By Malay Ojha | Published: 15 September 2026 at 10:28 AM
भारत में बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी बीच Meta ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की जानकारी संबंधित कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ साझा करने पर सहमति जताई है। सरकार इसे बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रही है।
सरकार की कोशिश केवल Meta तक सीमित नहीं है। अधिकारियों की दूसरे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के साथ भी बातचीत चल रही है। मकसद यह है कि बच्चों से जुड़े गैरकानूनी और नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट की पहचान जल्द हो और उसे हटाने के साथ-साथ संबंधित मामलों की जानकारी जांच एजेंसियों तक भी पहुंचाई जा सके।
शिकायत का इंतजार करने के बजाय सक्रिय निगरानी पर जोर
सरकार चाहती है कि सोशल मीडिया कंपनियां केवल शिकायत मिलने के बाद ऐसे कंटेंट को हटाने तक सीमित न रहें। प्लेटफॉर्म्स को तकनीक और अपने सिस्टम का इस्तेमाल करके बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए सक्रिय कदम उठाने होंगे। केंद्र पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट को लेकर कड़े नियम और जिम्मेदारियां तय कर चुका है।
Meta पहले से रिपोर्टिंग व्यवस्था का हवाला दे चुका है
Meta ने जुलाई में कहा था कि भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की रिपोर्टिंग लागू कानून के तहत की जाती है। कंपनी के मुताबिक, वह ऐसे मामलों की जानकारी National Center for Missing and Exploited Children (NCMEC) के जरिए भारत के National Cyber Crime Reporting Portal तक पहुंचाती है। Meta ने यह भी बताया था कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच Facebook और Instagram पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 1.3 करोड़ कंटेंट हटाए गए, जिनमें 96 प्रतिशत से ज्यादा की पहचान कंपनी ने खुद की थी।
सरकार ने जुलाई में भी प्लेटफॉर्म्स से मांगा था जवाब
बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर सरकार का रुख पिछले कुछ महीनों में लगातार सख्त हुआ है। जुलाई में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण सामग्री के प्रसार की रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए संबंधित इंटरमीडियरी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी संबंधित प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट भी उठा चुका है जवाबदेही का सवाल
बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अगस्त 2026 में अदालत ने केंद्र से जवाब मांगा था और इस बात को लेकर सवाल उठे थे कि ऐसे मामलों की जानकारी भारतीय कानून लागू करने वाली एजेंसियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया का पालन किस तरह हो रहा है।
सरकार का साफ संदेश- बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही नहीं
केंद्र सरकार का फोकस अब सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और मजबूत करने पर है। बच्चों से जुड़े यौन शोषण और दूसरे हानिकारक कंटेंट की पहचान, रिपोर्टिंग और उसे हटाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाना सरकार की प्राथमिकता में है। साफ संकेत है कि भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी।
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