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महिला पहलवानों से यौन उत्पीड़न केस में बृजभूषण शरण सिंह बरी, दिल्ली की अदालत ने दी बड़ी राहत

By Malay Ojha | Published: 03 August 2026 at 12:06 PM

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने इस मामले में सह-आरोपी रहे विनोद तोमर को भी बरी कर दिया। यह फैसला सोमवार को बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान सुनाया गया। करीब तीन साल से देशभर में चर्चा का विषय बने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद अब बृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण ने क्या कहा?
बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह फैसले पर अभी विस्तार से कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने कहा कि अदालत ने करीब तीन साल बाद उन्हें बरी किया है और वह शुरुआत से ही इसे अपने खिलाफ साजिश बताते रहे हैं। उनका कहना था कि उन्हें पहले से भरोसा था कि आखिरकार सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने खुद को कभी अपराधी नहीं माना और अब उन्हें उम्मीद है कि खिलाड़ी आगे देश का नाम दुनिया में रोशन करेंगे।

महिला पहलवानों के आरोपों के बाद शुरू हुआ था विवाद
यह मामला वर्ष 2023 में उस समय देश के सबसे चर्चित विवादों में शामिल हो गया था, जब कई महिला पहलवानों ने तत्कालीन कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। पहलवानों ने आरोप लगाया था कि उनके कार्यकाल के दौरान महिला खिलाड़ियों के साथ यौन उत्पीड़न किया गया और उन्हें डराने-धमकाने तथा पीछा करने जैसी हरकतों का भी सामना करना पड़ा। इन आरोपों के बाद देश के कई नामी पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया था।

जंतर-मंतर के प्रदर्शन ने खींचा था पूरे देश का ध्यान
महिला पहलवानों के समर्थन में शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय मुद्दा बन गया था। प्रदर्शनकारी पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी। इस दौरान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार, खेल प्रशासन और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे। मामला इतना बढ़ा कि देश के खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी।

उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
पहलवानों की शिकायतों के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ने पर मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और मामले की जांच आगे बढ़ाई। पुलिस ने वर्ष 2023 में अदालत के सामने आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ अलग-अलग आरोप लगाए गए थे। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई और फिर मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

2024 में आरोप तय होने के बाद शुरू हुआ था मुकदमा
मामले में अदालत ने वर्ष 2024 में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। सह-आरोपी विनोद तोमर के खिलाफ भी आपराधिक धमकी से जुड़ा आरोप तय किया गया था। इसके बाद अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। बंद कमरे में चली इस कार्यवाही के दौरान शिकायत करने वाली महिला पहलवानों समेत कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाने की तारीख तय की थी।

फैसले से पहले अदालत ने पूरी की थी सुनवाई
मामले की सुनवाई के अंतिम चरण में अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनी थीं। इसके बाद दोनों पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। अदालत में हुई बंद कमरे की सुनवाई में शिकायतकर्ता महिला पहलवानों के अलावा कुश्ती महासंघ और खेल से जुड़े अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए गए थे। इसके बाद अदालत ने तीन अगस्त को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी।

आरोपों से लगातार इनकार करते रहे थे बृजभूषण
पूरे मामले के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने महिला पहलवानों की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया था। उनका कहना था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक और व्यक्तिगत साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने अदालत में भी खुद को निर्दोष बताया था और मुकदमे का सामना करने की बात कही थी। अब अदालत के बरी करने के फैसले के बाद उन्होंने कहा है कि शुरुआत से जिस बात को वह कहते आ रहे थे, फैसला आने के बाद वही बात सही साबित हुई है।

मामले ने खेल प्रशासन पर भी खड़े किए थे सवाल
इस विवाद ने केवल बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगे आरोपों तक ही देश का ध्यान सीमित नहीं रखा, बल्कि खेल संगठनों में खिलाड़ियों की सुरक्षा और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था पर भी गंभीर बहस छेड़ दी थी। महिला खिलाड़ियों ने जिस तरह सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी, उसके बाद खेल संस्थानों में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठे। आंदोलन के दौरान कई बड़े खिलाड़ियों के खुलकर सामने आने से यह मामला और ज्यादा चर्चा में आया।

अब अदालत के फैसले के बाद बदला मामले का रुख
बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के बरी होने के बाद इस चर्चित मामले में अदालत का फैसला सामने आ चुका है। यह मामला वर्ष 2023 में शुरू हुए उस आंदोलन से जुड़ा था, जिसने देश के खेल जगत और राजनीति दोनों को प्रभावित किया था। अदालत के फैसले के बाद अब इस मामले को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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महिला पहलवानों से यौन उत्पीड़न केस में बृजभूषण शरण सिंह बरी, दिल्ली की अदालत ने दी बड़ी राहत

