प्रताप यादव ने भाजपा को घेरा
मतगणना के बीच राजद नेता तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि बांकीपुर विधानसभा से एक बड़ा राजनीतिक संदेश निकला है और भाजपा को यहां करारी हार का सामना करना पड़ा है। तेज प्रताप ने दावा किया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपनी विधानसभा सीट नहीं बचा पाए। उन्होंने कहा कि यह परिणाम बताता है कि जनता का फैसला सबसे ऊपर होता है और लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता ही करती है।
‘बांकीपुर से निकला संदेश पूरे बिहार तक जाएगा’
तेज प्रताप यादव ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि बांकीपुर से शुरू हुआ यह राजनीतिक संदेश पूरे बिहार की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, अंतिम परिणाम आने से पहले किसी भी उम्मीदवार की जीत या हार पर अंतिम मुहर लगाना जल्दबाजी होगी। लेकिन 13 राउंड तक लगातार एक ही उम्मीदवार का आगे रहना निश्चित तौर पर चुनावी मुकाबले की दिशा का अहम संकेत माना जा रहा है।
प्रशांत किशोर के लिए क्यों अहम है बांकीपुर का चुनाव?
बांकीपुर उपचुनाव प्रशांत किशोर के राजनीतिक सफर का बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है। लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने खुद चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया। जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में उनका मुकाबला भाजपा और राजद के उम्मीदवारों से है। ऐसे में अगर वह बांकीपुर सीट जीतने में सफल होते हैं, तो यह उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक स्वीकार्यता के साथ-साथ उनकी पार्टी के लिए भी बड़ी उपलब्धि होगी।
जीत मिली तो बिहार की राजनीति में बदलेगा समीकरण
प्रशांत किशोर की जीत का असर केवल बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। जन सुराज पार्टी अभी बिहार की राजनीति में अपने लिए मजबूत जगह बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में राजधानी पटना की महत्वपूर्ण विधानसभा सीट पर जीत पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक आधार तैयार कर सकती है। खासकर तब, जब मुकाबला ऐसी सीट पर हो रही हो जिसे लंबे समय से भाजपा के मजबूत प्रभाव वाले इलाके के तौर पर देखा जाता रहा है।
भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सीट?
बांकीपुर का चुनाव भाजपा के लिए भी प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। पार्टी का इस क्षेत्र में लंबे समय से मजबूत राजनीतिक आधार रहा है। ऐसे में अगर प्रशांत किशोर यहां जीत दर्ज करते हैं, तो इसे भाजपा के पारंपरिक राजनीतिक आधार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के तौर पर देखा जाएगा। चुनावी नतीजा यह भी संकेत दे सकता है कि क्या बिहार के शहरी मतदाताओं के बीच नए राजनीतिक विकल्पों के लिए जगह बन रही है।
क्या प्रशांत किशोर ने भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाई?
अभी मतगणना पूरी नहीं हुई है, इसलिए वोटों के अंतिम आंकड़े सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि किस उम्मीदवार को किस इलाके और किस वर्ग से कितना समर्थन मिला। लेकिन शुरुआती रुझानों में प्रशांत किशोर का लगातार आगे रहना इस सवाल को जरूर जन्म देता है कि क्या जन सुराज पार्टी भाजपा के पारंपरिक मतदाताओं के बीच भी अपनी पकड़ बनाने में सफल हुई है। अगर अंतिम परिणाम में भी यही तस्वीर सामने आती है, तो इस पर राजनीतिक विश्लेषण और चर्चा होना तय है।
राजद के लिए भी नतीजा अहम
बांकीपुर का चुनाव राजद के लिए भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। बिहार में लंबे समय से भाजपा और राजद के बीच सीधा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलता रहा है। ऐसे में किसी तीसरे राजनीतिक विकल्प का मजबूत होकर सामने आना दोनों प्रमुख दलों के लिए चुनौती बन सकता है। अगर प्रशांत किशोर जीतते हैं और राजद का प्रदर्शन कमजोर रहता है, तो आने वाले समय में विपक्षी वोटों के बंटवारे और नए राजनीतिक विकल्पों को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।
एक सीट का नतीजा, लेकिन नजर पूरे बिहार पर
बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे को लेकर राजनीतिक दलों की नजर सिर्फ एक विधानसभा सीट पर नहीं है। इसकी वजह प्रशांत किशोर का चुनावी मैदान में उतरना और जन सुराज पार्टी का बिहार की राजनीति में अपनी जगह बनाने का प्रयास है। अगर प्रशांत किशोर जीत हासिल करते हैं, तो पार्टी को आगे की राजनीति के लिए बड़ा आत्मविश्वास मिलेगा। वहीं भाजपा और राजद के लिए यह नतीजा अपने-अपने राजनीतिक आधार की समीक्षा करने का मौका भी हो सकता है।
अगर प्रशांत किशोर बांकीपुर में जीत दर्ज करते हैं, तो यह उनके लिए पहली बड़ी चुनावी सफलता के रूप में देखा जाएगा और जन सुराज पार्टी को बिहार की राजनीति में एक नई पहचान मिल सकती है। दूसरी ओर, अगर अंतिम राउंड में तस्वीर बदलती है, तो शुरुआती बढ़त के बावजूद मुकाबले का पूरा समीकरण बदल जाएगा। फिलहाल 13 राउंड तक प्रशांत किशोर की लगातार बढ़त ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि बांकीपुर का यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि इसके नतीजे को बिहार की बदलती राजनीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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