By Malay Ojha | Published: 05 October 2026 at 10:24 PM
वाराणसी। तुलसीघाट स्थित तुलसी मंदिर में सोमवार शाम मुकुट पूजन के साथ गोस्वामी तुलसीदास रामलीला समिति की रामलीला शुरू हो गई। समिति के अध्यक्ष महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने मुकुट पूजन कर आरती की। इसके साथ ही तुलसीघाट की पारंपरिक रामलीला का विधिवत शुभारंभ हुआ।
लीला मंत्री राजेश कुमार दीक्षित और विश्वनाथ यादव के संयोजन में रामलीला का पहला मंचन हुआ। व्यास पं. श्याम बिहारी पांडेय की देखरेख में रामायणियों प्रभुदत्त त्रिपाठी, राजकुमार राघवेन्द्र पांडेय, संजीव कुमार और रिभु कात्यायन ने तुलसीदास की लिखी पोथी से पांच दोहे और छंदों का पाठ किया। इसके बाद लीला आगे बढ़ी।
26 अक्टूबर तक चलेगी रामलीला
तुलसीघाट की यह रामलीला 26 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। आयोजन के दौरान गोस्वामी तुलसीदास की परंपरा के अनुसार रामकथा के अलग-अलग प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। मुकुट पूजन के साथ शुरू हुई लीला को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
भारत में भक्ति की धारा से जोड़ा
मुकुट पूजन के बाद महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने कलियुग से पीड़ित लोगों के कल्याण के लिए श्रीरामचरितमानस की रचना की। उन्होंने कहा कि तुलसीदास ने राम के चरित्र को लोगों के सामने साकार रूप में प्रस्तुत करने के लिए रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाया।
तुलसीदास की रामलीला को बताया मूल परंपरा
महंत मिश्र ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की रामलीला आज प्रचलित रामलीला परंपराओं की मूल और आदिम लीला मानी जाती है। उनके मुताबिक, रामलीला के जरिए भगवान श्रीराम के चरित्र और उनके आदर्शों को लोगों के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
तुलसीघाट की परंपरा से जुड़ा आयोजन
तुलसीघाट की रामलीला काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा है। हर वर्ष यहां रामकथा के प्रसंगों का मंचन तुलसीदास की परंपरा के अनुरूप किया जाता है। इस बार भी आयोजन की शुरुआत मुकुट पूजन से की गई है।
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