By Malay Ojha | Published: 03 August 2026 at 12:06 PM

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने इस मामले में सह-आरोपी रहे विनोद तोमर को भी बरी कर दिया। यह फैसला सोमवार को बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान सुनाया गया। करीब तीन साल से देशभर में चर्चा का विषय बने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद अब बृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण ने क्या कहा?
बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह फैसले पर अभी विस्तार से कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने कहा कि अदालत ने करीब तीन साल बाद उन्हें बरी किया है और वह शुरुआत से ही इसे अपने खिलाफ साजिश बताते रहे हैं। उनका कहना था कि उन्हें पहले से भरोसा था कि आखिरकार सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने खुद को कभी अपराधी नहीं माना और अब उन्हें उम्मीद है कि खिलाड़ी आगे देश का नाम दुनिया में रोशन करेंगे।

महिला पहलवानों के आरोपों के बाद शुरू हुआ था विवाद
यह मामला वर्ष 2023 में उस समय देश के सबसे चर्चित विवादों में शामिल हो गया था, जब कई महिला पहलवानों ने तत्कालीन कुश्ती महासंघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। पहलवानों ने आरोप लगाया था कि उनके कार्यकाल के दौरान महिला खिलाड़ियों के साथ यौन उत्पीड़न किया गया और उन्हें डराने-धमकाने तथा पीछा करने जैसी हरकतों का भी सामना करना पड़ा। इन आरोपों के बाद देश के कई नामी पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया था।

जंतर-मंतर के प्रदर्शन ने खींचा था पूरे देश का ध्यान
महिला पहलवानों के समर्थन में शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे राष्ट्रीय मुद्दा बन गया था। प्रदर्शनकारी पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी। इस दौरान आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार, खेल प्रशासन और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे। मामला इतना बढ़ा कि देश के खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी।

उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
पहलवानों की शिकायतों के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ने पर मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और मामले की जांच आगे बढ़ाई। पुलिस ने वर्ष 2023 में अदालत के सामने आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ अलग-अलग आरोप लगाए गए थे। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई और फिर मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

2024 में आरोप तय होने के बाद शुरू हुआ था मुकदमा
मामले में अदालत ने वर्ष 2024 में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। सह-आरोपी विनोद तोमर के खिलाफ भी आपराधिक धमकी से जुड़ा आरोप तय किया गया था। इसके बाद अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। बंद कमरे में चली इस कार्यवाही के दौरान शिकायत करने वाली महिला पहलवानों समेत कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाने की तारीख तय की थी।

फैसले से पहले अदालत ने पूरी की थी सुनवाई
मामले की सुनवाई के अंतिम चरण में अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनी थीं। इसके बाद दोनों पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया गया था। अदालत में हुई बंद कमरे की सुनवाई में शिकायतकर्ता महिला पहलवानों के अलावा कुश्ती महासंघ और खेल से जुड़े अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए गए थे। इसके बाद अदालत ने तीन अगस्त को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी।

आरोपों से लगातार इनकार करते रहे थे बृजभूषण
पूरे मामले के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने महिला पहलवानों की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया था। उनका कहना था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक और व्यक्तिगत साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने अदालत में भी खुद को निर्दोष बताया था और मुकदमे का सामना करने की बात कही थी। अब अदालत के बरी करने के फैसले के बाद उन्होंने कहा है कि शुरुआत से जिस बात को वह कहते आ रहे थे, फैसला आने के बाद वही बात सही साबित हुई है।

मामले ने खेल प्रशासन पर भी खड़े किए थे सवाल
इस विवाद ने केवल बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगे आरोपों तक ही देश का ध्यान सीमित नहीं रखा, बल्कि खेल संगठनों में खिलाड़ियों की सुरक्षा और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था पर भी गंभीर बहस छेड़ दी थी। महिला खिलाड़ियों ने जिस तरह सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी, उसके बाद खेल संस्थानों में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठे। आंदोलन के दौरान कई बड़े खिलाड़ियों के खुलकर सामने आने से यह मामला और ज्यादा चर्चा में आया।

अब अदालत के फैसले के बाद बदला मामले का रुख
बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के बरी होने के बाद इस चर्चित मामले में अदालत का फैसला सामने आ चुका है। यह मामला वर्ष 2023 में शुरू हुए उस आंदोलन से जुड़ा था, जिसने देश के खेल जगत और राजनीति दोनों को प्रभावित किया था। अदालत के फैसले के बाद अब इस मामले को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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