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बिहार में 3 डॉक्टरों पर विभागीय कार्रवाई शुरू, मरीजों को निजी अस्पताल भेजने समेत लगे गंभीर आरोप

By Malay Ojha | Published: 16 October 2026 at 09:00 AM

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सरकारी अस्पतालों में लापरवाही के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। पटना के लोकनायक जयप्रकाश नारायण सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के तीन डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। इन पर ड्यूटी से गायब रहने, मरीजों को निजी अस्पताल जाने के लिए मजबूर करने और इमरजेंसी में भर्ती मरीजों की ठीक से निगरानी नहीं करने जैसे आरोप हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने तीनों डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद अलग-अलग ज्ञापन जारी कर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अब तीनों डॉक्टरों को एक सप्ताह के भीतर अपना लिखित पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

ड्यूटी से गायब रहने का आरोप
राजवंशीनगर स्थित एलएनजेपी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान डॉ. राज किशोर रौशन के खिलाफ शिकायत मिली थी। उन पर रोस्टर के मुताबिक दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहने का आरोप है। इसके अलावा निजी क्लिनिक चलाने और इसके कारण अक्सर सरकारी ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की शिकायत भी की गई थी।

मरीजों को निजी अस्पताल भेजने की शिकायत
डॉ. श्याम किशोर पर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को सादे कागज पर अपने निजी अस्पताल जाने के लिए बाध्य करने का आरोप लगाया गया है। विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उनसे जवाब मांगा था। स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिलने के बाद अब उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।

इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के इलाज पर भी सवाल
तीसरे डॉक्टर डॉ. अमरनाथ प्रसाद के खिलाफ आकस्मिक कक्ष में भर्ती मरीजों की लगातार जांच नहीं करने की शिकायत मिली थी। उन पर मरीजों को बाहर से दवाएं लाने के लिए मजबूर करने का भी आरोप है। स्वास्थ्य विभाग ने इन आरोपों से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य की प्रतियां उपलब्ध कराते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।

एक सप्ताह में देना होगा जवाब
स्वास्थ्य विभाग ने तीनों डॉक्टरों को जारी ज्ञापन में आरोपों का पूरा विवरण दिया है। उन्हें यह भी बताना होगा कि वे किन आरोपों को स्वीकार करते हैं और किनसे इनकार करते हैं। यदि कोई डॉक्टर व्यक्तिगत सुनवाई चाहता है, तो वह इसके लिए भी अपना अनुरोध दे सकता है।

विभाग ने साफ किया है कि तय समय में जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि, आरोपों की पुष्टि और अंतिम कार्रवाई विभागीय जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

7 जुलाई को मंत्री ने किया था औचक निरीक्षण
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने 7 जुलाई 2026 को पटना के राजवंशीनगर स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। इसी दौरान मिली शिकायतों और संबंधित रिपोर्ट के आधार पर तीनों डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। जवाबों की समीक्षा के बाद विभाग ने कार्रवाई आगे बढ़ाने का फैसला लिया।

इस कार्रवाई के जरिए स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति, मरीजों के साथ व्यवहार और इलाज की व्यवस्था को लेकर सख्ती का संकेत दिया है। फिलहाल तीनों डॉक्टरों पर लगे आरोपों की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।

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बिहार में 3 डॉक्टरों पर विभागीय कार्रवाई शुरू, मरीजों को निजी अस्पताल भेजने समेत लगे गंभीर आरोप

By Malay Ojha | Published: 16 October 2026 at 09:00 AM

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सरकारी अस्पतालों में लापरवाही के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। पटना के लोकनायक जयप्रकाश नारायण सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के तीन डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। इन पर ड्यूटी से गायब रहने, मरीजों को निजी अस्पताल जाने के लिए मजबूर करने और इमरजेंसी में भर्ती मरीजों की ठीक से निगरानी नहीं करने जैसे आरोप हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने तीनों डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद अलग-अलग ज्ञापन जारी कर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अब तीनों डॉक्टरों को एक सप्ताह के भीतर अपना लिखित पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

ड्यूटी से गायब रहने का आरोप
राजवंशीनगर स्थित एलएनजेपी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान डॉ. राज किशोर रौशन के खिलाफ शिकायत मिली थी। उन पर रोस्टर के मुताबिक दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहने का आरोप है। इसके अलावा निजी क्लिनिक चलाने और इसके कारण अक्सर सरकारी ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की शिकायत भी की गई थी।

मरीजों को निजी अस्पताल भेजने की शिकायत
डॉ. श्याम किशोर पर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को सादे कागज पर अपने निजी अस्पताल जाने के लिए बाध्य करने का आरोप लगाया गया है। विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उनसे जवाब मांगा था। स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिलने के बाद अब उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।

इमरजेंसी में भर्ती मरीजों के इलाज पर भी सवाल
तीसरे डॉक्टर डॉ. अमरनाथ प्रसाद के खिलाफ आकस्मिक कक्ष में भर्ती मरीजों की लगातार जांच नहीं करने की शिकायत मिली थी। उन पर मरीजों को बाहर से दवाएं लाने के लिए मजबूर करने का भी आरोप है। स्वास्थ्य विभाग ने इन आरोपों से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य की प्रतियां उपलब्ध कराते हुए उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।

एक सप्ताह में देना होगा जवाब
स्वास्थ्य विभाग ने तीनों डॉक्टरों को जारी ज्ञापन में आरोपों का पूरा विवरण दिया है। उन्हें यह भी बताना होगा कि वे किन आरोपों को स्वीकार करते हैं और किनसे इनकार करते हैं। यदि कोई डॉक्टर व्यक्तिगत सुनवाई चाहता है, तो वह इसके लिए भी अपना अनुरोध दे सकता है।

विभाग ने साफ किया है कि तय समय में जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि, आरोपों की पुष्टि और अंतिम कार्रवाई विभागीय जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

7 जुलाई को मंत्री ने किया था औचक निरीक्षण
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने 7 जुलाई 2026 को पटना के राजवंशीनगर स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। इसी दौरान मिली शिकायतों और संबंधित रिपोर्ट के आधार पर तीनों डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। जवाबों की समीक्षा के बाद विभाग ने कार्रवाई आगे बढ़ाने का फैसला लिया।

इस कार्रवाई के जरिए स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति, मरीजों के साथ व्यवहार और इलाज की व्यवस्था को लेकर सख्ती का संकेत दिया है। फिलहाल तीनों डॉक्टरों पर लगे आरोपों की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।

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