By aryavartalive | Published: 08 September 2026 at 07:23 PM
स्वास्थ्य सेवाओं में AI को लेकर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने बड़ा संदेश दिया है।** उन्होंने कहा कि AI को डॉक्टरों के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाने वाले सहयोगी के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक आने वाले समय में AI चिकित्सा अनुसंधान और इलाज से जुड़े फैसलों में डॉक्टरों की मदद करेगा, लेकिन इंसानी विशेषज्ञता की जगह नहीं लेगा।
प्रो. चतुर्वेदी ने यह बात चंडीगढ़ स्थित PGIMER के 63वें संस्थान दिवस पर ‘स्वास्थ्य सेवाओं में AI’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कही। उन्होंने कहा कि भारत में AI को अपनाते समय देश की स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीजों की आबादी और यहां के रोगों के स्वरूप को ध्यान में रखना जरूरी है। केवल दूसरे देशों के आंकड़ों के आधार पर तैयार सिस्टम भारत की जरूरतों को पूरी तरह नहीं समझ सकते।
मेडिकल रिसर्च से लेकर इलाज तक बढ़ेगा इस्तेमाल
BHU कुलपति ने कहा कि AI अब सिर्फ नई तकनीक नहीं रह गया है। चिकित्सा अनुसंधान, रेडियोलॉजी, दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पताल प्रबंधन और साक्ष्य के आधार पर इलाज से जुड़े फैसलों में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। बड़ी मात्रा में उपलब्ध मेडिकल जानकारी को कम समय में समझने और जरूरी जानकारी सामने लाने में AI डॉक्टरों की मदद कर सकता है।
डॉक्टर की विशेषज्ञता सबसे अहम
उन्होंने कहा कि AI का सबसे सफल इस्तेमाल वही है, जहां वह डॉक्टर की क्षमता को बढ़ाता है। क्लिनिकल रिकॉर्ड, पैथोलॉजी रिपोर्ट और वैज्ञानिक शोध से जरूरी जानकारी निकालने में तकनीक मददगार हो सकती है, लेकिन मरीज के इलाज से जुड़ा अंतिम निर्णय चिकित्सा विशेषज्ञ की समझ और अनुभव से ही होना चाहिए।
भारत सिर्फ AI का इस्तेमाल करने वाला देश न बने
प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र में AI का केवल उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहिए। देश की अपनी जरूरतों और परिस्थितियों के आधार पर AI समाधान तैयार करने की दिशा में काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI अब केवल चर्चा या फैशन का विषय नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में इसकी मौजूदगी लगातार बढ़ रही है।
PGIMER को बताया राष्ट्रीय संपदा
BHU कुलपति ने PGIMER को देश की महत्वपूर्ण संस्थाओं में बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन में उसके योगदान की सराहना की। उन्होंने मेडिकल शिक्षा में केवल तथ्यों को याद करने के बजाय क्लिनिकल निर्णय लेने, उपलब्ध साक्ष्यों को समझने, आलोचनात्मक सोच और मरीजों से बेहतर संवाद जैसे कौशल विकसित करने पर जोर दिया।
BHU में खेल गतिविधियों को मजबूत करने पर जोर
इसी बीच काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स बोर्ड में विभिन्न खेलों के चेयरमैन और चेयरपर्सन की बैठक हुई। बैठक में खेल गतिविधियों को मजबूत करने, खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा अलग-अलग खेलों के बीच तालमेल बढ़ाने पर चर्चा हुई।
आगामी तीन प्रतियोगिताओं की तैयारियों पर चर्चा
बैठक में पूर्व क्षेत्रीय अखिल भारतीय हॉकी पुरुष, हैंडबॉल पुरुष और वॉलीबॉल महिला प्रतियोगिताओं को लेकर भी चर्चा की गई। यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स बोर्ड की उपाध्यक्ष प्रो. अर्चना सिंह ने बोर्ड की कार्यप्रणाली और खेल पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी। बैठक का संचालन USB की सेक्रेटरी डॉ. कविता वर्मा ने किया।
BHU में हिंदी माह की भी हुई शुरुआत
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिंदी माह-2026 की शुरुआत भी प्रतियोगिताओं के साथ हुई। 7 सितंबर को गैर-शिक्षण कर्मचारियों, एमटीएस और पूर्ववर्ती समूह-घ के लिए हिंदी निबंध एवं शब्द-ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसके बाद 8 सितंबर को कमच्छा स्थित विश्वविद्यालय के तीनों विद्यालयों के कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए सामान्य हिंदी और निबंध प्रतियोगिता कराई गई।
तीनों स्कूलों के करीब 300 छात्रों ने लिया हिस्सा
सेंट्रल हिन्दू गर्ल्स स्कूल, कमच्छा में आयोजित प्रतियोगिता में तीनों विद्यालयों के करीब 300 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। आयोजन विश्वविद्यालय के हिंदी अधिकारी डॉ. शिव कुमार त्रिपाठी और स्कूल के उप-प्राचार्य डॉ. सिद्धार्थ चौधरी के निर्देशन में हुआ। प्रतियोगिता के आयोजन में शिक्षकों और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने भी सहयोग किया।
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