By Malay Ojha | Published: 27 September 2026 at 05:14 PM
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान स्थित ट्रॉमा सेंटर में POSUPCON 2026 की शुरुआत हो गई है। ‘पीडियाट्रिक डिफॉर्मिटी करेक्शन’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से विशेषज्ञ, सर्जन, फैकल्टी सदस्य, रेजिडेंट और विद्यार्थी जुटे हैं। सम्मेलन 26 और 27 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए BHU के कुलपति एवं मुख्य अतिथि प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि बच्चों में हड्डियों से जुड़ी विकृतियों का समय पर इलाज बेहद जरूरी है। जन्मजात विकृतियों का इलाज लंबे समय तक टलने पर आगे चलकर उपचार ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
Pediatric Orthopedics को मजबूत करने की जरूरत
प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स को मजबूत करने के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम, फेलोशिप, विशेष यूनिट और जरूरी पद विकसित करने की दिशा में लगातार काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि IMS-BHU और ऑर्थोपेडिक्स विभाग से आने वाले उपयोगी प्रस्तावों को विश्वविद्यालय की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।
‘बच्चे छोटे वयस्क नहीं होते’
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय सिंह ने कहा कि बच्चों की शारीरिक संरचना और शरीर की कार्यप्रणाली वयस्कों से अलग होती है। चोट या बीमारी के प्रति बच्चों की प्रतिक्रिया भी अलग हो सकती है। इसलिए उनके इलाज के दौरान इन विशेषताओं को समझना जरूरी है।
IMS-BHU में विशेषज्ञ सेवाओं पर जोर
चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस.एन. सांखवार ने पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स को महत्वपूर्ण विशेषज्ञता बताते हुए कहा कि ऐसी सेवाएं हर जगह उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने IMS-BHU में भी इस क्षेत्र से जुड़ी विशेष सुविधाएं और सेवाएं विकसित करने की जरूरत बताई।
समय पर इलाज से जीवनभर का फायदा
POSUP के सचिव डॉ. सैयद फैसल अफाक ने कहा कि बच्चों की हड्डियां लगातार विकसित होती रहती हैं। ऐसे में बीमारी या विकृति के इलाज का सही समय महत्वपूर्ण होता है। समय पर लिया गया उपचार संबंधी फैसला बच्चे की कार्यक्षमता को लंबे समय तक बेहतर रखने में मदद कर सकता है।
युवा सर्जनों और शोध को बढ़ावा
डॉ. अफाक ने कहा कि POSUP को सिर्फ वार्षिक सम्मेलन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे विशेषज्ञों के बीच लगातार सीखने, जटिल मामलों पर चर्चा, युवा सर्जनों के मार्गदर्शन, शोध और अनुभव साझा करने के मंच के रूप में विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने बहुकेंद्रीय शोध और फेलोशिप को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
हैंड्स-ऑन वर्कशॉप में व्यावहारिक प्रशिक्षण
सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष और ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष प्रो. अजित सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में चुनौतीपूर्ण मामलों की चर्चा, पैनल डिस्कशन, वैज्ञानिक प्रस्तुतियां और हैंड्स-ऑन वर्कशॉप शामिल हैं। उनका कहना था कि बचपन में लिया गया उपचार संबंधी फैसला बच्चे के आगे के जीवन पर असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों की मौजूदगी से बढ़ेगा संवाद
सम्मेलन में ऑर्थोपेडिक सर्जन प्रो. अमित रस्तोगी समेत कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। आयोजन सचिव डॉ. शुभम श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन का उद्देश्य पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स से जुड़े अनुभवों और उपचार के तरीकों पर विशेषज्ञों के बीच संवाद को आगे बढ़ाना है।
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