By Malay Ojha | Published: 07 October 2026 at 06:50 PM
पटना में मौसम के हिसाब से खेती को बेहतर बनाने के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में 7 अक्टूबर को ‘युवाओं का मौसम के अनुकूल स्मार्ट कृषि हेतु कौशल विकास’ विषय पर ट्रेनिंग की शुरुआत हुई। इसमें बिहार के अलग-अलग जिलों से 20 युवा किसान शामिल हुए हैं।
प्रशिक्षण में पूर्णिया, वैशाली, बांका, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सिवान, जमुई, पटना और बक्सर के युवा किसान हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का फोकस मौसम की जानकारी के आधार पर खेती से जुड़े फैसले लेने, बदलते मौसम के जोखिम को समझने और आधुनिक कृषि-मौसम सेवाओं का सही इस्तेमाल करने पर है।
मौसम की सही जानकारी से घटेगा खेती का जोखिम
कार्यक्रम आयोजन समिति के अध्यक्ष और ICAR पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि प्रबंधन की जानकारी बेहद जरूरी हो गई है। समय पर मिलने वाले मौसम पूर्वानुमान और वैज्ञानिक सलाह को खेती के फैसलों से जोड़कर फसल उत्पादन में होने वाले नुकसान का जोखिम कम किया जा सकता है।
युवाओं से गांवों तक पहुंचाने की अपील
डॉ. अनुप दास ने प्रशिक्षण में शामिल युवाओं और किसानों से सीखी गई तकनीकों को अपने-अपने क्षेत्रों में अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर मौसम की जानकारी का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो खेती को ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है। साथ ही युवाओं से इस जानकारी को दूसरे किसानों तक पहुंचाने को भी कहा गया।
पहले दिन इन मुद्दों पर हुई चर्चा
प्रशिक्षण के पहले दिन स्मार्ट मौसम प्रबंधन और जलवायु सहनशील खेती पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इसमें भारत मौसम विज्ञान विभाग की मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा किसानों ने मौसम से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
फसल, कीट और रोग पर मौसम का असर
प्रशिक्षण में फसल, कीट और रोगों पर मौसम के प्रभाव और उनके प्रबंधन के तरीकों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि तापमान, बारिश और मौसम में अचानक होने वाले बदलाव का असर फसल की सेहत के साथ-साथ पशुधन और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है।
मोबाइल से मौसम की जानकारी लेना भी सिखाया गया
युवाओं को मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए मौसम की जानकारी हासिल करने और उसका खेती में इस्तेमाल करने का तरीका भी बताया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक सही समय पर मौसम का पूर्वानुमान मिलने से किसान सिंचाई, बुआई, कीटनाशक के इस्तेमाल और दूसरी कृषि गतिविधियों की बेहतर योजना बना सकते हैं।
स्मार्ट और टिकाऊ खेती पर जोर
तीन दिवसीय प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं और किसानों को मौसम आधारित कृषि प्रबंधन का व्यावहारिक ज्ञान देना है। कार्यक्रम के जरिए किसानों को स्मार्ट, जलवायु-सहिष्णु और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. संजीव कुमार, प्रभागाध्यक्ष, फसल अनुसंधान और डॉ. मनीषा टम्टा, वैज्ञानिक (कृषि मौसम विज्ञान) हैं।
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