By Malay Ojha | Published: 22 September 2026 at 07:28 PM
ओवेरियन कैंसर से जूझ रही 70 वर्षीय महिला के लिए गिरने के बाद रीढ़ की हड्डी में हुआ फ्रैक्चर परेशानी का कारण बन गया। तेज दर्द के बाद मरीज को फोर्ड हॉस्पिटल, पटना लाया गया, जहां जांच में रीढ़ की हड्डी के L1 वर्टिब्रा में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। मरीज की पहले से कीमोथेरेपी चल रही थी।
मरीज की स्थिति को देखते हुए अस्पताल के स्पाइन सर्जन डॉ. मणि आनंद ने मिनीमली इनवेसिव तकनीक से इलाज करने का फैसला लिया। इसके तहत मरीज को लोकल एनेस्थीसिया दिया गया और सर्जरी के लिए बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ी।
सुई के जरिए डाली गई बोन सीमेंट
डॉक्टर के मुताबिक, एक सुई के माध्यम से फ्रैक्चर वाले वर्टिब्रा तक पहुंचकर वहां बोन सीमेंट डाला गया। इस प्रक्रिया को वर्टिब्रोप्लास्टी कहा जाता है। इसका उद्देश्य क्षतिग्रस्त वर्टिब्रा को स्थिर करने और फ्रैक्चर से जुड़े दर्द को कम करने में मदद करना है।
करीब 15 मिनट में पूरी हुई प्रक्रिया
अस्पताल के अनुसार पूरी प्रक्रिया करीब 15 मिनट में पूरी हो गई। इलाज के बाद मरीज के दर्द में काफी राहत मिली। मरीज की हालत स्थिर रहने के बाद उन्हें अगले दिन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
कम हीमोग्लोबिन को देखते हुए चुनी तकनीक
डॉ. मणि आनंद ने बताया कि मरीज पहले से कैंसर का इलाज करा रही थीं और उनका हीमोग्लोबिन भी कम था। ऐसे में इलाज की योजना बनाते समय उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखा गया। इसी वजह से मिनीमली इनवेसिव तकनीक के जरिए इलाज का विकल्प चुना गया।
कैंसर के इलाज के बीच हुआ फ्रैक्चर
मरीज पटना के राधे कृष्णा नगर, पिपरा की रहने वाली हैं। गिरने के बाद उन्हें तेज दर्द की शिकायत हुई थी। जांच के दौरान L1 वर्टिब्रा में फ्रैक्चर सामने आया। अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वर्टिब्रोप्लास्टी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें कम समय में घर भेज दिया गया।
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