By Malay Ojha | Published: 18 June 2026 at 11:29 AM
उत्तर प्रदेश में करोड़ों रुपये के अवैध कोडीन सिरप कारोबार के खिलाफ चल रही कार्रवाई ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। इस पूरे नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल और उसके दो करीबी सहयोगियों वरुण सिंह तथा गौरव जायसवाल को अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया है। पुलिस और विशेष कार्य बल की रिपोर्ट के बाद अब तीनों आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी शुरू हो गई है। अधिकारियों का दावा है कि कार्रवाई की भनक लगते ही तीनों आरोपी देश छोड़कर दुबई पहुंच गए थे।
लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज मुकदमे के आधार पर अदालत ने पहले आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया, ताकि देश छोड़कर भागे आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। लेकिन बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद आरोपी अदालत के सामने पेश नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने तीनों को भगोड़ा घोषित कर दिया।
अब होगी संपत्ति कुर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार अदालत से भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद अब आरोपियों की चल और अचल संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी दबाव बढ़ेगा।
18 आरोपी पहले ही पहुंच चुके हैं जेल
इस मामले में पुलिस और विशेष कार्य बल पहले ही बड़ी कार्रवाई कर चुके हैं। अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर पूरे नेटवर्क की परतें खुल रही हैं।
कैसे चलता था करोड़ों का कारोबार?
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी दवा कंपनियों, नकली लाइसेंस और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके वैध उत्पादन इकाइयों से बड़ी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप हासिल करता था। इसके बाद इस सिरप को अवैध तरीके से बाजार में पहुंचाया जाता था।
बताया जा रहा है कि इस कारोबार से जुड़े लोग दस्तावेजों में हेराफेरी करके माल की खरीद और बिक्री को वैध दिखाने की कोशिश करते थे। इसी वजह से लंबे समय तक यह नेटवर्क एजेंसियों की नजर से बचा रहा।
कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार यह कारोबार केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। सिरप की खेप अन्य राज्यों तक भी पहुंचाई जाती थी। सीमा से जुड़े इलाकों में इसकी मांग अधिक होने के कारण तस्कर कई गुना ज्यादा कीमत पर इसकी बिक्री करते थे। इससे करोड़ों रुपये का अवैध मुनाफा कमाया जा रहा था।
विशेष कार्य बल की जांच में बड़े खुलासे
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने जांच विशेष कार्य बल को सौंपी थी। जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन, फर्जी दस्तावेजों और नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्ध लोगों की पहचान की गई। अधिकारियों को शक है कि इस कारोबार से जुड़े पैसों को इधर-उधर करने के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
शुभम जायसवाल की भूमिका पर एजेंसियों की नजर
जांच में शुभम जायसवाल को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालक माना जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि कारोबार की वित्तीय व्यवस्था और माल की आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले उसी के स्तर पर लिए जाते थे। इसी कारण उस पर एक लाख रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है।
आगे क्या होगा?
अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद अब जांच एजेंसियों का अगला लक्ष्य आरोपियों की संपत्तियों को जब्त करना और उन्हें भारत वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

