By Malay Ojha | Published: 14 September 2026 at 06:36 PM
समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू करने के ऐलान के बाद सियासत गरमा गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शाह के बयान पर पलटवार करते हुए गोवा में UCC लागू करने की खुली चुनौती दी है। ओवैसी ने सवाल उठाया कि अगर BJP UCC को लेकर इतनी गंभीर है तो आगामी विधानसभा चुनाव वाले गोवा से इसकी शुरुआत क्यों नहीं करती।
ओवैसी ने कहा कि वह अमित शाह, BJP और RSS को चुनौती देते हैं कि वे गोवा में UCC लागू करके दिखाएं। उन्होंने कहा कि गोवा में खड़े होकर यह घोषणा की जाए कि वहां भी वही UCC लागू होगा, जिसे लेकर उत्तराखंड और दूसरे राज्यों में कदम उठाए गए हैं। ओवैसी ने दावा किया कि BJP ऐसा नहीं करेगी।
शाह ने 21 राज्यों को लेकर क्या कहा?
अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में कहा था कि 2029 से पहले BJP के नेतृत्व वाले NDA की सरकार वाले सभी 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में इसकी प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है और बाकी राज्यों में भी इसे लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
ओवैसी ने BJP पर लगाया बड़ा आरोप
AIMIM प्रमुख ने आरोप लगाया कि BJP UCC को समानता के लिए नहीं, बल्कि मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए आगे बढ़ा रही है। उनका कहना है कि इससे गैर-हिंदू समुदायों पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश होगी। हालांकि ये ओवैसी के राजनीतिक आरोप हैं और BJP की ओर से UCC को लेकर तर्क अलग है।
‘भारत की आत्मा अनेकतावाद है’
ओवैसी ने कहा कि भारत की पहचान अनेकतावाद और अलग-अलग समुदायों की विविध परंपराओं से बनी है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का भी हवाला देते हुए UCC को लेकर अपनी आपत्ति जताई। उनका तर्क है कि व्यक्तिगत कानूनों में बदलाव करते समय धार्मिक स्वतंत्रता और समुदायों के अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है।
पुराने लॉ कमीशन की रिपोर्ट का हवाला
ओवैसी ने केंद्र सरकार की ओर से गठित रहे विधि आयोग की 2018 की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। विधि आयोग ने उस समय कहा था कि तत्काल UCC लाना न तो जरूरी था और न ही वांछनीय, हालांकि बाद में 2023 में आयोग ने UCC पर नए सिरे से लोगों और संगठनों से सुझाव मांगे थे।
UCC पर BJP का क्या तर्क है?
BJP UCC को सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समानता से जोड़ती है। अमित शाह ने भी अपने हालिया बयान में इसे समान अधिकारों से जुड़ा कदम बताया है और तीन तलाक खत्म किए जाने का उदाहरण दिया। UCC में आम तौर पर शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए समान नियमों की बात होती है।
गोवा का मुद्दा क्यों अहम है?
ओवैसी का गोवा वाला सवाल इसलिए भी राजनीतिक रूप से अहम है क्योंकि उन्होंने BJP के UCC के दावे को सीधे उसके एक सहयोगी राज्य के उदाहरण से जोड़ दिया है। अब इस मुद्दे पर BJP और NDA की ओर से गोवा को लेकर क्या जवाब आता है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल UCC को लेकर केंद्र की रणनीति राज्य-दर-राज्य आगे बढ़ने की है और 2029 की समयसीमा को लेकर शाह ने अपना लक्ष्य स्पष्ट कर दिया है।
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