By Malay Ojha | Published: 26 September 2026 at 03:10 PM
बिहार में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था है। उनके मुताबिक चुनावी प्रक्रिया को लेकर बिना ठोस आधार के सवाल उठाने से लोगों के बीच संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा होता है।
सरावगी ने कहा कि SIR को लेकर चुनाव के समय लगातार भ्रम की स्थिति बनाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को ज्यादा साफ और भरोसेमंद बनाने के लिए सत्यापन जरूरी है। हालिया बयान में भी उन्होंने SIR नोटिस को सीधे नाम कटने से जोड़ने पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि संबंधित लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिलता है।
मृत और दूसरी जगह जा चुके मतदाताओं का सत्यापन
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, जिनके नाम एक से ज्यादा जगह दर्ज हैं या जो स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं, ऐसे मामलों की जांच मतदाता सूची को अपडेट करने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। बिहार SIR के दौरान निर्वाचन आयोग ने भी मृत, डुप्लीकेट और स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़ी सूचनाएं राजनीतिक दलों के साथ साझा किए जाने की बात कही थी।
राजनीतिक दलों को मिली थी सूची
निर्वाचन आयोग के अनुसार बिहार SIR के दौरान राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट भी प्रक्रिया में शामिल थे। ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दलों को उन नामों की जानकारी भी दी गई थी, जो पुरानी सूची में थे लेकिन ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं थे। इसके बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया।
कर्नाटक और बंगाल का भी दिया उदाहरण
सरावगी ने तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में हुई चुनावी प्रक्रियाओं का जिक्र करते हुए विपक्ष से सवाल किया कि अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची को लेकर उसके सवालों का आधार क्या है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए और विपक्षी दलों ने चुनाव में जीत दर्ज की। पश्चिम बंगाल में SIR से हटाए गए मतदाताओं को दावे और अपील का मौका दिए जाने की प्रक्रिया भी सामने आई है।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
संजय सरावगी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। राहुल गांधी के बयानों को लेकर सरावगी ने सवाल उठाते हुए कहा कि SIR जैसे मुद्दे पर पूरी जानकारी के साथ बात करना जरूरी है।
फर्जी मतदान का फायदा उठाता रहा विपक्ष
सरावगी ने आरोप लगाया कि विपक्ष ऐसे नामों के बने रहने का फायदा उठाता रहा है, जो एक से अधिक जगह दर्ज हैं या जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है अथवा जो स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके हैं। हालांकि यह विपक्ष पर लगाया गया भाजपा नेता का राजनीतिक आरोप है। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों में बिहार SIR के दौरान बड़ी संख्या में मृत, डुप्लीकेट और स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड सामने आने की बात दर्ज है।
मतदाता सूची की शुचिता पर जोर
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मतदाता सूची जितनी सही और अपडेट होगी, चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा उतना ही मजबूत होगा। उन्होंने विपक्ष से SIR को लेकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने के बजाय तथ्यों के आधार पर सवाल उठाने की अपील की।
बिहार में SIR की अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर 2025 को जारी हुई थी, जिसमें करीब 7.42 करोड़ मतदाता शामिल थे। निर्वाचन आयोग के अनुसार ड्राफ्ट सूची से 65 लाख नाम हटे थे, जबकि दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद 21.53 लाख पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े गए।
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