By Malay Ojha | Published: 23 September 2026 at 06:32 PM
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि SIR के बाद जिन राज्यों में चुनाव कराए गए हैं, वहां चुनावी प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा होनी चाहिए। पश्चिम बंगाल में पुराने मतदाता डेटा के आधार पर फिर से चुनाव कराने की मांग भी उन्होंने रखी है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए मतदाता सूची में गड़बड़ी हुई और इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरे मामले पर जवाब देने और इसकी जांच कराने की मांग की। हालांकि, ये आरोप ममता बनर्जी के राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
SIR के बाद हुए चुनावों की समीक्षा की मांग
ममता ने कहा कि जिन राज्यों में SIR के बाद चुनाव हुए हैं, वहां चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर दोबारा मतदान कराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि INDIA गठबंधन के सहयोगी जल्द इस मुद्दे पर बैठक कर सकते हैं।
चुनावी मशीनरी को लेकर भी आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनावी मशीनरी पर बीजेपी के आईटी सेल का प्रभाव है। उन्होंने न्यायपालिका से भी आम लोगों की बात सुनने की अपील की और कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम रहनी चाहिए।
बीजेपी ने ममता के आरोपों पर किया पलटवार
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं। पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल चुनाव में सफलता नहीं मिलने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
संबित पात्रा ने EC के नोट का दिया हवाला
संबित पात्रा ने कहा कि वह चुनाव आयोग की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर रहे हैं, बल्कि आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट का हवाला दे रहे हैं। चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े विवाद के बीच कहा है कि आंतरिक नोट, सुझाव और आपत्तियां प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए।
रिपोर्ट के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
SIR को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद और बढ़ा जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। आयोग ने इन दावों के जवाब में कहा है कि आंतरिक स्तर पर सुझाव या अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है, जबकि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
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